पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच हालिया व्यापारिक समझौते ने भारत के लिए एक नई चुनौती पैदा कर दी है. बांग्लादेश में पाकिस्तानी जहाज का मोंगला बंदरगाह पर आगमन भारत के लिए एक रणनीतिक धक्का साबित हो सकता है. बीते साल भारत ने मोंगला बंदरगाह पर संचालन अधिकार प्राप्त किए थे, और अब पाकिस्तान का जहाज इस बंदरगाह पर पहुंचेगा, जिससे भारत के क्षेत्रीय प्रभाव पर असर पड़ सकता है.
पाकिस्तानी जहाज का मोंगला बंदरगाह पर आगमन
पाकिस्तान का मालवाहक जहाज, जो 25,000 टन चावल लेकर कराची के कासिम बंदरगाह से रवाना हुआ था, अब चटगांव बंदरगाह पर लंगर डालने के बाद मोंगला बंदरगाह पर पहुंचने की तैयारी कर रहा है. मोंगला पोर्ट पर पाकिस्तानी जहाज का आगमन एक ऐतिहासिक घटना है, क्योंकि बांग्लादेश की आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब पाकिस्तान का जहाज इस बंदरगाह पर पहुंचेगा. पाकिस्तान का इस बंदरगाह पर अपने जहाज भेजना भारत के लिए एक प्रकार से चुनौती है और यह दर्शाता है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश अब अपने व्यापारिक संबंधों को नए स्तर पर ले जा रहे हैं.
भारत के व्यापारिक प्रभाव पर असर
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल जुलाई में भारत ने मोंगला बंदरगाह पर एक टर्मिनल का संचालन अधिकार प्राप्त किया था, जो उसकी क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा था. भारत ने ईरान के चाबहार और म्यांमार के सित्तवे बंदरगाहों का भी प्रबंधन अपने हाथ में लिया था, ताकि चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके, लेकिन अब पाकिस्तान और बांग्लादेश का बढ़ता सहयोग भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय व्यापार में भारत का दबदबा कमजोर हो सकता है.
भारत के लिए व्यापारिक और रणनीतिक दांव
बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ता हुआ व्यापारिक सहयोग भारत के निवेशों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है. पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था, जिसके तहत बांग्लादेश पाकिस्तान से 50,000 टन बासमती चावल का आयात करेगा. यह समझौता भारत के लिए चिंताजनक है, क्योंकि बांग्लादेश भारतीय चावल का प्रमुख आयातक रहा है. इस समझौते के बाद, बांग्लादेश पाकिस्तान से चावल की पहली खेप प्राप्त कर चुका है, और दूसरी खेप इस महीने के अंत तक पहुंचने की उम्मीद है.
चीन का बढ़ता प्रभाव और भारत की रणनीति
चीन की समुद्री रणनीति को ध्यान में रखते हुए भारत ने मोंगला बंदरगाह पर अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए कदम उठाए थे. भारत का उद्देश्य था कि वह चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती दे और क्षेत्रीय व्यापार में अपने प्रभाव को बढ़ाए, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ते सहयोग से चीन को भी लाभ मिल सकता है, जिससे भारत की रणनीति पर असर पड़ सकता है.
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