Stock Market Update: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला. वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की सतर्कता के बीच भारतीय बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया. शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा.
सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक नीचे फिसल गया, जबकि निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे आ गया. हालांकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार का रुख कमजोर बना रहा.
शुरुआती कारोबार में लाल निशान में बाजार
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स करीब 74 हजार अंक के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया. वहीं निफ्टी भी गिरावट के साथ 23 हजार अंक के ऊपर लेकिन दबाव में बना रहा. निवेशकों के बीच वैश्विक घटनाक्रमों को लेकर सतर्कता साफ नजर आई.
इस दौरान रुपये में मामूली मजबूती देखने को मिली और भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में थोड़ी बढ़त के साथ खुली.
सेंसेक्स के अधिकांश शेयर दबाव में
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से अधिकांश शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए. ट्रेंट के शेयरों में सबसे अधिक कमजोरी दर्ज की गई.
इसके अलावा इन्फोसिस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, इंडिगो, सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक और एचसीएल टेक जैसे बड़े शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया.
वहीं दूसरी ओर कुछ चुनिंदा शेयरों ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की. अडानी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा, टाइटन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), टीसीएस, एनटीपीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयरों में बढ़त दर्ज की गई.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी
केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार पर भी दबाव देखने को मिला. मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक हल्की गिरावट के साथ कारोबार करते रहे.
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी, रियल एस्टेट और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली. दूसरी तरफ कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑयल एंड गैस और केमिकल सेक्टर के शेयरों में खरीदारी का रुख दिखाई दिया.
निवेशकों की नजर RBI के फैसले पर
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई हैं. शुक्रवार को आरबीआई द्वारा ब्याज दरों और अन्य महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों की घोषणा की जाएगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक के फैसलों का असर बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
गिरावट की प्रमुख वजह क्या है?
विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दिखाई दे रहा है. क्षेत्र में जारी घटनाक्रमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे जोखिम वाले निवेशों में बिकवाली देखी जा रही है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है. इसी वजह से निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाते नजर आ रहे हैं.
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