वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपने सैन्य अभियान को और आक्रामक बनाने के संकेत दे दिए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अब ईरान के खिलाफ अगला बड़ा कदम उठाते हुए लंबी दूरी की घातक JASSM-ER क्रूज मिसाइल को युद्धक्षेत्र में तैनात कर रहा है.
यह तैनाती ऐसे समय में हो रही है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि अगर युद्धविराम पर सहमति नहीं बनी, तो उसे “पाषाण युग” में पहुंचा दिया जाएगा. दूसरी तरफ ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका को “नर्क का दरवाजा” खोलने की धमकी दी है.
भंडार से निकाली जा रहीं मिसाइलें
सूत्रों के अनुसार, इन अत्याधुनिक मिसाइलों को उन सैन्य भंडारों से निकाला जा रहा है जो पहले अन्य क्षेत्रों के लिए सुरक्षित रखे गए थे. बताया गया है कि मार्च के अंतिम सप्ताह में ही इन मिसाइलों को प्रशांत क्षेत्र के स्टॉक से हटाकर सक्रिय मोर्चे पर भेजने का आदेश दिया गया था.
अमेरिका के अलग-अलग ठिकानों- जिनमें मुख्य अमेरिकी भूभाग भी शामिल है, से इन मिसाइलों को यूएस सेंट्रल कमांड के बेस या ब्रिटेन के फेयरफोर्ड जैसे रणनीतिक ठिकानों तक पहुंचाया जा रहा है.
कितनी खतरनाक है JASSM-ER मिसाइल?
JASSM-ER क्रूज मिसाइल (जॉइंट एयर-टू-सरफेस मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज) अमेरिका के सबसे आधुनिक और घातक हथियारों में गिनी जाती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिसाइल का इस्तेमाल उन हालात में किया जाता है, जब दुश्मन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करना जोखिम भरा हो. ऐसे में यह हथियार दूर से ही सटीक हमला करने की सुविधा देता है.
अमेरिका के सामने चुनौती भी कम नहीं
हालांकि इन मिसाइलों की तैनाती के साथ अमेरिका के सामने एक बड़ी रणनीतिक चुनौती भी खड़ी हो गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर बड़े पैमाने पर इनका इस्तेमाल होता है, तो अमेरिका के कुल भंडार में तेजी से कमी आ सकती है.
यह संख्या एक बड़े युद्ध के लिए सीमित मानी जा रही है और इससे भविष्य की सैन्य तैयारियों पर असर पड़ सकता है.
दो-तिहाई जखीरा ईरान मोर्चे पर
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका अपने कम दूरी वाले संस्करण JASSM के साथ-साथ लंबी दूरी वाले JASSM-ER का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है. अनुमान है कि कुल जखीरे का लगभग दो-तिहाई हिस्सा ईरान के खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है.
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब पहले से ही अमेरिका और इजरायल के मिसाइल भंडार में कमी की खबरें सामने आ चुकी हैं. सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस्तेमाल हो चुके हथियारों की भरपाई मौजूदा उत्पादन क्षमता के हिसाब से करने में कई साल लग सकते हैं.
रणनीति: कम जोखिम, लेकिन बड़ा दांव
लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करने से अमेरिकी सैनिकों को सीधे खतरे से दूर रखा जा सकता है, क्योंकि उन्हें दुश्मन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना पड़ता.
लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा जोखिम भी जुड़ा है, अगर अमेरिका अपने रणनीतिक भंडार को तेजी से खर्च करता है, तो भविष्य में अन्य बड़े मोर्चों, खासकर चीन जैसे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ उसकी तैयारी कमजोर पड़ सकती है.
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