Astra Mk 1 Missiles: भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है और इसी कड़ी में अब भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना जल्द ही 400 स्वदेशी अस्त्र Mk-1 बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलों की खरीद की तैयारी में है.
यह कदम न सिर्फ भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगा.
स्वदेशी तकनीक से तैयार घातक हथियार
अस्त्र Mk-1 मिसाइल का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने किया है, जबकि इसका निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है.
यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित आधुनिक एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे दुश्मन के लड़ाकू विमानों को लंबी दूरी से मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है.
क्या है अस्त्र Mk-1 की ताकत?
अस्त्र Mk-1 अपनी श्रेणी की बेहद उन्नत मिसाइल मानी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी मारक क्षमता और सटीक निशाना लगाने की क्षमता है.
यह मिसाइल सामने से आ रहे लक्ष्य को 100 से 110 किलोमीटर तक की दूरी से निशाना बना सकती है. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब Mach 4.5 है, जो इसे बेहद तेज और घातक बनाती है.
इसमें 15 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड लगाया गया है, जो दुश्मन के विमान को पूरी तरह नष्ट करने में सक्षम है. सबसे खास बात यह है कि यह मिसाइल “बियॉन्ड विजुअल रेंज” तकनीक से लैस है, यानी पायलट को लक्ष्य को आंखों से देखे बिना ही उसे निशाना बनाया जा सकता है.
किन लड़ाकू विमानों पर होगी तैनाती?
अस्त्र Mk-1 फिलहाल Sukhoi Su-30MKI पर पूरी तरह तैनात है, जो भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है.
इसके अलावा अब इस मिसाइल को अन्य प्रमुख विमानों पर भी एकीकृत किया जा रहा है, जिनमें MiG-29K, HAL Tejas Mk-1 और HAL Tejas Mk-1A शामिल हैं.
इससे वायुसेना और नौसेना दोनों की हवाई मारक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा.
क्यों अहम है यह खरीद?
अब तक भारत एयर-टू-एयर मिसाइलों के लिए काफी हद तक विदेशी प्रणालियों जैसे रूस की R-77 और फ्रांस की MICA पर निर्भर रहा है. लेकिन अस्त्र Mk-1 के शामिल होने से यह निर्भरता कम होगी.
इसके साथ ही स्वदेशी मिसाइल होने के कारण इसकी मेंटेनेंस, अपग्रेड और लॉजिस्टिक्स पर खर्च भी कम होगा, जिससे दीर्घकालिक रूप से रक्षा बजट पर सकारात्मक असर पड़ेगा.
हाईटेक फीचर्स से लैस
अस्त्र Mk-1 कई अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है, जो इसे आधुनिक युद्ध के लिए बेहद प्रभावी बनाती हैं.
इसमें एडवांस Ku-बैंड रडार सीकर लगाया गया है, जो लक्ष्य को सटीक रूप से ट्रैक करता है. इसके साथ ही इसमें ECCM (इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेजर) तकनीक मौजूद है, जिससे यह दुश्मन के जैमिंग सिस्टम को भी निष्क्रिय कर सकती है.
मिसाइल में स्मोकलेस इंजन लगाया गया है, जिससे इसे लॉन्च के बाद ट्रैक करना दुश्मन के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है.
आने वाले हैं और भी घातक वर्जन
भारत केवल अस्त्र Mk-1 तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके और उन्नत संस्करणों पर भी तेजी से काम कर रहा है.
अस्त्र Mk-2 की मारक क्षमता लगभग 160 किलोमीटर तक होगी, जबकि अस्त्र Mk-3 को 300 से 350 किलोमीटर तक की दूरी पर लक्ष्य भेदने के लिए विकसित किया जा रहा है. ये नए वर्जन भविष्य में भारत की हवाई ताकत को और भी ज्यादा मजबूत करेंगे.
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