क्या चुनाव बाद बढ़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें? पेट्रोलियम मंत्रालय ने दे दिया जवाब, जानें क्या कहा

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चल रही अटकलों के बीच सरकार ने बड़ा बयान दिया है.

Will petrol and diesel prices increase after elections Ministry of Petroleum
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चल रही अटकलों के बीच सरकार ने बड़ा बयान दिया है. हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चुनाव के बाद ईंधन की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है. अब सरकार ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक बताया है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. मंत्रालय ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि इस तरह की खबरें नागरिकों में भ्रम और डर पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं.

सरकार का कहना है कि पिछले चार वर्षों में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की गई है. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने आम लोगों को राहत देने के लिए लगातार कदम उठाए हैं.

रिपोर्ट में क्यों उठी कीमत बढ़ने की बात?

एक रिपोर्ट, जिसे कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज से जोड़ा जा रहा है, उसमें दावा किया गया था कि मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25-28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी जरूरी हो सकती है.

रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे तेल कंपनियों और सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है. इसमें यह भी कहा गया कि सरकारी तेल कंपनियां हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठा रही हैं, जो लंबे समय तक जारी रहना मुश्किल है.

हालांकि, सरकार ने इन सभी दावों को सिरे से नकार दिया है.

कच्चे तेल के दाम पर वैश्विक असर

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे वैश्विक कारण भी अहम हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं सप्लाई को प्रभावित कर रही हैं.

इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.

हालांकि कच्चे तेल के आयात में करीब 13-15% की कमी आई है, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण कुल आयात बिल में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत का दैनिक आयात खर्च 190 से 210 मिलियन डॉलर तक बढ़ गया है.

क्या आगे बढ़ सकती हैं कीमतें?

विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो इसे एक साथ लागू करने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है, ताकि महंगाई पर अचानक दबाव न पड़े.

अगर 25-28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होती है, तो देश के बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमत 120 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच सकती है. इसका असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा.

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