Monsoon: मानसून में देरी और कम बारिश... किसानों की बढ़ेंगी मुश्किलें, IMD ने जारी की चेतावनी

देशभर में मानसून का इंतजार कर रहे किसानों और आम लोगों के लिए मौसम विभाग की नई भविष्यवाणी चिंता बढ़ाने वाली साबित हो सकती है.

Monsoon Delay less rain Farmers problems will increase IMD issues warning
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Monsoon: देशभर में मानसून का इंतजार कर रहे किसानों और आम लोगों के लिए मौसम विभाग की नई भविष्यवाणी चिंता बढ़ाने वाली साबित हो सकती है. भारतीय मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपने ताजा अनुमान में बारिश की मात्रा को पहले के मुकाबले कम बताया है. नई रिपोर्ट के अनुसार इस बार मानसून के दौरान देश में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई गई है, जिसका सीधा असर खेती, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

मौसम विभाग के मुताबिक पहले जहां मानसून सीजन में दीर्घकालिक औसत का करीब 92 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब इसे घटाकर करीब 90 प्रतिशत कर दिया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो की स्थिति जल्दी सक्रिय होने से मानसून की रफ्तार और बारिश के पैटर्न पर असर पड़ा है.

खेती वाले राज्यों में कम बारिश की आशंका

मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश के कई प्रमुख कृषि क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. खासतौर पर वे राज्य, जहां खरीफ फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है, वहां मानसून कमजोर पड़ सकता है.

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जून और जुलाई में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान, सोयाबीन, दालें और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है. इससे किसानों की लागत बढ़ने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

ग्रामीण इलाकों में पहले से ही बढ़ती गर्मी और जल संकट की समस्या बनी हुई है. ऐसे में कम बारिश की संभावना किसानों की मुश्किलें और बढ़ा सकती है.

जून में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान

मौसम विभाग ने जून महीने के लिए भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है. पहले उम्मीद थी कि जून में सामान्य मानसूनी बारिश होगी, लेकिन अब नई परिस्थितियों के चलते अनुमान में बदलाव किया गया है.

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की शुरुआती कमजोरी का असर पूरे सीजन पर पड़ सकता है. अगर शुरुआती चरण में बारिश कम रहती है तो फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी.

पूर्वोत्तर भारत में राहत की उम्मीद

हालांकि मौसम विभाग ने पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों के लिए राहतभरी खबर भी दी है. विभाग के मुताबिक पूर्वोत्तर राज्यों में इस बार सामान्य बारिश होने की संभावना बनी हुई है.

इसके अलावा उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ इलाकों में भी सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है. हालांकि देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका जताई गई है.

किस राज्य में कब पहुंचेगा मानसून

मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों में मानसून पहुंचने की संभावित तारीखें भी जारी की हैं.

उत्तर भारत

  • दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मानसून 25 से 30 जून के बीच पहुंच सकता है.
  • पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी राजस्थान में मानसून 30 जून से 5 जुलाई के बीच दस्तक दे सकता है.
  • जम्मू-कश्मीर और उत्तर भारत के बाकी हिस्सों में मानसून 5 से 15 जुलाई के बीच पहुंचने की संभावना है.

दक्षिण भारत

  • केरल और लक्षद्वीप में मानसून 3 से 5 जून के बीच पहुंच सकता है.
  • तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में 5 से 10 जून के बीच मानसून सक्रिय हो सकता है.
  • महाराष्ट्र, जिसमें मुंबई भी शामिल है, वहां 10 जून तक मानसून पहुंचने का अनुमान है.

मध्य और पूर्वी भारत

  • तेलंगाना और ओडिशा में मानसून 10 से 12 जून के बीच पहुंच सकता है.
  • छत्तीसगढ़, दक्षिण गुजरात और मध्य प्रदेश में 12 से 15 जून के बीच बारिश शुरू होने की संभावना है.
  • बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी 12 से 15 जून के बीच मानसून सक्रिय हो सकता है.
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में मानसून 15 से 20 जून के बीच पहुंचने की संभावना जताई गई है.

कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा

जहां कई राज्यों में कम बारिश की आशंका है, वहीं कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना भी जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है.

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन इलाकों में कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है. खासतौर पर पहाड़ी और नदी किनारे वाले क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.

अल नीनो बना बड़ी वजह

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार अल नीनो की स्थिति मानसून को प्रभावित कर रही है. अल नीनो एक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव के कारण दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर असर पड़ता है.

भारत में अल नीनो का असर अक्सर कमजोर मानसून और कम बारिश के रूप में देखा जाता है. यही वजह है कि इस बार भी मानसून के कमजोर रहने की आशंका बढ़ गई है.

किसानों की बढ़ी चिंता

देश की बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है और भारतीय कृषि काफी हद तक मानसून पर टिकी हुई है. ऐसे में कम बारिश का अनुमान किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है.

कई किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि यदि बारिश कम होती है तो सिंचाई, बिजली और बीज से जुड़ी विशेष सहायता योजनाएं तैयार की जाएं. वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर

मानसून केवल खेती ही नहीं बल्कि देश की पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है. अच्छी बारिश से कृषि उत्पादन बढ़ता है, ग्रामीण बाजार मजबूत होते हैं और खाद्य महंगाई नियंत्रण में रहती है.

लेकिन यदि मानसून कमजोर रहता है तो खाद्यान्न उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है. यही कारण है कि मौसम विभाग की ताजा भविष्यवाणी को काफी अहम माना जा रहा है.

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