सरकंडे की कलम से हूबहू लिख डाली श्रीरामचरितमानस, सीएम योगी से लगाई गुहार- 'हनुमान सा कोई दूत भेजो सरकार'

सरकंडे की कलम से हूबहू लिख डाली श्रीरामचरितमानस, सीएम योगी से लगाई गुहार- 'हनुमान सा कोई दूत भेजो सरकार'

बागपत, न्यूज डेस्क: रामचरितमानस अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsi Das) द्वारा 1631 ईसवीं में रचित प्रसिद्ध धर्म ग्रन्थ है. उन्हें यह ग्रंथ लिखने में 2 वर्ष 7 महीने 26 दिन का समय लगा था. वहीं अब 21वीं सदी में फिर से श्रीरामचरित मानस को उसी अंदाज में सरकंडे की कलम से बागपत के तुलसीदास कह जाने वाले राकेश कुमार शर्मा (Rakesh Kumar Sharma) ने लिख डाली है. बिमार शरीर, दमे जैसे रोग होने के बावजूद भी राकेश ने इसे 2 जनवरी को पूरा किया.

सीएम योगी से लगाई गुहार

अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होनी है. ऐसे में अयोध्या (Ayodhya Ram Mandir)  ही नहीं पूरे देश में इसे लेकर जोर शोर से तैयारियां चल रही है. राकेश कुमार की भी इच्छा थी कि वह अपने द्वारा लिखे घए इस ग्रंथ को पैदल अयोध्या ले जाएं और प्रभु के चरणों में अर्पित करें. लेकिन सेहत ठीक ना होने की वजह से उन्होंने सीएम योगी से गुहार लगाई है. उन्होंने पत्र में लिखा कि रामचरितमानस (Ramcharitmanas) को  अयोध्या  श्री राम तक भिजवाने के लिए हनुमान जैसा कोई दूत भेजे.

6 साल में ग्रंथ लिखना पूरा किया

आपको बता दें कि बागपत के अंगदपुर गांव के रहने वाले किसान राकेश कुमार शर्मा  ने 6 साल पहेल 14 अप्रैल 2018 को रामचरितमानस को लिखना  शुरू किया था. गिरते स्वास्थ के बावजूद वह निरंतर महा ग्रंथ को लिखते गए और 2 जनवरी 2024 को ये ग्रन्थ सम्पूर्ण हुआ. लेकिन राकेश कुमार शर्मा इस कदर बीमार हो गए कि उन्होंने चारपाई पकड़ ली है. इसलिए उन्होंने सीएम योगी से गुहार लगाई की उनके द्वारा लिखित ग्रंथ को प्रभु राम तक पहुंचाया जाए.

रिपोर्ट: मेहंदी हसन