8 साल का इंतजार खत्म, कनाडा और भारत के बीच रिश्ते हुए मजबूत; मार्क कार्नी के दौरे में 2 दिनों में हुए बड़े फैसले

India Canada Deal: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच जहां दुनिया की नजरें जंग पर टिकी थीं, वहीं दूसरी तरफ भारत और कनाडा के बीच एक नई आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी आकार ले रही थी. 

Canada and India strengthened Major decisions taken in 2 days during Mark Carney visit
Image Source: ANI

India Canada Deal: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच जहां दुनिया की नजरें जंग पर टिकी थीं, वहीं दूसरी तरफ भारत और कनाडा के बीच एक नई आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी आकार ले रही थी. 

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बातचीत ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने का संकेत दिया. दोनों नेताओं ने बीते मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए सहयोग और निवेश पर आधारित एक नए दौर की शुरुआत का संदेश दिया.

रिश्तों में नई शुरुआत, सहयोग का नया दौर

भारत-कनाडा के बीच हुई इस अहम बैठक को दोनों देशों के रिश्तों में टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है. विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जो प्रगति पिछले कई वर्षों में नहीं हो सकी, वह इन कुछ दिनों की बातचीत में देखने को मिली. कनाडा ने भारत के साथ अपने आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के संकेत दिए हैं, जिसमें ऊर्जा, खनिज और निवेश जैसे बड़े क्षेत्र शामिल हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया-कनाडा सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि जब दोनों देश साथ आते हैं, तो यह केवल दो अर्थव्यवस्थाओं का मेल नहीं होता, बल्कि यह पूंजी, तकनीक और क्षमता का ऐसा संयोजन बनता है जो वैश्विक स्तर पर नई ताकत पैदा कर सकता है.

क्लीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी में बड़ी साझेदारी

दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सहमति जताई है. कनाडा की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के बड़े पैमाने को जोड़कर ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की योजना बनाई जा रही है.

इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है, जिसमें साझा AI कंप्यूट कॉरिडोर और स्टार्ट-अप्स के लिए इनोवेशन प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे. इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग सेक्टर में भी साझेदारी को मजबूत करने की बात सामने आई है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन में दोनों देशों की भूमिका और मजबूत होगी.

व्यापार और निवेश को नई ऊंचाई देने की तैयारी

भारत और कनाडा ने द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. दोनों देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार 6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक बताया गया, जो इसे वैश्विक स्तर पर एक प्रभावशाली आर्थिक शक्ति बनाता है.

कनाडाई पेंशन फंड्स पहले ही भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर चुके हैं और अब इस निवेश को और बढ़ाने की योजना है. इससे भारतीय बाजार और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.

यूरेनियम और परमाणु ऊर्जा में ऐतिहासिक समझौता

ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से सबसे अहम समझौता यूरेनियम सप्लाई को लेकर हुआ है. कनाडा ने भारत को लंबे समय तक यूरेनियम उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है, जिससे भारत अपने 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल कर सकेगा. इस दिशा में भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और कनाडा की प्रमुख कंपनी कैमेको के बीच दीर्घकालिक समझौता भी हुआ है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

क्रिटिकल मिनरल्स और इंडस्ट्री को मिलेगा बूस्ट

इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई को लेकर भी बड़ा समझौता हुआ है. कनाडा इन संसाधनों के साथ तकनीक हस्तांतरण भी करेगा, जिससे भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ावा मिलेगा. भारत, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक त्रिपक्षीय सहयोग ढांचा भी तैयार किया गया है, जो उभरती तकनीकों और इनोवेशन के क्षेत्र में नए अवसर खोलेगा.

शिक्षा, रिसर्च और कृषि में सहयोग

दोनों देशों ने शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी कई अहम फैसले लिए हैं. कनाडा अगले तीन वर्षों तक हर साल 300 भारतीय छात्रों को पूरी तरह फंडेड रिसर्च इंटर्नशिप का अवसर देगा. इसके साथ ही फूड प्रोसेसिंग और पल्स प्रोटीन के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना भी बनी है. विश्वविद्यालयों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कृषि जैसे क्षेत्रों में कई साझेदारियों की घोषणा की गई है.

वैश्विक मंच पर साथ बढ़ने की तैयारी

कनाडा ने भारत की पहल वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी भागीदारी बढ़ाने का फैसला किया है. वह ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और इंटरनेशनल सोलर अलायंस से जुड़ गया है. इसके अलावा रक्षा सहयोग और संसदीय मैत्री समूह बनाने पर भी सहमति बनी है.

कुल मिलाकर, यह दौरा केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि भारत और कनाडा के बीच एक नई रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव साबित हो सकता है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर डालने की क्षमता रखता है.

ये भी पढ़ें- Israel-Iran War: कई देशों में फैल चुकी है यह जंग, ईरान ने कहां-कहां किए हमले, किसे कितना हुआ नुकसान?