'हम अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकते', ईरान ने ट्रंप के 'तेवर' का दिया करारा जवाब; क्या करेगा अमेरिका?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर बढ़ाए गए दबाव के बीच ईरान ने राष्ट्रपति ट्रंप को कड़ा संदेश दिया है.

Iran gave a befitting reply to Trump what will America do
ट्रंप-खामेनेई | Photo: ANI

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर बढ़ाए गए दबाव के बीच, ईरान ने राष्ट्रपति ट्रंप को कड़ा संदेश दिया है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मंगलवार को स्पष्ट रूप से कहा कि उनके देश ने किसी भी हाल में अमेरिका से अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करने का इरादा नहीं रखा है. पेजेश्कियान ने ट्रंप को दो टूक शब्दों में कहा, "जो करना है कर लो." उनका यह बयान अमेरिकी धमकियों के बीच आया, जिसमें ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर अपनी दबाव नीति को और तेज किया है.

ईरानी नेताओं का यह बयान उस समय आया है जब ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को एक पत्र लिखा था, जिसमें नए परमाणु समझौते की बात की गई थी. हालांकि, ईरान ने इस पत्र को नकारते हुए कहा कि उन्हें कोई पत्र नहीं मिला है और बातचीत की कोई संभावना नहीं है. ईरानी राष्ट्रपति ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "हम यह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकते कि अमेरिका हमें आदेश दे या धमकी दे. मैं तुमसे बात भी नहीं करूंगा."

रूस और चीन के साथ मिलकर दिखाया शक्ति प्रदर्शन

इस बीच, ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति को प्रदर्शित करने के लिए रूस और चीन के साथ मिलकर एक संयुक्त सैन्य अभ्यास किया. ओमान की खाड़ी में हुआ यह अभ्यास "मैरिटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2025" नाम से जाना जाता है और यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है. यह अभ्यास पांचवां साल था, जब तीनों देशों ने मिलकर इसे आयोजित किया. इस जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता है, जो इसे और भी अहम बनाता है.

अमेरिका की 'अधिकतम दबाव' नीति

ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर से ईरान पर अपनी "अधिकतम दबाव" नीति को लागू किया है, जिसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. हाल ही में, ट्रंप ने इराक को दी गई छूट को समाप्त कर दिया, जिसके तहत इराक को ईरान से बिजली खरीदने की अनुमति दी गई थी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस कदम की निंदा करते हुए कहा कि ईरान इस दबाव और धमकी के बीच बातचीत नहीं करेगा.

2015 में राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान ईरान और वैश्विक शक्तियों के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ था. इस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण रखा था, बदले में उसे प्रतिबंधों में छूट दी गई थी, लेकिन ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद यह समझौता टूट गया और अमेरिका ने फिर से ईरान पर कड़े प्रतिबंध लागू किए.

ईरान का रुख साफ

ईरान का यह कड़ा रुख बताता है कि वह अमेरिका के दबाव में आकर अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने के लिए तैयार नहीं है. इसके बजाय, ईरान ने अपनी ताकत को प्रदर्शित करने के लिए रूस और चीन के साथ सैन्य अभ्यास जैसे कदम उठाए हैं. वहीं, अमेरिका की ओर से ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश जारी है, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस दबाव में झुकेगा नहीं.

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