नई दिल्ली: तुर्की में नाटो सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर बड़ा बदलाव किया गया था. रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी और तुर्की की सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि ईरान से जुड़े लोग कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के जरिए ट्रंप के विमान को निशाना बना सकते हैं.
खतरे को देखते हुए ट्रंप को उनके विमान से चुपचाप दूसरे सैन्य विमान में भेज दिया गया. खास बात यह रही कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को पुराने विमान में ही रहने दिया गया. इसके पीछे सुरक्षा और राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकार से जुड़ी वजह बताई जा रही है.
ट्रंप को चुपचाप दूसरे विमान में ले जाया गया
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप पहले एयर फोर्स वन में सवार हुए थे. इसके बाद उन्हें एक कैटरिंग ट्रक के जरिए विमान से बाहर निकालकर दूसरे छोटे सैन्य विमान तक पहुंचाया गया.
इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गुप्त रखा गया था. यहां तक कि एयर फोर्स वन में मौजूद कुछ पत्रकारों और व्हाइट हाउस के कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी.
दूसरे विमान में ट्रंप के साथ रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और उनके कुछ वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. इसका मकसद ट्रंप की सही लोकेशन को छिपाना और संभावित खतरे को कम करना था.
ट्रंप ने खुद विमान बदलने की बात मानी
11 अगस्त को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने विमान बदलने की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा में तैनात सीक्रेट सर्विस और सेना ने उन्हें दूसरे विमान से जाने की सलाह दी थी.
ट्रंप के मुताबिक, उन्हें जो निर्देश दिए गए, उन्होंने उनका पालन किया. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अक्सर धमकियां मिलती रहती हैं और इस मामले में उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों से ज्यादा सवाल नहीं पूछे.
किस खतरे की थी आशंका?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को कंधे से दागी जाने वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल को लेकर चिंता थी. इसे आम तौर पर मैनपैड्स कहा जाता है.
आशंका थी कि ट्रंप की लोकेशन से जुड़ी जानकारी कुछ लोगों के पास हो सकती है. रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि अंकारा में नाटो सम्मेलन स्थल के पास एक व्यक्ति को ऐसी मिसाइल प्रणाली के साथ देखा गया था.
इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने खतरे का आकलन किया और ट्रंप की यात्रा योजना में बदलाव किया.
मार्को रुबियो और स्कॉट बेसेंट को क्यों नहीं हटाया गया?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ट्रंप को सुरक्षित विमान में भेज दिया गया तो विदेश मंत्री मार्को रुबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को पुराने विमान में ही क्यों रखा गया?
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकार से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी. अमेरिकी व्यवस्था में राष्ट्रपति के साथ सरकार के कई शीर्ष अधिकारियों को एक ही विमान में रखने से बचा जाता है, ताकि किसी बड़े हादसे की स्थिति में नेतृत्व की पूरी व्यवस्था एक साथ प्रभावित न हो.
अमेरिका में राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति का नंबर आता है. इसके बाद प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष और सीनेट के प्रेसिडेंट प्रो टेम्पोर का स्थान है. इसके बाद कैबिनेट के सदस्य उत्तराधिकार की सूची में आते हैं.
मार्को रुबियो इसी सूची में ऊपर हैं और उनके बाद वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का स्थान आता है. इसलिए दोनों को ट्रंप के साथ दूसरे विमान में नहीं भेजा गया.
पुराने एयर फोर्स वन में ही रहे रुबियो और बेसेंट
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप को दूसरे विमान में भेजने के बाद मार्को रुबियो और स्कॉट बेसेंट पुराने एयर फोर्स वन में ही अमेरिका लौटे.
इस व्यवस्था का मकसद यह था कि अगर किसी अप्रत्याशित घटना में ट्रंप को कुछ होता है तो सरकार के शीर्ष नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण लोग एक साथ प्रभावित न हों और राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकार की व्यवस्था सुरक्षित रहे.
ट्रंप ने विमान बदलने की वजह कुछ और बताई
विमान बदलने की खबर सामने आने के बाद ट्रंप ने इसे लेकर एक हल्का जवाब भी दिया था. उन्होंने कहा था कि वह अपने पुराने एयर फोर्स वन विमान की यादें ताजा करना चाहते थे.
हालांकि, बाद में उन्होंने यह भी माना कि सुरक्षा अधिकारियों ने विमान बदलने की सलाह दी थी और उन्हें किसी खतरे की आशंका थी.
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि तुर्की में ट्रंप की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी एजेंसियां बेहद सतर्क थीं. विमान बदलने से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग विमानों में रखने तक, हर कदम के पीछे सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई.
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