न पाकिस्तान न अमेरिका, चीन है भारत का असली दुश्मन, सामने आई ये लेटेस्ट रिपोर्ट

हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव ने एक बार फिर सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों को लेकर बहस तेज कर दी है. पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर करारा हमला बोला.

Who is india's biggest enemy in this world report reveals
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हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव ने एक बार फिर सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों को लेकर बहस तेज कर दी है. पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर करारा हमला बोला. जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान ने भी हमला करने की कोशिश की, जिसका भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया. इस पूरे घटनाक्रम ने सिर्फ भारत-पाक संबंधों को नहीं, बल्कि भारत के वैश्विक रिश्तों को भी केंद्र में ला खड़ा किया है.

अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था प्यू रिसर्च सेंटर ने हाल ही में एक सर्वे किया, जिसमें भारतीय नागरिकों से पूछा गया कि वे भारत का सबसे बड़ा दुश्मन किस देश को मानते हैं. इस सर्वे में दिलचस्प आंकड़े सामने आए. केवल 2% भारतीयों ने अमेरिका को दुश्मन के तौर पर देखा. 33% लोगों ने चीन को भारत का प्रमुख विरोधी बताया. जबकि 41% प्रतिभागियों ने पाकिस्तान को भारत का सबसे बड़ा दुश्मन माना. इन आंकड़ों से साफ है कि भारत-पाक रिश्तों में लंबे समय से चला आ रहा तनाव आज भी भारतीय जनमानस पर गहरा असर डालता है.

क्यों गहराई है चीन और पाकिस्तान के प्रति अविश्वास?

भारत का पाकिस्तान और चीन के साथ तनाव कोई नया नहीं है. पाकिस्तान के साथ अब तक चार युद्ध और चीन के साथ एक युद्ध हो चुका है. दोनों देश कई मौकों पर भारत के खिलाफ एकजुट नजर आए हैं. पाकिस्तान पर अक्सर भारत में आतंकवाद फैलाने का आरोप लगता रहा है. वहीं, चीन लगातार सीमा विवाद को हवा देता है और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन करता है. हाल ही में जब भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, तब चीन, तुर्की और अज़रबैजान जैसे देशों ने पाकिस्तान का पक्ष लिया. यह रवैया भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है, खासकर तब जब चीन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में लगातार अपना प्रभाव बढ़ा रहा है.

भारत की नीति: शांति की कोशिशें, लेकिन सतर्कता के साथ

भारत हमेशा से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति को प्राथमिकता देता आया है. लेकिन जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है, तो भारत ने हर बार दृढ़ता से अपनी संप्रभुता की रक्षा की है. चाहे सीमाओं पर जवाबी कार्रवाई हो या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक प्रयास, भारत ने संतुलित रुख अपनाया है.

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