Cabinet Meeting Decisions: भारत की अर्थव्यवस्था को अगले चरण की रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े फैसले लिए हैं. बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ऐसे कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई, जिनका असर आने वाले वर्षों में देश के परिवहन नेटवर्क, विमानन उद्योग और पर्यावरणीय ढांचे पर साफ दिखाई देगा. कुल 39,290 करोड़ रुपये के निवेश वाले छह बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी देकर सरकार ने संकेत दिया है कि अब फोकस केवल विकास नहीं बल्कि टिकाऊ और संतुलित विकास पर भी रहेगा. सड़क संपर्क बढ़ाने से लेकर एयरलाइंस को राहत देने और प्रदूषण कम करने तक, इन परियोजनाओं का दायरा काफी व्यापक है.
विमानन उद्योग को राहत देने की तैयारी
देश का विमानन क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन ईंधन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव एयरलाइंस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड के गठन को मंजूरी दी है.
यह फंड एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और विमानन ईंधन की कीमतों में अचानक होने वाली वृद्धि के प्रभाव से बचाने में मदद करेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विमानन कंपनियों की लागत पर नियंत्रण रहेगा और यात्रियों पर अतिरिक्त किराये का बोझ पड़ने की संभावना भी कम होगी. साथ ही यह कदम घरेलू एविएशन सेक्टर को अधिक प्रतिस्पर्धी और वित्तीय रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
दिल्ली के प्रदूषण पर सख्ती
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली वर्षों से वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना कर रही है. सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए एक नई योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत पुराने ट्रकों और बसों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया जाएगा.
इस योजना के लिए 5,041 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है. सरकार का मानना है कि भारी वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली के प्रदूषण में बड़ा योगदान देता है. ऐसे में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा. इससे न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को भी कम किया जा सकेगा.
कोस्टल हाईवे से बदलेगी पूर्वी तट की तस्वीर
पूर्वी भारत में पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में एक बड़े हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है. इस परियोजना के तहत रामेश्वर, कोणार्क और पारादीप को जोड़ने वाला कोस्टल हाईवे विकसित किया जाएगा.
करीब 8,301 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा देगा. समुद्री तट से जुड़े क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच मिलने से पर्यटन उद्योग को लाभ होगा, जबकि बंदरगाहों से माल परिवहन भी अधिक तेज और सुगम हो सकेगा.
तेलंगाना में फोर-लेन सड़कें बढ़ाएंगी औद्योगिक रफ्तार
दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल तेलंगाना में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भी बड़ा निवेश किया गया है. सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग-63 और राष्ट्रीय राजमार्ग-563 के कई हिस्सों को चार लेन में बदलने की मंजूरी दी है.
7,597 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य औद्योगिक केंद्रों और व्यापारिक मार्गों के बीच संपर्क को बेहतर बनाना है. बेहतर सड़कें परिवहन समय को कम करेंगी, जिससे उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत घटेगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा.
मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग होगा आधुनिक
देश के भौगोलिक केंद्र माने जाने वाले मध्य प्रदेश में भी सड़क अवसंरचना को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. कैबिनेट ने राष्ट्रीय राजमार्ग 347बी के अपग्रेडेशन के लिए 4,415 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इस परियोजना से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा और माल परिवहन अधिक सुविधाजनक बनेगा. बेहतर सड़क नेटवर्क का सीधा लाभ कृषि, उद्योग और स्थानीय व्यापार को मिलने की उम्मीद है.
बिहार में चार लेन सड़क से बढ़ेगा विकास
बिहार में बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने के लिए खगड़िया से पूर्णिया तक राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और राष्ट्रीय राजमार्ग-231 के हिस्सों को चार लेन में विकसित करने की योजना को मंजूरी मिली है. करीब 3,936 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना उत्तर-पूर्वी बिहार के कई जिलों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगी. इससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ यात्रियों के लिए भी सफर अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगा.
ये भी पढ़ें: G7 Summit: महीनों बाद एक मंच पर दिख सकते हैं पीएम मोदी और ट्रंप, सुधरेंगे भारत-अमेरिका के रिश्ते?