क्या है EAEU? जिस पर पुतिन की नजर, भारत को मिल सकता है बड़ा फायदा, अमेरिका को लगेगा तगड़ा झटका

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने अमेरिका के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है. इस यात्रा के दौरान पुतिन ने भारत और यूरेशियाई आर्थिक संघ (ईएईयू) के बीच एक अहम समझौते की घोषणा की है, जो अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने में मदद करेगा.

What is EAEU which Putin wants signed soon India stands to gain greatly while America will be impacted
Image Source: ANI

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने अमेरिका के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है. इस यात्रा के दौरान पुतिन ने भारत और यूरेशियाई आर्थिक संघ (ईएईयू) के बीच एक अहम समझौते की घोषणा की है, जो अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने में मदद करेगा. इस समझौते के जरिए भारत को व्यापार में एक नई रफ्तार मिल सकती है, जिससे अमेरिका को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है.

ईएईयू क्या है?

यूरेशियाई आर्थिक संघ (ईएईयू) एक आर्थिक संगठन है, जिसमें रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देश शामिल हैं. यह संघ मुख्य रूप से इन देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से काम करता है. भारत इस संगठन के साथ एक खास व्यापार समझौता करने जा रहा है, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

भारत और रूस के बीच बढ़ता व्यापार

भारत और रूस के बीच वर्तमान में 70 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है, और इस व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य है. पुतिन की इस यात्रा के दौरान व्यापारिक समझौतों पर जोर दिया गया है, और दोनों देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी के प्रवाह में आने वाली बाधाओं को खत्म करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं. यह कदम अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने के लिए अहम साबित हो सकता है, क्योंकि अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ लगाया था.

पुतिन की रणनीति

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अपनी यात्रा के दौरान यह स्पष्ट किया कि उनका भारत दौरा केवल ऊर्जा समझौतों के लिए नहीं है. पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच तेल और गैस आपूर्ति के अनुबंधों के साथ-साथ औद्योगिक सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इसके साथ ही, रूस भारत को कृत्रिम मेधा (AI) के क्षेत्र में भी सहयोग देने का इच्छुक है, क्योंकि रूस इस क्षेत्र में पहले ही काफी उन्नति कर चुका है.

भारत-रूस संबंध

पुतिन ने भारत-रूस रिश्तों को केवल व्यापार तक सीमित नहीं माना. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच औद्योगिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को भी बढ़ावा देना है. रूस भारत के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए तैयार है, और यह दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक फायदे का रास्ता खोल सकता है.

अमेरिका के टैरिफ का जवाब

पुतिन और मोदी के बीच इस समझौते पर चर्चा के बाद, यह स्पष्ट हो गया है कि भारत और रूस की इस साझेदारी से अमेरिका को आने वाले वर्षों में आर्थिक नुकसान हो सकता है. अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ की वजह से भारत को नुकसान हो रहा था, लेकिन ईएईयू के साथ यह समझौता अमेरिका की रणनीति को कमजोर कर सकता है. भारत अब अमेरिकी दबाव के बावजूद अपने व्यापारिक हितों को आगे बढ़ाने में सक्षम होगा.

ये भी पढ़ें: चलते वक्त पुतिन क्यों नहीं हिलाते अपना राइट हैंड? बीमारी या कुछ और... क्या है वजह? जानकर रह जाएंगे हैरान