Super El Nino: देश के कई हिस्सों में इस समय तेज गर्मी लोगों को परेशान कर रही है. उत्तर प्रदेश के बांदा जैसे इलाकों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, और महसूस होने वाली गर्मी इससे भी ज्यादा है. इसी बीच वैज्ञानिकों ने साल 2026 में संभावित सुपर अल-नीनो को लेकर चिंता जताई है. अगर यह स्थिति बनती है, तो इसका असर केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पर देखने को मिल सकता है.
क्या होता है अल-नीनो और सुपर अल-नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो मुख्य रूप से प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में होती है. जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, तो यह स्थिति बनती है.
यदि तापमान सामान्य से 0.5 से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो इसे सामान्य अल-नीनो कहा जाता है. लेकिन जब यही बढ़ोतरी 2 डिग्री या उससे अधिक हो जाती है, तो इसे सुपर अल-नीनो कहा जाता है. यह स्थिति दुर्लभ होती है और इसका प्रभाव ज्यादा तीव्र होता है.
भारत पर क्या हो सकता है असर?
भारत में अल-नीनो का सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ता है. मानसून देश की खेती और जल संसाधनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
इतिहास देखें तो 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में सुपर अल-नीनो के दौरान भारत समेत कई देशों ने इसके असर को महसूस किया था.
ग्लोबल स्तर पर क्या बदलाव होते हैं?
अल नीनो का असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता. यह दुनिया भर के मौसम पैटर्न को बदल देता है.
इस तरह यह एक वैश्विक जलवायु जोखिम बन जाता है, जिसका असर खाद्य सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जीवनशैली तक पड़ सकता है.
अल-नीनो बनता कैसे है?
सामान्य स्थिति में हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं और गर्म पानी को एशिया की ओर धकेलती हैं. लेकिन अल-नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर हो जाती हैं या दिशा बदल देती हैं.
इससे गर्म पानी वापस पूर्वी प्रशांत महासागर की ओर फैलने लगता है और समुद्र का तापमान बढ़ जाता है. यही प्रक्रिया अल-नीनो की स्थिति पैदा करती है.
नाम कैसे पड़ा ‘अल-नीनो’?
‘अल-नीनो’ शब्द स्पेनिश भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है “छोटा बच्चा”. पेरू और इक्वाडोर के मछुआरे इस घटना को क्रिसमस के आसपास देखते थे, इसलिए उन्होंने इसका नाम ईसा मसीह के बाल रूप से जोड़कर ‘एल नीनो’ रख दिया.
ला-नीना क्या है और कैसे अलग है?
ला नीना, अल-नीनो का उल्टा रूप है. इसमें समुद्र का तापमान सामान्य से कम हो जाता है.
भारत के लिए ला-नीना आमतौर पर फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे मानसून मजबूत होता है और अच्छी बारिश होती है. हालांकि, कभी-कभी ज्यादा बारिश बाढ़ का कारण भी बन सकती है.
भारत में गर्मी क्यों बढ़ती है?
अल-नीनो के दौरान मानसून कमजोर हो जाता है या देर से आता है. इससे:
यही कारण है कि अल-नीनो वाले वर्षों में गर्मी ज्यादा महसूस होती है.
क्या हर बार असर एक जैसा होता है?
हर अल-नीनो का प्रभाव एक जैसा नहीं होता. कुछ सालों में इसका असर ज्यादा होता है, तो कुछ में कम. आमतौर पर यह 9 से 12 महीने तक रहता है, लेकिन कई बार यह दो साल तक भी जारी रह सकता है. यह हर 2 से 7 साल के बीच में आता है.
क्या इसे रोका जा सकता है?
अल-नीनो और ला-नीना प्राकृतिक घटनाएं हैं, जिन्हें रोका नहीं जा सकता. हालांकि वैज्ञानिक इनकी भविष्यवाणी करने की कोशिश करते हैं, ताकि पहले से तैयारी की जा सके.
बचाव और तैयारी कैसे करें?
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