5 लाख का कैशलेस बीमा, 400 विधि अधिकारियों को टैबलेट... CM योगी की वकीलों को बड़ी सौगात

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार (14 सितंबर) शाम प्रयागराज पहुंचे, जहां उन्होंने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में हिस्सा लिया. कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने अधिवक्ताओं के लिए कई अहम घोषणाएं कीं.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार (14 सितंबर) शाम प्रयागराज पहुंचे, जहां उन्होंने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में हिस्सा लिया. कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने अधिवक्ताओं के लिए कई अहम घोषणाएं कीं. उन्होंने 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट की सुविधा देने के साथ सक्रिय प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को 5 लाख रुपये का कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस देने का ऐलान किया. इसके अलावा मल्टी लेवल पार्किंग और चैंबर में फर्नीचर व उपकरणों के लिए भी सरकार की ओर से सहयोग की बात कही.

अधिवक्ताओं के लिए बढ़ाई गई सुविधाएं

सीएम योगी ने कहा कि जो भी प्रस्ताव आएगा सरकार उसमें सहयोग करेगी. राज्य विधि अधिकारियों को तकनीक की आवश्यकता है. वहीं उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि केवल मुकदमे के परिणाम तक अपने आप को सीमित न रखें. उन्होंने बताया कि अधिवक्ता कल्याण निधि कोष में डेढ़ लाख की राशि को बढ़ाकर 5 लाख किया गया है. 

अधिवक्ताओं की मृत्यु पर मिलने वाली धनराशि जो 60 वर्ष तक मिलती थी अब उसे बढ़ाकर 70 वर्ष किया गया है. एक दर्जन जनपदों में अधिवक्ताओं के लिए चैंबर का निर्माण हो रहा है. साथ ही जिला कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य के विधि अधिकारियों के फीस में 50 फ़ीसदी की वृद्धि की गई है.

न्याय व्यवस्था में विश्वास जरूरी

उन्होंने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में तीन नए कानून लागू हुए हैं. न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी पावर एक आम आदमी का विश्वास है. हमारा मानना है कि अगर आम आदमी का विश्वास है न्यायपालिका, कार्यपालिका या विधायिका हो तीनों लोकतंत्र की कसौटी पर खरे उतरते हैं, लेकिन उसके लिए यह जरूरी है कि समय पर लोगों को न्याय मिले. 

सीएम ने यह भी कहा कि लोगों को यह विश्वास होना चाहिए कि उसे सुना गया है और उसे न्याय मिलेगा. लोगों के मन में निष्पक्ष और पारदर्शी न्याय के प्रति विश्वास होना जरूरी है.

नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी

सीएम ने कहा कानून के सामने की चुनौतियां आई हैं उसके लिए हमें खुद को अपडेट करना होगा. साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं की है. उन्होंने कहा कि युवाओं के चेहरे पर चमक हो तो मान लीजिए कि देश अच्छी दिशा में आगे बढ़ रहा है. 

अधिवक्ता संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी और जिम्मेदार नागरिक भी बनें. वहीं सीएम ने आखिर में चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और अन्य न्यामूर्तिगणों का आभार जताया और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का भी आभार व्यक्त किया है.

सीएम ने सभी का अभिनंदन किया

सीएम योगी आदित्यनाथ ने चीफ जस्टिस अरुण भंसाली, वरिष्ठ न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, सभी न्यायमूर्तिगण, महाधिवक्ता अजय मिश्रा, सभी अपर महाधिवक्ता गण, बार एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश पांडे बबुआ, महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा, बार एसोसिएशन पदाधिकारी गण और समारोह में उपस्थित अधिवक्ता गण और मौजूद बहनों और भाइयों का अभिनंदन किया. इस दौरान उन्होंने प्रयागराज की धरा को नमन भी किया. साथ ही हिंदी दिवस, हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं दीं.

हिंदी दिवस और त्योहारों की शुभकामनाएं

सीएम योगी ने कहा कि गणेश चतुर्थी का हमारे आध्यात्मिक विकास में प्रथम देव के रूप में उपासना की जाती है और हरितालिका तीज अखंड सौभाग्य प्रदान करने का महत्व आयोजन भारत की परंपरा में है. 

सीएम योगी ने कहा कि हिंदी राजभाषा के रूप में स्थान प्राप्त कर सके, इस संकल्प के साथ हर भारतीय जुड़ने के लिए तत्पर दिखाई देता है. आज जब आपके बीच में मुझे आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है बधाई और शुभकामनाएं देता हूं. अधिवक्ता समाज की देश के प्रबुद्ध समाज में गिनती होती है. यह ओपिनियन बनाता है.

स्वतंत्रता आंदोलन में अधिवक्ताओं की भूमिका

सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि देश की आजादी के समय, और उसके बाद स्वतंत्र भारत में अधिवक्ताओं के महत्व भूमिका रही है. लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूत करने और राष्ट्र के निर्माण में अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका से अपनी प्रेक्टिस छोड़कर स्वाधीनता आंदोलन को दिशा दी. 

पंडित मोतीलाल नेहरू,पंडित मदन मोहन मालवीय ने लंबे समय तक आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ने का काम किया. ऐसे में अधिवक्ता हर क्रांतिकारी के लिए खड़े होते हुए दिखाई दिए. लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर यह हुए नाम है जिन्होंने देश की आजादी के दौरान आंदोलन को आगे बढ़ाने में योगदान दिया.

प्रयागराज की विरासत का किया जिक्र

प्रयागराज को लेकर सीएम योगी ने कहा कि जब हम प्रयागराज जाते हैं तो वहां पर हमें प्रेसीडेंशियल सूट देखने को मिलता है. देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद का हर कुंभ और माघ मेले में प्रवास होता था. यह व्यक्तिगत साधना का प्रयास भर नहीं था, बल्कि उन्होंने राष्ट्र सेवा का जो संकल्प लिया था. 

यह विरासत और भारत की जनता के प्रति उनके गहरे सम्मान का उदाहरण है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रयागराज की इस धरती में भारत की संवैधानिक चेतना और विधिक विमर्श को सदैव महत्त्वपूर्ण दिशा दी है. यह वह भूमि है जहां से अनेक न्यायविद अधिवक्ता और जननेता निकले. जिन्होंने न्याय की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं.

न्यायिक व्यवस्था में इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

आगे खुशी जताते हुए सीएम योगी ने कहा कि मुझे खुशी है कि जब यह कार्यक्रम बार एसोसिएशनन ने यहां पर आयोजित किया तो एक संरक्षक के रूप में अधिवक्ताओं की समस्याएं क्या हैं. जब चीफ जस्टिस और सरकार के बीच बैठक होती है तो चीफ जस्टिस द्वारा अधिवक्ताओं की समस्याओं पर भी चर्चा की जाती है. 

उन्होंने कहा कि न्याय प्रशासन के लिए जो आपकी सम्मान है शिष्टाचार है संवाद है जो सहयोग और समन्वय है, यह निरंतर बने रहना चाहिए. 2017 के पहले हमारे पास चुनौती केवल संसाधनों की नहीं थी, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की भी चुनौती थी. न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती हमारे सामने थी.

पुलिस और अदालतों की सुविधाओं का किया जिक्र

अपने भाषण के दौरान उन्होंन कहा कि न्याय व्यवस्था की एक अहम कड़ी पुलिस होती है. 2017 के पहले पुलिस बल में लगभग 45 फीसदी जगह खाली थी. हमारी सरकार ने जब भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, उस समय हमारे पास 1 वर्ष में 3000 पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग देने की क्षमता थी, लेकिन आज पुलिस कर्मियों की ट्रेनिंग क्षमता को 3000 से बढ़ाकर 60000 कर दिया है. 

सीएम ने बताया कि यूपी के 56 जिलों में पुलिस की अच्छी बिल्डिंग और बैरक बन गई है. हर जिले और हर थाने में पुलिसकर्मियों को सुविधा उपलब्ध कराई गई है. न्यायपालिका के पास भी अच्छी सुविधा होनी चाहिए.

अदालतों के डिजिटाइजेशन पर भी जोर

सीएम ने बताया कि अधीनस्थ न्यायालयों की भी स्थिति और भी खराब थी. 10 जिलों में किराए के भवनों में अधीनस्थ न्यायालय चल रहे थे, लेकिन आज यूपी को बदलने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं. उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस प्रॉसीक्यूशन के कोऑर्डिनेशन से कनविक्शन रेट को बढ़ाया है. चार्जशीट समय पर दाखिल करने, वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत में मजबूती से रखने की व्यवस्था की गई है. साथ ही अदालतों और जेलों को हाई स्पीड इंटरनेट से जोड़ा गया है व अदालती दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया भी तेज हुई है. 

सीएम ने आगे कहा कि प्रदेश सरकार न्याय व्यवस्था की आधारभूत संरचना के विकास के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रही है. जिन दस जिलों में किराए के भवन में अदालतें चल रही थी, वहां पर इंटीग्रेटेड कोर्ट बिल्डिंग बनाई जा रही है. इसके अलावा फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जा रहा है. वहीं 700 करोड़ की लागत से नई बिल्डिंग का निर्माण हुआ है.

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