मिडिल ईस्ट में हमले से समुद्री रास्ते बंद, क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल! भारत पर क्या होगा असर?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब साफ तौर पर ग्लोबल ऑयल मार्केट में दिखाई देने लगा है.

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Oil Price: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब साफ तौर पर ग्लोबल ऑयल मार्केट में दिखाई देने लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की स्थिति ने कच्चे तेल की कीमतों को अचानक तेज रफ्तार दे दी है. सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में करीब 7 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जिससे यह 15 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई.

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते हमलों के कारण तेल टैंकरों और शिपमेंट पर असर पड़ा है. समुद्री रास्तों में रुकावट और सुरक्षा जोखिम बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा. खाड़ी क्षेत्र का कच्चा तेल 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल भी 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया.

15 महीने के उच्चतम स्तर पर कीमतें

सोमवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. भारतीय समयानुसार सुबह 7 बजे तक ब्रेंट क्रूड करीब 6.22 फीसदी की बढ़त के साथ 77.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा.

वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी तेज उछाल देखा गया. इसकी कीमत 4.66 डॉलर यानी करीब 6.95 फीसदी बढ़कर 71.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. कारोबारी सत्र के दौरान यह 75.33 डॉलर तक गया, जो जून 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है.

एशियाई बाजारों में भी तेजी

एशियाई बाजारों में भी तेल की कीमतों में उछाल जारी रहा. सोमवार सुबह तक कच्चा तेल करीब 9 फीसदी की बढ़त के साथ 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया. अमेरिकी क्रूड में तो एक ही झटके में करीब 8 डॉलर यानी 12 फीसदी तक की तेजी देखी गई.

इस साल की शुरुआत से ही तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है. जनवरी से अब तक अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क में करीब 20 फीसदी का उछाल दर्ज किया जा चुका है. ऐसे में मौजूदा हालात ने चिंता और बढ़ा दी है.

100 डॉलर तक जा सकती हैं कीमतें

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा और सप्लाई बाधित होती रही, तो कच्चा तेल जल्द ही 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकता है. इससे वैश्विक ऊर्जा लागत में भारी इजाफा होगा, जिसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा.

होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा खतरा

सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जताई जा रही है. यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है. इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान व यूएई स्थित हैं.

यह संकरा रास्ता दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. सऊदी अरब, कुवैत, कतर और इराक जैसे बड़े उत्पादक देश इसी मार्ग से अपना तेल निर्यात करते हैं. रोजाना करीब 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जो वैश्विक सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है.

भारत भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है. ऐसे में अगर यह रास्ता बंद होता है या शिपमेंट बाधित होता है, तो भारत सहित कई देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा.

जहाजों पर हमले से बढ़ी चिंता

हालिया हमलों में खाड़ी क्षेत्र में मौजूद टैंकरों को भी नुकसान पहुंचा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिसाइल हमलों में कम से कम तीन तेल टैंकर निशाना बने और एक नाविक की मौत भी हुई. इससे समुद्री सुरक्षा को लेकर खतरा और बढ़ गया है.

बताया जा रहा है कि ईरान ने इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने की चेतावनी दी है, जिससे एशियाई देशों और तेल रिफाइनरियों ने अपने स्टॉक का आकलन शुरू कर दिया है.

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