CBSE 12वीं के अंकों का सत्यापन और री-इवैल्यूएशन शुरू, जानें आवेदन की फीस और पूरा प्रोसेस

CBSE Class 12 Re-evaluation 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन और अंकों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. बोर्ड ने शुक्रवार 29 मई 2026 से आवेदन विंडो खोल दी है.

Verification and re-evaluation of CBSE 12th marks begins know the complete process here
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CBSE Class 12 Re-evaluation 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन और अंकों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. बोर्ड ने शुक्रवार 29 मई 2026 से आवेदन विंडो खोल दी है. जिन छात्रों ने पहले अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त कर ली है, वे अब आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से री-चेकिंग और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं.

इस बार सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षा से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को पहले के मुकाबले अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. बोर्ड ने पहली बार कक्षा 12वीं के लिए पूरी तरह डिजिटल री-इवैल्यूएशन सिस्टम लागू किया है. इस नई व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए आईआईटी कानपुर, आईआईटी मद्रास और कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सहयोग लिया गया है.

पहली बार पूरी तरह डिजिटल हुई प्रक्रिया

सीबीएसई की नई डिजिटल व्यवस्था का मकसद छात्रों को अधिक पारदर्शी और तेज सेवा उपलब्ध कराना है. पहले जहां छात्रों को कई चरणों में अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, वहीं अब अधिकांश काम ऑनलाइन माध्यम से किए जा रहे हैं. बोर्ड का कहना है कि डिजिटल सिस्टम के जरिए छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं तक आसान पहुंच मिलेगी और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पहले से ज्यादा जवाबदेह और व्यवस्थित होगी.

इन तारीखों को जरूर करें नोट

सीबीएसई ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए अलग-अलग चरणों की तारीखें पहले ही जारी कर दी थीं.

महत्वपूर्ण तिथियां

  • उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने की प्रक्रिया: 20 मई से 25 मई 2026
  • अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन: 26 मई 2026
  • री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया की शुरुआत: 29 मई 2026

अब री-इवैल्यूएशन का चरण शुरू हो चुका है और छात्र निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं.

कैसे करें आवेदन?

छात्र अपने पुराने लॉगिन क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके आधिकारिक सीबीएसई पोर्टल पर लॉगिन कर सकते हैं. आवेदन के लिए लिंक बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जा रहा है. ऑनलाइन आवेदन करते समय छात्रों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्होंने संबंधित विषय की स्कैन कॉपी पहले प्राप्त की हो. बिना स्कैन कॉपी लिए किसी विषय में री-इवैल्यूएशन की अनुमति नहीं दी जाएगी.

छात्र किन सेवाओं के लिए कर सकते हैं आवेदन?

सीबीएसई ने छात्रों को अलग-अलग विकल्प दिए हैं. छात्र अपनी जरूरत के अनुसार इनमें से किसी भी सेवा के लिए आवेदन कर सकते हैं.

उपलब्ध विकल्प

  • अंकों का सत्यापन
  • उत्तरों का पुनर्मूल्यांकन
  • सत्यापन और री-इवैल्यूएशन दोनों

बोर्ड का कहना है कि छात्रों को आवेदन करते समय सावधानीपूर्वक विकल्प चुनना चाहिए, क्योंकि आगे की प्रक्रिया उसी आधार पर तय होगी.

हर चरण की अलग फीस

री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए सीबीएसई ने अलग-अलग चरणों के अनुसार शुल्क तय किया है.

फीस संरचना

  • उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी: 100 रुपये प्रति विषय
  • अंकों का सत्यापन: 100 रुपये प्रति विषय
  • री-इवैल्यूएशन: 25 रुपये प्रति प्रश्न

छात्रों को ऑनलाइन माध्यम से फीस जमा करनी होगी.

इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

सीबीएसई ने छात्रों को कुछ महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए हैं.

  • री-इवैल्यूएशन केवल उन्हीं विषयों में कराया जा सकेगा जिनकी स्कैन कॉपी पहले ली गई हो.
  • छात्र केवल उन्हीं प्रश्नों का चयन कर सकेंगे जिनकी दोबारा जांच करवानी है.
  • जिन प्रश्नों का चयन नहीं किया जाएगा, उनकी दोबारा जांच नहीं होगी.
  • पुनर्मूल्यांकन के बाद अंक बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं.
  • री-इवैल्यूएशन के बाद जारी अंतिम अंक ही मान्य माने जाएंगे.

बोर्ड ने छात्रों से आवेदन करते समय पूरी सावधानी बरतने की अपील की है.

लाखों छात्रों ने ली स्कैन कॉपी

सीबीएसई के अनुसार इस साल बड़ी संख्या में छात्रों ने डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग किया है. अब तक करीब 4 लाख छात्र लगभग 11 लाख स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त कर चुके हैं. यह आंकड़ा दिखाता है कि छात्र अब अपनी उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया की मांग बढ़ रही है.

बोर्ड ने दिया पारदर्शिता का भरोसा

सीबीएसई ने कहा है कि डिजिटल री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में यदि किसी प्रकार की तकनीकी समस्या या विसंगति सामने आती है तो उसे पूरी जवाबदेही के साथ दूर किया जाएगा. बोर्ड का मानना है कि नई तकनीक के इस्तेमाल से छात्रों को ज्यादा भरोसेमंद और तेज सेवा मिलेगी. साथ ही इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी.

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