इस्लामाबाद: अमेरिका द्वारा बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी प्रमुख टुकड़ी मजीद ब्रिगेड को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने की घोषणा के बाद, BLA ने इसे मात्र कूटनीतिक दांव बताया है, जो उनके संघर्ष को कमजोर नहीं कर सकता. गुट के प्रवक्ता जिय्यन्द बलूच ने इस फैसले को औपनिवेशिक सोच का समर्थन करार दिया और साफ़ शब्दों में कहा, "हमें इस तरह कदम की उम्मीद थी. यह हमें झुकने पर मजबूर नहीं करता. हमारा अभियान जारी रहेगा."
वे कहते हैं कि BLA की लड़ाई पाकिस्तानी सैन्य वर्चस्व के खिलाफ है और यह केवल बलूचों की पहचान और स्वाधीनता की रक्षा का संघर्ष है.
इतिहास और संवेदनशील संदर्भ
BLA की जड़ें उत्तर बलूचिस्तान में 1948 के दशक की जड़पों से जुड़ी हैं, जब पाकिस्तान द्वारा बलूचिस्तान पर वर्चस्व स्थापित किया गया था. BLA का मुख्य दावा है कि यह कब्ज़ा गैरक़ानूनी और असंवैधानिक था. इस संघर्ष को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते हुए BLA का मानना रहा है कि उनकी लड़ाई राष्ट्रवादी गौरव और स्व‑निर्णय के अधिकार की रक्षा के लिए है.
उनके अनुसार, इस लड़ाई को किसी विदेशी मान्यता या अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणपत्र की मोहताज नहीं. BLA खुद को एक स्वतंत्र प्रतिरोधी संस्था मानता है, जो केवल पाकिस्तान की सुरक्षा ताकतों जैसे कि फ्रंटियर कोर, सेना और खुफिया नेटवर्क को टार्गेट करता है. उनके हथियार किसी आम नागरिक के ख़िलाफ़ नहीं हैं.
सैन्य और विचारधारात्मक प्रतिबद्धता
जिय्यन्द बलूच ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, "हम अपनी वैचारिक और सशस्त्र 'क्रांति' से नहीं हटेंगे. जब तक बलूच राष्ट्रीय मुक्ति और संप्रभुता हासिल नहीं हो जाती, हम संघर्ष जारी रखेंगे. किसी भी वैश्विक शक्ति की सलाह या विरोध से हमारा मार्ग नहीं रोका जा सकता."
यह बयान BLA के अडिग विश्वास को दर्शाता है कि उनका संघर्ष केवल राजनीतिक निर्णयों की सीमा में नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई में है.
वैश्विक रणनीतिक परिप्रेक्ष्य
यह निर्णय तब आया है जब पाकिस्तान की सेना प्रमुख असिम मुनिर की हालिया अमेरिका यात्रा ने संयुक्त राज्य और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक संबंधों को फिर नया आयाम दिया है. विश्लेषकों का मानना है कि BLA पर FTO सूची में शामिल करने जैसे कदम पाकिस्तान को समर्थन देने की स्पष्टता है सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ खनिज संसाधनों तक पहुंच को भी मजबूत करने का संकेत.
बलूचिस्तान के संभावित प्राकृतिक संसाधन (विशेषकर खनिज संपदा) में अमेरिका की बढ़ती रुचि इस कदम की पृष्ठभूमि हो सकती है, जो इस निर्णय को सिर्फ आतंकवाद विरोधी कार्रवाई से कहीं अधिक व्यापक बना देती है.
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