अमेरिका का LUCAS ड्रोन क्यों है इतना खतरनाक, जिसने ईरान में मचाई भयंकर तबाही? जानें कैसे करता है काम

LUCAS Drone: अमेरिका ने ईरान पर हालिया सैन्य कार्रवाई में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया है, जो अब तक किसी बड़े ऑपरेशन में देखने को नहीं मिली थी. शनिवार को किए गए इस हमले में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया, जिसमें पारंपरिक महंगे हथियारों के साथ-साथ कम लागत वाले अत्याधुनिक ड्रोन का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया.

World America LUCAS drone so dangerous which caused terrible destruction in Iran
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LUCAS Drone: अमेरिका ने ईरान पर हालिया सैन्य कार्रवाई में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया है, जो अब तक किसी बड़े ऑपरेशन में देखने को नहीं मिली थी. शनिवार को किए गए इस हमले में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया, जिसमें पारंपरिक महंगे हथियारों के साथ-साथ कम लागत वाले अत्याधुनिक ड्रोन का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया. इस ऑपरेशन को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया गया. इस सैन्य कार्रवाई की सबसे खास बात रही अमेरिका का नया ड्रोन सिस्टम LUCAS (लो-कॉस्ट अनमैन्ड कॉम्बैट अटैक सिस्टम). 

यह एक वन-वे अटैक ड्रोन है, जिसे मिशन के बाद वापस नहीं लाया जाता, यानी यह एक तरह का “सुसाइड ड्रोन” होता है. कम लागत होने के कारण इसे बड़ी संख्या में दुश्मन के ठिकानों पर एक साथ तैनात किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि यह ड्रोन ईरान के प्रसिद्ध शाहेद-136 ड्रोन की रणनीति से प्रेरित होकर तैयार किया गया है. इस तरह अमेरिका ने ईरान की ही ड्रोन रणनीति को उसके खिलाफ इस्तेमाल किया है.

सस्ते और महंगे हथियारों का कॉम्बिनेशन

इस ऑपरेशन में सिर्फ ड्रोन ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक फाइटर जेट और लंबी दूरी की मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया गया. हमले में F-35 Lightning II और F/A-18 Super Hornet जैसे फाइटर एयरक्राफ्ट शामिल थे. 

इसके साथ ही Tomahawk Cruise Missile जैसी शक्तिशाली मिसाइलों का भी उपयोग किया गया. इस तरह सस्ते ड्रोन और महंगे हथियारों का मिश्रण बनाकर अमेरिका ने एक नई सैन्य रणनीति पेश की, जिससे हमले की क्षमता और प्रभाव दोनों में तेजी से बढ़ोतरी हुई.

‘स्वार्म अटैक’ से बढ़ी मारक क्षमता

LUCAS ड्रोन की खासियत यह है कि इन्हें बड़ी संख्या में एक साथ दुश्मन के ठिकानों पर भेजा जा सकता है. इस तरह के हमले को “स्वार्म अटैक” कहा जाता है, जिसमें दर्जनों या सैकड़ों ड्रोन एक साथ हमला करते हैं, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है और उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है. कम कीमत होने के कारण इन ड्रोन को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना रणनीतिक रूप से भी फायदेमंद माना जा रहा है.

CENTCOM ने जारी की तस्वीरें

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस ऑपरेशन से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी जारी की हैं, जिनमें टॉमहॉक मिसाइलों और फाइटर जेट्स की तैनाती देखी जा सकती है. इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका ने इस बार अपने हमले के तरीके में बड़ा बदलाव किया है और पारंपरिक युद्ध के साथ आधुनिक ड्रोन वॉरफेयर को जोड़ दिया है.

खामेनेई की मौत के बाद बढ़ा तनाव

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई, साथ ही कई उच्च पदस्थ अधिकारी भी मारे गए. इस घटना के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है.

ईरान का जवाबी हमला

हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. इससे यह संघर्ष अब और व्यापक होता नजर आ रहा है.

बदलती युद्ध रणनीति का संकेत

यह पूरा ऑपरेशन इस बात का संकेत देता है कि भविष्य के युद्धों में सिर्फ महंगे हथियार ही नहीं, बल्कि कम लागत वाले स्मार्ट ड्रोन भी अहम भूमिका निभाएंगे. LUCAS जैसे सिस्टम यह दिखाते हैं कि तकनीक और रणनीति के मेल से युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है.

मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव अभी और बढ़ सकता है, और आने वाले समय में इस तरह की नई सैन्य तकनीकों का इस्तेमाल और अधिक देखने को मिल सकता है.

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