S-400 Air Defence System: भारत की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. रूस से S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी खेप भारत पहुंचनी शुरू हो गई है. रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस खेप का पहला हिस्सा 3 जून को भारत पहुंचा और आने वाले समय में पूरा सिस्टम देश को सौंप दिया जाएगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि चौथी रेजिमेंट के शामिल होने के बाद भारत की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत होगी. इस सिस्टम को रणनीतिक जरूरतों के अनुसार संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है.
2018 में हुई थी बड़ी रक्षा डील
भारत और रूस के बीच अक्टूबर 2018 में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद को लेकर 5.43 अरब डॉलर (करीब 52,000 करोड़ रुपये) का समझौता हुआ था. इस सौदे के तहत भारत को कुल पांच S-400 स्क्वाड्रन मिलनी हैं.
इनमें से तीन स्क्वाड्रन पहले ही भारतीय वायुसेना को मिल चुकी हैं, जबकि चौथी खेप अब पहुंच रही है. यूक्रेन संघर्ष के चलते डिलीवरी में कुछ देरी हुई थी, जिसके कारण बाकी सिस्टम समय पर नहीं मिल पाए थे.
कितनी है एक S-400 स्क्वाड्रन की कीमत?
पूरे सौदे की लागत को देखें तो एक S-400 स्क्वाड्रन की कीमत 10,000 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है. यह दुनिया के सबसे उन्नत और महंगे एयर डिफेंस सिस्टम्स में गिना जाता है.
इसकी क्षमता लंबी दूरी से आने वाले खतरों को पहचानने और उन्हें हवा में ही नष्ट करने की है, जिसके कारण इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
क्या है S-400 की खासियत?
S-400 ट्रायम्फ एक अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है जो एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और इंटरसेप्ट करने में सक्षम माना जाता है.
यह सिस्टम फाइटर जेट, बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और एयरबोर्न सर्विलांस प्लेटफॉर्म जैसे कई प्रकार के हवाई खतरों पर नजर रख सकता है. इसकी अधिकतम निगरानी और लक्ष्य भेदन क्षमता लगभग 400 किलोमीटर तक बताई जाती है.
सीमाओं पर बन रहा मजबूत सुरक्षा कवच
भारत ने अपनी रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए S-400 की पहले से मिली तीन स्क्वाड्रन को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तैनात किया है. इनमें पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं से जुड़े संवेदनशील इलाके शामिल हैं.
नई चौथी स्क्वाड्रन के शामिल होने से देश का एयर डिफेंस नेटवर्क और मजबूत होने की उम्मीद है. वहीं पांचवीं और अंतिम स्क्वाड्रन के भी आने वाले महीनों में मिलने की संभावना जताई जा रही है.
किन देशों के पास है S-400?
भारत के अलावा रूस ने यह उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम चीन और तुर्की को भी उपलब्ध कराया है. S-400 को दुनिया के सबसे प्रभावी वायु रक्षा प्रणालियों में गिना जाता है और इसकी तकनीकी क्षमताओं को लेकर वैश्विक स्तर पर काफी चर्चा होती रही है.
क्या है 'प्रोजेक्ट कुशा'?
विदेशी रक्षा प्रणालियों के साथ-साथ भारत स्वदेशी एयर डिफेंस तकनीक विकसित करने पर भी तेजी से काम कर रहा है. इसी दिशा में 'प्रोजेक्ट कुशा' नामक कार्यक्रम पर कार्य जारी है.
इस परियोजना का उद्देश्य ऐसा स्वदेशी बहुस्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम तैयार करना है, जो दुश्मन के ड्रोन, मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को विभिन्न दूरी पर रोकने में सक्षम हो. भविष्य में यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है.
सुरक्षा क्षमताओं में होगा और इजाफा
चौथी S-400 रेजिमेंट की आपूर्ति शुरू होने के साथ भारत की वायु सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों के बीच ऐसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम देश की रणनीतिक सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं.
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