Yuvraj Singh Retirement: भारतीय क्रिकेट में युवराज सिंह का नाम सिर्फ एक खिलाड़ी के तौर पर नहीं, बल्कि जज्बे, जूझने की ताकत और बड़े मैचों के हीरो के रूप में याद किया जाता है. 2011 वनडे वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को चैंपियन बनाने वाले इस स्टार ऑलराउंडर ने साल 2019 में अचानक इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. उस वक्त फैंस को यह फैसला हैरान करने वाला लगा, लेकिन अब युवराज सिंह ने अपने संन्यास के पीछे की असली वजह का खुलासा किया है, जो काफी भावुक कर देने वाला है.
युवराज सिंह ने हाल ही में पूर्व टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के साथ एक पॉडकास्ट में अपने दिल की बात रखी. उन्होंने साफ कहा कि उनका रिटायरमेंट किसी एक दिन लिया गया फैसला नहीं था. दरअसल उस दौर में उन्हें क्रिकेट खेलते हुए खुशी महसूस ही नहीं हो रही थी. युवराज के मुताबिक, जब खेल से आनंद खत्म हो जाए, तो मैदान पर बने रहना बेहद मुश्किल हो जाता है.
‘जब मजा ही नहीं आ रहा था, तो क्यों खेलूं?’
युवराज ने बातचीत के दौरान कहा,“मुझे अपने खेल में मजा नहीं आ रहा था. मेरे दिमाग में बार-बार यही सवाल घूमता था कि अगर क्रिकेट खेलने से खुशी नहीं मिल रही, तो मैं इसे क्यों जारी रखूं? मुझे ऐसा लगता था कि न मुझे टीम का भरोसा मिल रहा है और न ही वह सम्मान, जिसकी एक सीनियर खिलाड़ी को जरूरत होती है.” उनका मानना था कि जब समर्थन और इज्जत दोनों ही महसूस न हों, तो खिलाड़ी के लिए आगे बढ़ना और भी कठिन हो जाता है.
Yuvraj Singh on Shubman Gill and Abhishek Sharma:
— GillTheWill (@GillTheWill77) January 29, 2026
"Shubman was already playing for India. He is much smarter, more hardworking, greater work ethics.
Abhishek is someone we have to take him there. We made a 4year plan for him, if he followed certain things for four years, his… pic.twitter.com/KhhJbRH56T
सम्मान की कमी ने तोड़ दिया हौसला
पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ने यह भी स्वीकार किया कि उस समय वह मानसिक और शारीरिक रूप से अपनी आखिरी सीमा पर पहुंच चुके थे. उन्होंने कहा कि वह खुद से सवाल करने लगे थे कि आखिर वह किसे और क्या साबित करना चाहते हैं.युवराज बोले “मैं अंदर से टूट चुका था. मैं मानसिक और शारीरिक रूप से इससे ज्यादा नहीं दे सकता था. यह एहसास मुझे भीतर ही भीतर खाए जा रहा था. जिस दिन मैंने क्रिकेट छोड़ा, उसी दिन मुझे लगा कि मैं फिर से खुद को पहचान पा रहा हूं.”
बचपन की यादें और पिता से जुड़ा दर्द
पॉडकास्ट के दौरान युवराज सिंह ने अपने बचपन से जुड़ा एक किस्सा भी साझा किया. उन्होंने बताया कि उस समय वह बहुत छोटे थे और खेल को ठीक से समझ भी नहीं पाए थे. हालांकि उस घटना को उन्होंने दिल पर नहीं लिया, लेकिन उनके पिता के लिए वह पल काफी तकलीफदेह रहा. युवराज ने कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर कई बातें अलग नजर आती हैं, जिन्हें वह अब ज्यादा भावुकता से नहीं लेते.
2019 वर्ल्ड कप बना करियर का टर्निंग पॉइंट
युवराज सिंह के करियर में 2019 वनडे वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया में जगह न मिलना एक बड़ा मोड़ साबित हुआ. इसके बाद उन्होंने महसूस किया कि अब वह उसी जुनून और आत्मसम्मान के साथ क्रिकेट नहीं खेल पा रहे हैं. युवराज के लिए बिना सम्मान के मैदान पर टिके रहना संभव नहीं था, और यहीं से उनके संन्यास का फैसला पूरी तरह पक्का हो गया. युवराज सिंह का यह खुलासा साफ बताता है कि बड़े खिलाड़ी भी सिर्फ आंकड़ों और रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि भावनाओं, सम्मान और मानसिक संतुलन से खेलते हैं. उनका यह सच आज भी करोड़ों फैंस को सोचने पर मजबूर कर देता है.
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