'अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो हम उन्हें अच्छे से जवाब देंगे', खामेनेई ने ट्रंप को दी चेतावनी

वैश्विक राजनीति में एक बार फिर तनाव की स्थिति बन रही है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि वाशिंगटन तेहरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई करता है, तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा.

If America attacks Iran we will respond to them strongly Khamenei warns Trump
डोनाल्ड ट्रम्प और अयातुल्ला अली खामेनेई/Photo- ANI

दुबई: वैश्विक राजनीति में एक बार फिर तनाव की स्थिति बन रही है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि वाशिंगटन तेहरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई करता है, तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है.

ट्रंप की धमकी और ईरान की प्रतिक्रिया

रविवार को दिए गए एक बयान में, ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान ने उनके वार्ता प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, तो उसे "अभी तक की सबसे विध्वंसक बमबारी" का सामना करना पड़ेगा. इस धमकी के जवाब में, ईरान ने सोमवार को तेहरान स्थित स्विट्जरलैंड दूतावास को अपनी चिंता से अवगत कराया. चूंकि ईरान में अमेरिका का कोई आधिकारिक दूतावास नहीं है, इसलिए स्विट्जरलैंड दूतावास ही अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का कार्य करता है.

खामेनेई का बयान: स्पष्ट और दो-टूक संदेश

खामेनेई ने अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ अपने बयान में कहा, "हम जानते हैं कि वे हमें नुकसान पहुंचाने की फिराक में हैं, लेकिन अगर वे कोई भी दुस्साहस करते हैं, तो उन्हें इसका करारा जवाब मिलेगा." उन्होंने आगे कहा, "ईरान ने पहले भी बाहरी ताकतों के षड्यंत्रों का डटकर सामना किया है और यदि कोई हमारे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश करता है, तो ईरानी जनता खुद इसका मुकाबला करेगी."

ईरान का अमेरिका पर आरोप

ईरानी अधिकारियों का दावा है कि देश में हालिया अस्थिरता के पीछे पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका, का हाथ है. इनमें 2022-23 में महसा अमिनी की हिरासत में मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन और 2019 में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भड़के आंदोलन शामिल हैं.

अमेरिका के पत्र का ईरान द्वारा जवाब

ईरान ने अमेरिकी प्रशासन द्वारा भेजे गए पत्र का जवाब देते हुए कहा कि वह सीधे वार्ता करने के पक्ष में नहीं है, लेकिन अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए तैयार है. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि वार्ता का कोई भी निर्णय खामेनेई के निर्देशों के अनुसार लिया जाएगा.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाघई ने अपने बयान में कहा, "एक राष्ट्र के खिलाफ 'बमबारी' की धमकी देना न केवल अंतरराष्ट्रीय शांति का उल्लंघन है, बल्कि यह एक खतरनाक संकेत भी देता है. हिंसा से केवल हिंसा ही उपजती है, जबकि शांति वार्ता से ही संभव हो सकती है. अब यह अमेरिका पर निर्भर करता है कि वह कौन सा रास्ता चुनता है."

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की अमेरिका को चेतावनी

ईरान के शक्तिशाली सैन्य बल, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स, ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है. एयरोस्पेस कमांडर अमीराली हाजीजादेह ने कहा, "अमेरिका के मध्य पूर्व में कम से कम 10 सैन्य अड्डे हैं और वहां 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. अगर वे हम पर हमला करते हैं, तो वे खुद को एक शीशे के घर में पाएंगे, जहां से वे सुरक्षित नहीं निकल पाएंगे."

ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते का परिप्रेक्ष्य

डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-21) में अमेरिका ने 2015 के परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था. इस समझौते के तहत, ईरान पर सख्त परमाणु प्रतिबंध लगाए गए थे और बदले में उसे कुछ आर्थिक राहत दी गई थी. लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते से हटते हुए ईरान पर फिर से कठोर प्रतिबंध लगा दिए, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया.

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