8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के लिए 5 मेंबर फैमिली का प्रस्ताव, कर्मचारियों पर होगी पैसों की बारिश!

केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. नेशनल काउंसिल (जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी – NC-JCM) के स्टाफ साइड ने 14 अप्रैल को 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने विस्तृत ज्ञापन में न्यूनतम वेतन ₹69,000 तय करने की मांग रखी है.

8th Pay Commission 5 Member Family Formula Salary of government employees
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. नेशनल काउंसिल (जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी – NC-JCM) के स्टाफ साइड ने 14 अप्रैल को 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने विस्तृत ज्ञापन में न्यूनतम वेतन ₹69,000 तय करने की मांग रखी है. यह प्रस्ताव केवल फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वेतन तय करने के पूरे ढांचे में बदलाव की ओर इशारा करता है.

यह प्रक्रिया सरकार द्वारा शुरू किए गए व्यापक परामर्श अभियान का हिस्सा है, जिसमें कर्मचारियों, पेंशनर्स और अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं.

परामर्श प्रक्रिया से तय होगा नया वेतन ढांचा

8वें वेतन आयोग ने अपने आधिकारिक पोर्टल और MyGov प्लेटफॉर्म के जरिए एक संरचित प्रश्नावली जारी कर विभिन्न पक्षों से राय मांगी है. इसमें खासतौर पर वेतन से जुड़े मुद्दों- जैसे न्यूनतम वेतन, बेसिक पे, वार्षिक वृद्धि, पे मैट्रिक्स और अधिकतम वेतन पर सुझाव देने को कहा गया है.

NC-JCM के स्टाफ साइड ने इस पर विस्तृत जवाब देते हुए कहा है कि मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर अब बदलती महंगाई और सामाजिक जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है, इसलिए इसमें व्यापक सुधार जरूरी हैं. सुझाव देने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तय की गई है.

3 सदस्य से 5 सदस्यीय परिवार मॉडल तक बदलाव

इस बार सबसे बड़ा प्रस्ताव परिवार की परिभाषा को लेकर सामने आया है. अभी तक वेतन गणना में 3 यूनिट वाले परिवार को आधार माना जाता था, लेकिन अब इसे बदलकर 5 यूनिट करने की मांग की गई है.

प्रस्तावित संरचना इस प्रकार है:

  • कर्मचारी: 1 यूनिट
  • जीवनसाथी: 1 यूनिट
  • दो बच्चे: प्रत्येक 0.8 यूनिट
  • आश्रित माता-पिता: 0.8 यूनिट

इस तरह कुल 5.2 यूनिट बनते हैं, जिसे व्यावहारिक रूप से 5 यूनिट माना गया है.

यह बदलाव इस हकीकत को दर्शाता है कि अधिकतर कर्मचारी अपने माता-पिता की जिम्मेदारी भी निभाते हैं. इस मांग को ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण कानून’ और ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020’ जैसी व्यवस्थाओं से भी समर्थन मिलता है.

“लिविंग वेज” फॉर्मूले पर आधारित सैलरी

स्टाफ साइड ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए “लिविंग वेज” यानी सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी खर्चों को आधार बनाया है. इसमें शामिल हैं:

  • भोजन और पोषण
  • आवास (कुल खर्च का 7.5%)
  • बिजली, पानी और ईंधन (20%)
  • शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट (25%)
  • सामाजिक और पारिवारिक खर्च (25%)
  • डिजिटल और तकनीकी जरूरतें (5%)

इन सभी कारकों को जोड़कर ₹69,000 का न्यूनतम वेतन प्रस्तावित किया गया है.

संभावित नई सैलरी संरचना

प्रस्ताव के अनुसार, 3.83 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने पर वेतन में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. कुछ प्रमुख स्तर इस प्रकार हो सकते हैं:

  • लेवल 1: ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹69,000
  • लेवल 2-3 (मर्ज): ₹83,200
  • लेवल 4-5 (मर्ज): ₹1,12,000
  • लेवल 6: ₹1,35,700
  • लेवल 7-8 (मर्ज): ₹1,82,500
  • लेवल 9-10 (मर्ज): ₹2,15,100

ऊंचे स्तरों (लेवल 11 से 17) पर भी इसी फिटमेंट फैक्टर के आधार पर संशोधन किया जा सकता है.

खानपान के मानकों में बड़ा बदलाव

इस बार वेतन गणना में आहार संबंधी मानकों को भी अपडेट किया गया है. पहले जहां 2700 किलो कैलरी का मानक लिया जाता था, अब इसे बढ़ाकर करीब 3490 किलो कैलरी किया गया है, जैसा कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा सुझाया गया है.

नई खपत सूची में शामिल हैं:

  • दूध और डेयरी उत्पाद (हर महीने बड़ी मात्रा में)
  • अंडे, मांस और मछली जैसे प्रोटीन स्रोत
  • फल, सब्जियां और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थ

इन बदलावों से जीवन-यापन की लागत बढ़ती है, जिससे न्यूनतम वेतन का स्तर भी ऊपर जाता है.

फिटमेंट फैक्टर और पेंशन पर असर

स्टाफ साइड ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है, जो 7वें वेतन आयोग के 2.57 से काफी ज्यादा है.

अगर इसे मंजूरी मिलती है तो:

  • कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल आएगा
  • पेंशनर्स को भी इसका लाभ मिलेगा
  • 2026 से पहले रिटायर हुए लोग भी इसमें शामिल होंगे
  • स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों को भी फायदा मिल सकता है
  • बड़े स्ट्रक्चरल सुधारों की सिफारिश

ज्ञापन में सिर्फ वेतन बढ़ाने की बात नहीं है, बल्कि कुछ अहम सुधार भी सुझाए गए हैं:

  • सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6% करना
  • कुछ पे लेवल्स को मर्ज करना
  • न्यूनतम और अधिकतम वेतन के बीच अंतर को 1:12 तक सीमित रखना

इनका मकसद सैलरी सिस्टम को ज्यादा संतुलित और पारदर्शी बनाना है.

अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

स्टाफ साइड का मानना है कि वेतन बढ़ने से सरकारी खजाने पर केवल बोझ नहीं बढ़ेगा, बल्कि इससे अर्थव्यवस्था को फायदा भी होगा.

  • लोगों की खरीदारी क्षमता बढ़ेगी
  • बाजार में मांग बढ़ेगी
  • टैक्स कलेक्शन में सुधार होगा

इस तरह वेतन वृद्धि को खर्च नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए.

क्या हो सकता है बड़ा बदलाव?

₹69,000 के न्यूनतम वेतन और 5 सदस्यीय परिवार मॉडल का प्रस्ताव यह दिखाता है कि 8वां वेतन आयोग सिर्फ एक सामान्य वेतन संशोधन नहीं, बल्कि एक बड़े ढांचागत बदलाव की दिशा में काम कर रहा है.

कई पक्षों से सुझाव लेने और डेटा आधारित दृष्टिकोण अपनाने के कारण इस बार की सिफारिशें ज्यादा व्यापक और प्रभावी हो सकती हैं.

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