इस देश में पड़ रही झुलसाने वाली गर्मी, पैसे की कमी नहीं, फिर भी लोग नहीं कर रहे AC का इस्तेमाल, जानें वजह

यूरोप के कई देशों की तरह फ्रांस भी इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि मौसम विभाग ने कई इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया है. बढ़ते तापमान ने न सिर्फ आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि सरकार को भी असाधारण कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है.

why-french-people-avoid-air-conditioners-despite-extreme-heat
AI Generated

यूरोप के कई देशों की तरह फ्रांस भी इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि मौसम विभाग ने कई इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया है. बढ़ते तापमान ने न सिर्फ आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि सरकार को भी असाधारण कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है. सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने और खुले मैदानों में खेल आयोजनों पर अस्थायी रोक लगा दी गई है. वहीं जंगलों में आग लगने के खतरे को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है. इसके बावजूद एक बात दुनिया को हैरान करती है कि इतनी गर्मी के बाद भी फ्रांस में एसी का इस्तेमाल आज भी उतना आम नहीं है, जितना अन्य विकसित देशों में देखने को मिलता है.

गर्मी से निपटने के लिए सरकार ने किए विशेष इंतजाम

तेज गर्मी और हीटवेव के खतरे को देखते हुए फ्रांसीसी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है. राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए मिस्टिंग स्टेशन लगाए गए हैं, जहां पानी की फुहारों के जरिए तापमान का असर कम करने की कोशिश की जा रही है. अस्पतालों और मेडिकल टीमों को भी अतिरिक्त तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं क्योंकि हीट स्ट्रोक के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. नागरिकों को भी दोपहर के समय घरों से बाहर निकलने से बचने और बुजुर्गों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी गई है.

2003 की त्रासदी आज भी नहीं भूला फ्रांस

फ्रांस के लिए हीटवेव कोई नई चुनौती नहीं है. साल 2003 में देश ने ऐसी भीषण गर्मी का सामना किया था जिसने हजारों परिवारों को प्रभावित किया था. उस दौरान करीब 15 हजार बुजुर्गों की मौत हो गई थी. यही कारण है कि हर बार तापमान बढ़ने पर सरकार अतिरिक्त सतर्कता बरतती है. वर्तमान हीटवेव ने एक बार फिर लोगों को उस दर्दनाक दौर की याद दिला दी है और प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहता है.

आखिर फ्रांस में एसी का इस्तेमाल इतना कम क्यों है?

दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल फ्रांस के लोगों के लिए एयर कंडीशनर खरीदना कोई बड़ी बात नहीं है. इसके बावजूद यहां एसी का उपयोग लंबे समय तक बेहद सीमित रहा. इसकी सबसे बड़ी वजह देश की जलवायु है. पारंपरिक रूप से फ्रांस का मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहा है और यहां की गर्मियां बहुत लंबी या अत्यधिक गर्म नहीं होती थीं. इसलिए घरों और इमारतों का निर्माण सर्दी से बचाव को ध्यान में रखकर किया गया था, न कि तेज गर्मी से निपटने के लिए.

ऐतिहासिक इमारतें भी हैं बड़ी वजह

पेरिस और फ्रांस के अन्य शहरों में बड़ी संख्या में सैकड़ों साल पुरानी ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं. इन भवनों में आधुनिक एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाना तकनीकी रूप से जटिल और काफी महंगा होता है. कई मामलों में ऐतिहासिक धरोहरों की संरचना में बदलाव की अनुमति भी नहीं मिलती. यही वजह है कि लोग एसी लगाने के बजाय पारंपरिक तरीकों से घरों को ठंडा रखने की कोशिश करते हैं.

ऊर्जा बचत और पर्यावरण को देते हैं प्राथमिकता

फ्रांसीसी समाज में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर गहरी जागरूकता है. एसी को अधिक बिजली खपत करने वाला उपकरण माना जाता है, इसलिए लोग इसके उपयोग को सीमित रखने की कोशिश करते हैं. इसके अलावा कई लोग यह भी मानते हैं कि लगातार एसी में रहने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. यही कारण है कि प्राकृतिक वेंटिलेशन, मोटे पर्दे, शटर और घरों की पारंपरिक डिजाइन आज भी वहां लोकप्रिय हैं.

बदलती जलवायु के साथ बदल रही सोच

हालांकि जलवायु परिवर्तन के कारण फ्रांस में अब हालात तेजी से बदल रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में हीटवेव की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है और कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है. ऐसे में घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक भवनों में एयर कंडीशनर की मांग भी तेजी से बढ़ी है. आंकड़े बताते हैं कि कुछ साल पहले जहां केवल लगभग 10 प्रतिशत घरों में एसी उपलब्ध था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. इससे साफ है कि बढ़ती गर्मी फ्रांस की पारंपरिक जीवनशैली और सोच को धीरे-धीरे बदल रही है.

ये भी पढ़ें: दिल्ली से अमृतसर जा रही थी फ्लाइट, अचानक पाकिस्तान में घुसी, इस्लामाबाद में मचा हड़कंप, जानें मामला