नई दिल्ली: पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले सिलीगुड़ी यानी चिकन नेक कॉरिडोर में रेलवे की क्षमता बढ़ाई जाएगी. सरकार ने इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर चौथी रेलवे लाइन बिछाने को मंजूरी दे दी है.
यह कॉरिडोर रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि पूर्वोत्तर के राज्यों तक पहुंचने के लिए यह देश का मुख्य जमीनी रास्ता है. ऐसे में यहां रेल नेटवर्क मजबूत होने से यात्री और माल ढुलाई दोनों की सुविधा बढ़ सकती है.
चौथी रेलवे लाइन को मिली मंजूरी
नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव ने बिहार के कटिहार में इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पहले इस हिस्से में तीसरी रेलवे लाइन बिछाने की योजना थी, लेकिन अब चौथी लाइन को भी मंजूरी मिल गई है.
उन्होंने बताया कि इसके अलावा करीब 29 किलोमीटर लंबी भूमिगत दोहरी रेल लाइन बनाने की भी योजना है. यह परियोजना बागडोगरा तक जाएगी और इलाके के लिए महत्वपूर्ण रेल ढांचा तैयार करेगी.
रेलवे की क्षमता बढ़ाने पर जोर
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की अहमियत को देखते हुए रेलवे यहां कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है. इन योजनाओं का मकसद रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के साथ पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को और बेहतर करना है.
रेलवे के मुताबिक, परियोजनाओं के पूरा होने के बाद इस पूरे क्षेत्र में रेल नेटवर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. बारसोई सेक्शन में भी रेलवे लाइन को दोहरी करने का काम तेजी से चल रहा है.
पूर्वोत्तर में बढ़ेंगी वंदे भारत ट्रेनें
रेलवे की ओर से पूर्वोत्तर में तेज ट्रेन सेवाओं को बढ़ाने की भी योजना है. चेतन कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गुवाहाटी से आगे तिनसुकिया और अगरतला तक वंदे भारत ट्रेन सेवाओं को बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है.
इससे पूर्वोत्तर के यात्रियों को तेज और बेहतर रेल यात्रा की सुविधा मिल सकती है. लंबी दूरी के सफर में भी लोगों का समय बचने की उम्मीद है.
क्यों खास है चिकन नेक कॉरिडोर?
चिकन नेक कॉरिडोर को सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है. यह उत्तर बंगाल का एक संकरा इलाका है, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है.
यह क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां रेल और सड़क संपर्क का मजबूत होना देश की सुरक्षा और पूर्वोत्तर तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए काफी अहम है.
बांग्लादेश से सटे होने और क्षेत्र में बदलते राजनीतिक हालात के कारण भी इस इलाके पर सरकार का ध्यान बढ़ा है. ऐसे में रेलवे की नई परियोजनाओं को रणनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कटिहार रेल मंडल में भी कई योजनाएं
नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, कटिहार रेल मंडल में यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं. मंडल में 42 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं और करीब 250 नए ठहराव बनाए गए हैं.
न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन के विकास का काम भी चल रहा है. रेलवे के मुताबिक, यह काम अप्रैल 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है.
इसके अलावा जोगबनी, राधिकापुर और बालुरघाट से नई लोकल ट्रेन सेवाएं शुरू करने की तैयारी भी चल रही है. इससे सीमावर्ती और दूर-दराज के इलाकों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है.
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