कट्टरपंथियों के कब्जे में यूनुस! बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बड़ी साजिश एक्सपोज़, ISI ने बनाया खतरनाक प्लान

Bangladesh Hindu: बांग्लादेश में हालात तेजी से बदल रहे हैं. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार के आने के बाद से देश के सेक्युलर ढांचे पर सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है. यह खतरा सिर्फ घरेलू कट्टरपंथ से नहीं, बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी है, जिसे खुली छूट मिल चुकी है.

Yunus in the custody of fundamentalists Big conspiracy against Hindus in Bangladesh exposed
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Bangladesh Hindu: बांग्लादेश में हालात तेजी से बदल रहे हैं. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार के आने के बाद से देश के सेक्युलर ढांचे पर सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है. यह खतरा सिर्फ घरेलू कट्टरपंथ से नहीं, बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी है, जिसे खुली छूट मिल चुकी है. हालात ऐसे हैं कि आईएसआई अब हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने के लिए लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों का इस्तेमाल कर रही है.

जाने-माने पत्रकार सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने चौंकाने वाला दावा किया है, बांग्लादेश अब आईएसआई के प्रयोगों का "लॉन्चपैड" बन चुका है.

हिंदू आबादी पर सीधा खतरा

चौधरी का कहना है कि बांग्लादेश की संप्रभुता और सांप्रदायिक सद्भाव आज सबसे गंभीर संकट से गुजर रहे हैं. हिंदू समुदाय को संगठित तरीके से डराया-धमकाया जा रहा है और उनके प्राचीन मंदिरों को टारगेट बनाया जा रहा है. आईएसआई की साजिश साफ है, एक तरफ हिंदू आबादी को हाशिये पर धकेलना और दूसरी तरफ भारत विरोधी आतंकी नेटवर्क को मजबूत करना.

यूनुस सरकार के आते ही बदले हालात

16 अगस्त को सोशल मीडिया पर खुलेआम सीताकुंड पर्वत पर मस्जिद बनाने की बात कही गई. इसमें लश्कर-ए-तैयबा और हरकत-उल-जिहाद से जुड़े हारुन इजहार जैसे आतंकी मदद कर रहे हैं, जिनका परिवार पहले भी चरमपंथी गतिविधियों में शामिल रहा है.

इजहार ने हाल के महीनों में शरिया कानून लागू करने का अभियान तेज कर दिया है. इसमें उसे जमात-ए-इस्लामी (JeI), इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश (IAB), और हिफाजत-ए-इस्लाम (HeI) जैसे कट्टर संगठनों का समर्थन मिल रहा है.

सीताकुंड चंद्रनाथ धाम पर निगाह

कट्टरपंथियों का सबसे बड़ा निशाना है 11वीं सदी का चंद्रनाथ धाम हिंदू और बौद्धों का प्रमुख तीर्थस्थल. यहां पहले भी बार-बार मस्जिद बनाने की धमकियां दी गईं और श्रद्धालुओं पर हमले की कोशिशें हुईं. यह सिर्फ धार्मिक स्थल पर हमला नहीं, बल्कि हिंदू परंपराओं का अपमान है.

कई प्राचीन मंदिरों पर मंडरा रहा खतरा

आईएसआई की साजिश सीताकुंड तक सीमित नहीं है. उसके निशाने पर चटगांव का मेधास मुनि आश्रम, बंदरबन का स्वर्ण मंदिर और कॉक्स बाजार का आदिनाथ मंदिर है. ये सभी स्थल न सिर्फ धार्मिक आस्था, बल्कि दक्षिण एशिया की आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक हैं.

भारत की भी बढ़ी चिंता

आईएसआई सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं है. वह रोहिंग्या और बिहार मूल के लोगों की भर्ती कर उन्हें नेपाल और पाकिस्तान में प्रशिक्षण दे रही है. साथ ही, यूनुस सरकार के संरक्षण में हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी भी तेज हो गई है. इसका सीधा असर भारत पर पड़ सकता है, युवाओं में नशे का जाल फैलने और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साख पर धब्बा लगने की आशंका है.

पाकिस्तान की बड़ी साजिश

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सब पाकिस्तान की उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह भारत की पूर्वी सीमा को अस्थिर करना चाहता है. बांग्लादेश को चरमपंथियों और आतंकियों के ठिकाने में बदलना पाकिस्तान का लॉन्ग-टर्म गेम प्लान है.

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