आखिर डोनाल्ड ट्रंप का शांति पुरस्कार वाला सपना क्यों टूटा? नोबेल प्राइज समिति ने बता दिया सबकुछ

Nobel Peace Prize: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कई बार यह जताने की कोशिश की कि वे नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं. चाहे भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर बयान हो या रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने की कोशिशें, ट्रंप ने खुद को ‘शांति निर्माता’ साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

Why did not Donald Trump receive the Peace Prize Nobel Prize Committee explained reason
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Nobel Peace Prize: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कई बार यह जताने की कोशिश की कि वे नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं. चाहे भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर बयान हो या रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने की कोशिशें, ट्रंप ने खुद को ‘शांति निर्माता’ साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार एक और शख्सियत के नाम रहा, जिन्होंने वास्तव में लोकतंत्र की लड़ाई लड़ी है.

लोकतंत्र की सशक्त आवाज बनीं माचाडो

इस बार नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता मारिया कोरिना माचाडो को मिला है. माचाडो वर्षों से वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली और शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष कर रही हैं. समिति ने उन्हें "महत्वपूर्ण, एकीकृत और साहसी आवाज़" के रूप में सराहा है, जो लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही हैं.

ट्रंप को क्यों नहीं मिला पुरस्कार? 

नोबेल समिति के अध्यक्ष जोर्गेन वाटने फ्राइडनेस ने पुरस्कार की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि ट्रंप वास्तव में कभी भी पुरस्कार की दौड़ में नहीं थे. उन्होंने कहा, "हमें हर साल हजारों नामांकन मिलते हैं. लेकिन निर्णय हम सिर्फ अल्फ्रेड नोबेल की मूल भावना और उनकी इच्छाओं के आधार पर लेते हैं. हमारे लिए साहस और निष्ठा सबसे बड़ा मापदंड हैं, न कि प्रचार या राजनीतिक दबाव." यह साफ संकेत था कि केवल बयानबाज़ी या राजनीतिक स्टंट से कोई नोबेल का हकदार नहीं बन सकता.

पिछले साल किसे मिला था नोबेल?

पिछले वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार जापान के निहोन हिडांक्यो संगठन को मिला था. यह संगठन 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले में बचे लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और दशकों से परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए जमीनी स्तर पर अभियान चला रहा है.

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