Bangladesh Army: 2024 के अंतिम महीनों में बांग्लादेश की राजनीति में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला. प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन के खिलाफ देशभर में विरोध-प्रदर्शन हुए, जिनमें छात्रों और नागरिक समूहों ने बड़ी भूमिका निभाई. इन प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप हसीना ने पद से इस्तीफा दे दिया और देश में एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया.
राजनीतिक स्थिरता बहाल करने और स्वतंत्र चुनावों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नोबल पुरस्कार विजेता और ‘ग्रामीन बैंक’ के संस्थापक मुहम्मद यूनुस को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया. यह नियुक्ति सैन्य नेतृत्व और छात्र आंदोलनकारी समूहों की सहमति से हुई. यूनुस को एक निष्पक्ष और विश्वसनीय व्यक्तित्व माना गया, जो बांग्लादेश को एक नई दिशा में ले जा सकते हैं.
सैन्य खुफिया एजेंसी डीजीएफआई पर कार्रवाई
अंतरिम सरकार के गठन के बाद देश की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य खुफिया एजेंसी, डीजीएफआई (Directorate General of Forces Intelligence), पर भी ध्यान केंद्रित हुआ. इस एजेंसी के कई वरिष्ठ अधिकारियों को "बलपूर्वक सेवानिवृत्ति" (forced retirement) दी गई. यह कदम तब उठाया गया जब कई वर्षों से डीजीएफआई पर पूर्ववर्ती सरकार के साथ मिलकर काम करने और विरोधियों के दमन में भूमिका निभाने के आरोप लगते रहे थे.
डीजीएफआई ने अतीत में भारत की उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर अलगाववादी तत्वों के खिलाफ भारतीय एजेंसियों के साथ मिलकर अभियान चलाए थे. लेकिन इसके साथ-साथ उस पर यह भी आरोप लगे कि उसने घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप किया, और कुछ मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं में शामिल रहा.
डीजीएफआई को बदलने की संभावित योजना
अंतरिम सरकार द्वारा डीजीएफआई के वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने के बाद, अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार इस एजेंसी का पुनर्गठन करने या इसे पूरी तरह समाप्त कर, एक नई खुफिया या सैन्य इकाई बनाने की योजना बना रही है. कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि एक नई एजेंसी, जिसे "इस्लामिक रिवोल्यूशनरी आर्मी (IRA)" कहा जा सकता है, की अवधारणा पर काम हो रहा है. हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और न ही कोई विश्वसनीय सार्वजनिक दस्तावेज उपलब्ध है.
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की भूमिका पर आरोप
कुछ विश्लेषणों में यह भी आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और ईरान की आईआरजीसी (Islamic Revolutionary Guard Corps) जैसे संगठनों की बांग्लादेश में एक वैकल्पिक सैन्य संरचना स्थापित करने में दिलचस्पी है. इस संरचना का उद्देश्य, कथित रूप से, बांग्लादेश की खुफिया व्यवस्था को भारत-विरोधी अभियानों के लिए प्रयोग करना है. हालांकि, इस तरह के दावों की पुष्टि स्वतंत्र और विश्वसनीय स्रोतों द्वारा नहीं की गई है.
अवामी लीग पर कार्रवाई और चुनावी निषेध
अंतरिम सरकार ने सत्ता में आने के बाद, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को आगामी चुनावों में भाग लेने से रोक दिया और कई नेताओं पर भ्रष्टाचार व दमन से संबंधित आरोप पत्र दायर किए. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भी डीजीएफआई को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि यह एजेंसी हसीना सरकार के दौरान एक महत्वपूर्ण भूमिका में रही थी.
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