Middle East Crisis Impact: मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे तौर पर भारत के एविएशन सेक्टर और यात्रियों की योजनाओं पर दिखने लगा है. हालात इतने संवेदनशील हो गए हैं कि एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण देशभर में सैकड़ों उड़ानों को रद्द करना पड़ा है. इससे न केवल यात्रियों की यात्रा प्रभावित हुई है, बल्कि एयरलाइंस और एयरपोर्ट संचालन पर भी दबाव बढ़ गया है.
1 मार्च को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 350 से अधिक भारतीय उड़ानें रद्द की गईं. शुरुआत में आशंका जताई जा रही थी कि यह संख्या 444 तक पहुंच सकती है, लेकिन स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित रहने से यह आंकड़ा 350 के आसपास ही सीमित रहा. हालांकि, यह राहत अस्थायी मानी जा रही है क्योंकि मिडिल ईस्ट के हवाई क्षेत्र में लगातार बदलती स्थिति के कारण आगे भी ऐसे व्यवधान जारी रह सकते हैं.
दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावित
इस संकट का सबसे ज्यादा असर देश के दो सबसे व्यस्त एयरपोर्ट, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर देखा गया. दिल्ली एयरपोर्ट से करीब 100 उड़ानें रद्द हुईं, जबकि मुंबई एयरपोर्ट पर 125 उड़ानों का संचालन ठप रहा.
स्थिति को देखते हुए देशभर के प्रमुख एयरपोर्ट्स को “ऑपरेशनल अलर्ट” पर रखा गया है. यात्रियों की सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी अचानक बदलाव या डायवर्जन से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके.
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा असर
यह संकट केवल घरेलू उड़ानों तक सीमित नहीं रहा. एयर इंडिया ने रविवार के लिए 22 अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द कर दिया, जिससे कुल रद्द विदेशी उड़ानों की संख्या बढ़कर 50 तक पहुंच गई. एयरलाइन ने मिडिल ईस्ट एयरस्पेस से गुजरने वाली कई उड़ानों का निलंबन 2 मार्च तक बढ़ा दिया है.
वहीं स्पाइसजेट ने भी भारत और यूएई के बीच अपनी 33 उड़ानों को रद्द कर दिया. इसके अलावा लुफ्थांसा और एमिरेट्स जैसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के संचालन पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है.
यात्रियों के लिए राहत, रिफंड और रीशेड्यूल विकल्प
इस अप्रत्याशित स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी यात्रियों को झेलनी पड़ रही है, खासकर उन लोगों को जिनकी यात्रा पहले से तय थी. हालांकि, एयरलाइंस ने यात्रियों को राहत देने के लिए विशेष कदम उठाए हैं.
इंडिगो और एयर इंडिया ने बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के टिकट रीशेड्यूल करने या पूरा रिफंड देने की सुविधा दी है. इंडिगो के अनुसार, 28 फरवरी या उससे पहले बुक किए गए टिकटों पर 7 मार्च तक की यात्रा के लिए यह छूट लागू रहेगी. वहीं एयर इंडिया ने 28 फरवरी तक की गई बुकिंग (5 मार्च तक की यात्रा) पर समान सुविधा प्रदान की है.
आगे क्या हो सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका असर और व्यापक हो सकता है. एयरस्पेस बंद रहने या सीमित उपयोग के कारण उड़ानों की संख्या में और कटौती हो सकती है, जिससे किराए बढ़ने और यात्रियों की परेशानी बढ़ने की संभावना है.
कुल मिलाकर, यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक एयर ट्रैफिक और यात्रा उद्योग को प्रभावित कर रहा है, और आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
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