DK Shivakumar Oath Ceremony: कर्नाटक की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत करते हुए डीके शिवकुमार ने बुधवार को राज्य के 34वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की. लोक भवन में आयोजित समारोह में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली. उनके बाद जी. परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. कार्यक्रम शुरू होने से पहले शिवकुमार ने मंच पर पहुंचकर पार्टी नेताओं का अभिवादन किया और उनका स्वागत किया. समारोह में कांग्रेस नेतृत्व की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया.
मां का आशीर्वाद लेकर पहुंचे शपथ लेने
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले डीके शिवकुमार ने अपनी मां गौराम्मा का आशीर्वाद लिया. बेंगलुरु के सदाशिवनगर स्थित आवास पर उन्होंने मां के चरण स्पर्श किए और उनसे शुभकामनाएं प्राप्त कीं. इसके बाद वे शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने पहुंचे.
#WATCH | Bengaluru: Carrying a copy of the Constitution of India, DK Shivakumar takes oath as the Chief Minister of Karnataka.
— ANI (@ANI) June 3, 2026
(Video Source: Congress) pic.twitter.com/gYMsDu8hqL
आवास पर हुआ विशेष धार्मिक अनुष्ठान
शपथ ग्रहण से पहले शिवकुमार के घर पर धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. उनके आवास पर विशेष पूजा और प्रार्थना का आयोजन हुआ, जिसमें कई पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान संपन्न कराया. मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने से पहले यह धार्मिक कार्यक्रम चर्चा का विषय बना रहा.
ज्योतिषीय सलाह पर बदली गई मंच की दिशा
इस बार शपथ ग्रहण समारोह में एक खास बदलाव भी देखने को मिला. आमतौर पर लोक भवन में होने वाले कार्यक्रमों का मंच पश्चिम दिशा की ओर बनाया जाता था, लेकिन इस बार मंच को पूर्व दिशा की ओर स्थापित किया गया. बताया गया कि यह बदलाव ज्योतिषीय सलाह को ध्यान में रखकर किया गया.
समारोह की तैयारियों और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने संभाली. कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और आयोजन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया.
कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ से लगा जाम
शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में काफी उत्साह देखने को मिला. शपथ ग्रहण शुरू होते ही बड़ी संख्या में लोग लोक भवन की ओर पहुंचने लगे, जिससे विधानसभा और आसपास के क्षेत्रों में यातायात प्रभावित हुआ. कई जगहों पर लंबा जाम लग गया और पुलिस को व्यवस्था संभालनी पड़ी.
मंत्रिमंडल में सामाजिक संतुलन पर जोर
नई सरकार के मंत्रिमंडल गठन में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखा गया है. वोक्कालिगा, लिंगायत और दलित समुदायों से तीन-तीन मंत्रियों को शामिल किया गया है. वहीं कुरुबा समुदाय को दो मंत्री पद मिले हैं.
इसके अलावा अनुसूचित जनजाति, मुस्लिम और ईसाई समुदायों को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सामाजिक और जातीय संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा है, जिससे सरकार विभिन्न वर्गों के बीच व्यापक समर्थन बनाए रखना चाहती है.
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