अमेरिका ने 15 साल में तैयार किया GBU-57, ईरान पर हमले के लिए बनाया बंकर-बस्टर बम, जानें इसकी ताकत

21 जून 2025 को अमेरिका ने ईरान की रणनीतिक परमाणु साइटों पर एक गुप्त सैन्य अभियान "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" के तहत हमला किया.

America developed bunker-buster bomb to attack Iran
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- Internet

तेहरान/वॉशिंगटन: 21 जून 2025 को अमेरिका ने ईरान की रणनीतिक परमाणु साइटों पर एक गुप्त सैन्य अभियान "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" के तहत हमला किया. इस कार्रवाई में अमेरिका ने पहली बार GBU-57 'बंकर बस्टर' बम का प्रयोग किया, जिसे खासतौर पर दुर्गम और गहराई में स्थित लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

GBU-57: 15 वर्षों की तकनीकी मेहनत

अमेरिकी वायु सेना के अनुसार, GBU-57 मासिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बम को बनाने में लगभग 15 साल का समय लगा. इस परियोजना की शुरुआत 2009 में हुई थी, जब अमेरिका को ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र की जानकारी मिली थी, लेकिन उस समय उसके पास इस तरह की भूमिगत संरचनाओं को नष्ट करने के लिए उपयुक्त हथियार नहीं थे.

हमले का लक्ष्य: भूमिगत परमाणु प्रतिष्ठान

इस ऑपरेशन में अमेरिका ने ईरान के फोर्डो, नतांज, और एक अन्य गुप्त साइट को निशाना बनाया. कुल सात B-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर्स द्वारा दर्जनभर से अधिक GBU-57 बम गिराए गए. इन बमों ने लगभग 1000 फीट प्रति सेकेंड की रफ्तार से लक्ष्य को भेदा और गहरी भूमिगत संरचनाओं को क्षति पहुंचाई.

फोर्डो साइट पर दो मुख्य वेंटिलेशन शाफ्ट्स को निशाना बनाया गया, जिन्हें ईरानी इंजीनियरों ने कंक्रीट से बंद करने की कोशिश की थी. अमेरिकी बमों ने पहले इस कंक्रीट को तोड़ा, फिर इसके बाद चार MOP बमों ने भीतर जाकर विस्फोट किया.

GBU-57: अत्याधुनिक युद्धक क्षमता का प्रतीक

GBU-57 बम का वजन करीब 30,000 पाउंड (13,600 किलोग्राम) है और यह 60 मीटर (लगभग 200 फीट) तक चट्टान या कंक्रीट में घुस सकता है. इसमें विशेष प्रकार का स्टील कवच और डिले-फ्यूज सिस्टम लगा है, जो उसे अत्यंत दबाव और कंपन के बावजूद भी सटीक विस्फोट के लिए सक्षम बनाता है.

सिर्फ B-2 बॉम्बर ही गिरा सकता है यह बम

यह बम केवल B-2 स्टेल्थ बॉम्बर से ही गिराया जा सकता है. B-2 की सबसे बड़ी ताकत इसका रडार से बच निकलने वाला डिज़ाइन और लंबी दूरी तक बिना रुके उड़ने की क्षमता है — लगभग 9,600 किमी तक.

जनरल डैन केन ने बताया कि इस मिशन के तहत कुछ B-2 विमानों को प्रशांत क्षेत्र की ओर भेजा गया ताकि ईरानी रडार और डिफेंस सिस्टम को भ्रमित किया जा सके, जबकि असली हमला करने वाली यूनिट ने दूसरी दिशा से प्रवेश किया.

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ऑपरेशन

यह ऑपरेशन अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण था. यह अब तक का सबसे बड़ा B-2 मिशन माना जा रहा है और अमेरिकी वायु सेना की एक बड़ी तकनीकी और सैन्य उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.

ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान ने अब तक इस हमले की पुष्टि नहीं की है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस ऑपरेशन के दूरगामी भू-राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका-ईरान संबंधों के भविष्य को लेकर.

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