'यूक्रेन ने भारतीय डेलिगेशन को बचाया', जेलेंस्की का दावा- जयशंकर की कीव यात्रा के दौरान रूस ने किया हमला

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कीव यात्रा के दौरान रूस ने शहर पर ड्रोन हमला किया.

Zelenskyy claims Russia launched an attack during Jaishankars visit to Kyiv
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कीव: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कीव यात्रा के दौरान रूस ने शहर पर ड्रोन हमला किया. उन्होंने कहा कि यूक्रेनी वायुसेना के लड़ाकू विमानों की कार्रवाई के कारण भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा. जेलेंस्की के मुताबिक, रूस ने हमले में ईरान की मदद से तैयार किए गए शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल किया.

एस. जयशंकर इस समय यूक्रेन और पोलैंड की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं. कीव में उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की. जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए भारत की ओर से बातचीत और मध्यस्थता में मदद की पेशकश की है. जेलेंस्की समेत कई यूक्रेनी नेताओं ने भारत की इस भूमिका का स्वागत किया है.

जेलेंस्की ने क्या कहा?

जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि जब एस. जयशंकर कीव में मौजूद थे, उसी दौरान रूस ने जेट इंजन वाले शाहेद ड्रोन से एक बार फिर हमला किया. उन्होंने दावा किया कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने ज्यादातर ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिससे भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा.

जेलेंस्की ने यह भी कहा कि दुनिया की दूसरी बड़ी ताकतों को भी साफ तौर पर यह कहना चाहिए कि युद्ध खत्म होना चाहिए और ऐसी शांति कायम होनी चाहिए, जिस पर भरोसा किया जा सके.

कितने ताकतवर हैं शाहेद ड्रोन?

शाहेद ड्रोन मूल रूप से ईरान में बनाए गए हैं और रूस इनका इस्तेमाल यूक्रेन पर हमलों में कर रहा है. इन्हें ईरान की शाहेद एविएशन इंडस्ट्रीज ने विकसित किया है.

शाहेद-136 जैसे ड्रोन करीब 1,000 से 2,500 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं. इनमें विस्फोटक लगाया जा सकता है और ये सीधे अपने लक्ष्य से टकराकर हमला करते हैं.

जेट इंजन वाले नए शाहेद ड्रोन, जिन्हें रूस में गेरान-3 और गेरान-4 के नाम से भी जाना जाता है, पुराने मॉडलों की तुलना में ज्यादा तेज बताए जाते हैं. इनकी रफ्तार करीब 200 मील प्रति घंटे या उससे अधिक हो सकती है. ज्यादा ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता के कारण इन्हें रोकना यूक्रेन की वायु रक्षा के लिए चुनौती माना जाता है.

जयशंकर यूक्रेन क्यों गए हैं?

एस. जयशंकर की यूक्रेन यात्रा को रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत की कूटनीतिक कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि भारत दोनों देशों के बीच बातचीत और शांति का रास्ता निकालने में मदद करना चाहता है.

जयशंकर की यह यात्रा एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के बाद हो रही है. बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाया था और शांति की जरूरत पर जोर दिया था.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत युद्ध खत्म कराने और शांति स्थापित करने के लिए हर संभव मदद देने को तैयार है. इसी कड़ी में जयशंकर की कीव यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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