Viksit Bharat Leadership Summit: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'विकसित भारत लीडरशिप समिट 2026' में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री C. R. Patil ने शिरकत की. उन्होंने "Green Warriors of New India" विषय पर अपने विचार साझा किए. इस विशेष सत्र में जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा, सतत विकास, हरित ऊर्जा और विकसित भारत 2047 के विजन पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई. C. R. Patil ने बताया कि कैसे जनभागीदारी, तकनीक और पर्यावरणीय जागरूकता भारत को एक हरित और विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है.
सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 साल का कार्यकाल पूरा किया है. अगर मैं आपसे कहूं कि तीन शब्दों में प्रधानमंत्री के इस कार्य कार्यकाल को अगर आप समराइज कर सकें तो वो तीन शब्द कौन से होंगे?
जवाब: सुरक्षित भारत, विकसित भारत और फ्यूचर में जो महासत्ता बनने के और बढ़ रहा है ऐसा भारत बनाने में माननीय प्रधानमंत्री मोदी साहब का सबसे बड़ा योगदान है.
सवाल: 2014 में हमने देखा कि प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत की अपील की. ब्रांड एंबेसडर बनाए और फिर उसके बाद हर घर जल जैसी योजनाएं थी वह सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बड़े विज़न के तौर पर हमने देखी. लेकिन आज जब हम चर्चा करते हैं इसकी उपलब्धियों के साथ आपको लगता है कि वो ड्रीम प्रोजेक्ट्स आज एक सस्टेनेबल मॉडल में तब्दील हो चुके हैं?
जवाब: माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साहब ने विकसित भारत का 2047 का टारगेट दिया है. अगर लोगों के घरों में टॉयलेट नहीं है महिलाओं को सूर्यास्त के बाद में या सूर्योदय के पहले टॉयलेट के लिए बाहर जाना पड़ता है. उनकी सुरक्षा का प्रश्न आता है. ऐसा भारत कभी विकसित भारत नहीं हो सकता. और इसीलिए सबसे पहले माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी साहब ने टॉयलेट बनाने का आह्वान किया. सरकार ने पैसा दिया और 12 करोड़ घरों में टॉयलेट बने. जिसके कारण 60 करोड़ लोगों की जो बाहर शौच के लिए जाने की आदत थी वह बदल गई. यह मोदी साहब के सरकार के यहां फिगर नहीं है. ये WHO के रिपोर्ट के अनुसार मैं आपको बता रहा हूं.
दूसरी बात कही आपने हर घर नल से जल की बात है. मैंने जो कहा वैसा कि WHO का रिपोर्ट ही कहता है कि यह योजना आने के पहले 9 करोड़ महिला रोज पानी के लिए दूरदराज तक भटकती थी. जो भी पानी मिले जो भी क्वालिटी का मिले वह लेकर आती थी. उसके कारण कई बीमारियां होती थी. रोज उनके 5 घंटे पानी लेने जाने में आने में उनको लगता था. आज उनका जो समय बचा है वो समय वो अपने बच्चों के लिए अपने आर्थिक उपार्जन में वो खर्च कर सकती है. जो बोझ उठाकर उसको आना पड़ता था. उसमें से उसको मुक्ति मिली है और जो नल से जल आया शुद्ध पानी उसके घर में आया उसके कारण पहले जो गंदा पानी उसको मिलता था उसके कारण जो पूरे देश में अलग-अलग गांव में जो बीमारियां होती थी तो सरकार के छोड़कर वो अपने आप जो पैसा खर्च कर सकते थे वो करीब 8.4 लाख करोड़ वो अपने दवाइयों के लिए खर्च करते थे वो 8.4 लाख करोड़ इसके कारण बचा है. महिला सुरक्षित हो गई. महिलाओं को दूर तक जाने से मुक्ति मिली और अच्छा पानी उनको अपने घर में मिलने लगा. ये अपने आप में बहुत बड़ा काम हुआ है. अभी तक 16 करोड़ घरों में पानी दिया गया है. और 2028 दिसंबर तक और 3 करोड़ घरों में पानी देना है. उसके लिए काम चल रहा है. तो विकसित भारत कहना तो आसान है. मगर विकसित भारत तक आगे बढ़ने के लिए अगर हम हम टॉयलेट नहीं बनाएंगे. अगर हम पानी नहीं देंगे तो विकसित भारत संभव ही नहीं है. तो यह प्राइमरी है.
ऐसी बहुत सी योजना है जो बहनों के लिए गैस के कनेक्शन दिए गए. महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए और कई कदम उठाए गए. हर सेक्टर के लिए काम किया गया. तो विकसित भारत तक पहुंचने के लिए सभी आवश्यक योजना में से ये दोनों योजना है और जो दोनों हमारे मंत्रालय की है.
सवाल: आपने महिलाओं का जिक्र किया जब प्रधानमंत्री ने ये सोचा कि हर घर में शौचालय बनना चाहिए. आज जब हम बात करते हैं आपको लगता है कि महिलाओं के सम्मान को लेकर एक डिग्निटी को लेकर एक बहुत मजबूत स्तंभ के तौर पर इस योजना ने काम किया है?
जवाब: योजना के कारण मैंने कहा कि महिला सुरक्षित भी हो गई और महिलाओं को पहले अगर सोच के लिए जाना था तो सूर्यास्त की वो वेट करती थी तो पूरा गंदगी अपने शरीर में लगती थी. उसके कारण उसको कई प्रकार की बीमारियां भी होती थी. और जो उनके बच्चे भी सोच के लिए बाहर जाते थे उनको जो डायरिया के वजह से हर साल करीब 60 हजार बच्चों की मौत होती थी. पहले ही 5 साल के अंदर करीब 3 लाख बच्चों को मौत से बचाया गया है. तो अपने आप में ये योजना बहुत अच्छी तरह बनी है. मैं उसी की मीटिंग अभी करके आया हूं. दोनों हमारे जल जीवन मिशन का और स्वच्छता का. वहां पर हम जो टॉयलेट बने हैं उसको कैसे डबल फीड बनाए कैसे उसको स्वच्छ रखें उसके बारे में अभी हम प्लानिंग कर रहे थे हम तो माननीय प्रधानमंत्री मोदी साहब छोटी-छोटी बातों को ध्यान में लेकर लोगों की समस्या को हल करने के लिए जो काम करते हैं उसी में कि ये दोनों ही योजना.
सवाल: विपक्ष की एक आलोचना है. इस क्रिटिसिज्म को आप कैसे देखते हैं? जब वह यह कहते हैं कि एक तो आपने हर घर नल तो पहुंचा दिया पर हर घर जल नहीं पहुंचा और कहीं-कहीं पर अगर जल पहुंच भी रहा है तो वैसी गुणवत्ता नहीं है. अगर इस क्रिटिसिज्म को हम फ़ैक्चुअली चेक कर सकें और दूसरा अगर इसमें बदलाव करना हो तो किस तरीके से आपका मंत्रालय इस पर काम कर रहा है?
जवाब: देखिए जो विरोध पक्ष है उनका काम है विरोध करना. मगर उनको एक सवाल पूछना चाहिए कि 70 साल तक वह सत्ता में रहे तो क्यों सबके घरों में पानी नहीं गया? माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी साहब ने 2019 में योजना शुरू की. नल है तो जल नहीं अगर कोई हमें कहता है तो हमें वो गाली लगता है. और इसीलिए हमने अलग-अलग योजना बनाकर सिंगल विलेज के आईडी बनाकर उसको पानी पहुंचाए. 15 दिन तक वो गांव में पानी दें. गांव का सरपंच और गांव के लोग जब उसका वीडियो और फोटोग्राफ बनाकर भेजेंगे और सर्टिफाइड करेंगे जब हम उसको पेमेंट करना शुरू किया. इसके कारण जहां पानी के सोर्स कम पड़ गए थे वहां भी हमने जो ग्राउंड वाटर से पानी लेते थे तो हमने राज्य सरकारों को भी कहा कि अभी उसको सरफेस वाटर से पानी लाने की व्यवस्था ये स्टेट गवर्नमेंट का काम है. पानी ये सब्जेक्ट ही राज्य सरकार का है. माननीय प्रधानमंत्री मोदी साहब ने तो एक सपोर्ट करने के लिए टेक्निकल सहयोग और आर्थिक सहयोग किया है. तो जहां यह सोच की कमी थी वहां पर भी हमने गांधीनगर में एक बायसेक की ओर से पूरा सर्वे करवा कर 700 जिलों में पूरे देश के 700 जिलों में कहां पर उन्होंने स्ट्रक्चर बनाकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग के द्वारा पानी का स्तर बढ़ाना चाहिए वो भी हमने सभी को भेजा है. तो यह रेनोटर हार्वेस्टिंग के साथ यह जलजर मिशन भी साथ में जुड़ेगा या सरफेस वाटर से पानी आएगा तो सबके घर में पानी जाएगा जो हमारे पास कंप्लेंट आई थी करीब 17000 कंप्लेंट आई थी उसमें से हमने सबके ऊपर एक्शन लिए करीब 400 अधिकारी एक मिनिस्टर अभी भी जेल में है एक आईएएस अधिकारी भी जेल में है और बाकी भी जिसको एक्शन लेना था जो कांट्रेक्टर थे उनको ब्लैक लिस्ट करना था उनसे रिकवरी करनी थी वह सभी काम हम लोग कर रहे हैं.
सवाल: एक नमामि गंगे मिशन के बारे में हमने 2014 के बाद से लगातार सुना है और खासतौर पर जब से आपने मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली और आज जब हम ये चर्चा कर रहे हैं विकसित भारत 2047 को लेकर नमामिंगे मिशन को सक्सेसफुली आप कैसे देखते हैं इसको रेट कितना करते हैं कि कितना बेहतर हुआ कितना बदलाव हुआ?
जवाब: मां गंगा के प्रति सबके मन में एक भावना है ये नदी नहीं है एक भावनात्मक रूप से हम सब लोग उसके साथ जुड़े हुए हैं. पांच राज्यों में से नदी पसार होती है और कई लाखों लोगों को उसमें से रोजगारी भी मिलती है. मगर यही जो गंगा किनारे के गांव है या इंडस्ट्री है उसके अंदर से जो उसको डस्टबिन बना दिया गया था आज तक सभी लोगों ने मैं किसी एक के ऊपर क्लेम नहीं कर सकता. पर उसको सफाई करने के लिए अभी तक हमारे मंत्रालय ने 211 एसटीपी बनाए हैं और जो भी नदी में गिरने वाला पानी और ट्रीट होकर जाए उस तरह की कोशिश कर रहे हैं. अभी हमने पांच राज्यों में से पसार होने वाली इस नदी को हमने ड्रोन से भी सर्वे किया कि अभी तक छोटा भी नाला अगर कहीं से आता हो तो उसको भी टैप करके वो पानी ट्रीट बिना ट्रीट के नदी में नहीं जाना चाहिए. उसके ऊपर हम काम कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में भी आपको पता है कि वहां की सरकार का सहयोग नहीं मिल रहा था. हमें एसटीवी बनाने के लिए जगह नहीं मिल रही थी. मैं अभी लास्ट वीक में मैं वहां के मुख्यमंत्री सुभेंद्र अधिकारी जी को मिला था और उन्होंने कहा कि हम जल्दी से ही वो जगह उपलब्ध करवा देंगे. तो वह भी एसटीपी बन जाएगा तो वह नदी का जो अभी जो हिस्सा पानी वहां गंदा जा रहा है वह भी बंद हो जाएगा. हमने सभी जो वहां पावर प्लांट है करीब 63 पावर प्लांट इस नदी के ऊपर है. उन सबको कहा है कि आपको टर्शरी ट्रीटेड वाटर यूज़ करना पड़ेगा. आप सीधा नदी में से पानी नहीं ले सकते. तो इस तरह से जो भी एक्शन लेना है उसके ऊपर हम काम कर रहे हैं. और मुझे विश्वास है कि माननीय प्रधानमंत्री मोदी साहब की ये योजना वो आने वाले दिनों में बिल्कुल सफल होगी. और मां गंगा बिल्कुल स्वच्छ हो जाएगी.
सवाल: क्लाइमेट चेंज जैसी चुनौती भी हमारे सामने है और इसी क्लाइमेट चेंज की वजह से कई जगह बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होती है तो कहीं पर सूखा होता है. तो जो हमारी जल नीति है वो इन दो चुनौतियों के लिए खुद को कैसे तैयार कर रही है?
जवाब: आपने जो कहा उसके पहले मैं आपको कहना चाहूंगा कि 6 सितंबर 2024 को माननीय प्रधानमंत्री मोदी साहब ने सूरत में एक वर्चुअल कार्यक्रम में आह्वान किया था. उन्होंने कहा था कि जल संचय जन भागीदारी से जन आंदोलन में परिवर्तित करना चाहिए. और साथ में यह भी कहा था कि कर्मभूमि से मातृभूमि के लिए पानी में सहयोग करना चाहिए. राजस्थान के जो व्यापारी सूरत में रहते हैं उन्होंने 400 स्ट्रक्चर राजस्थान में अपने पैसों से बनाए. 35,000 स्ट्रक्चर मध्य प्रदेश में बनाए और बिहार के 10 जिलों में हर गांव में चार स्ट्रक्चर बनाए. और मैं इससे आगे जाकर कहूंगा कि हमारा टारगेट था पहला टारगेट था 31 मई 2025 तक का 10 लाख स्ट्रक्चर बनाने का हम 27 लाख 50000 स्ट्रक्चर बना पाए हमने नया टारगेट लिया था 1 करोड़ का हम 1 करोड़ 55 लाख स्ट्रक्चर बना पाए जो लोगों के सहयोग के साथ और मनरेगा में से हम उसने भी सहयोग लेते हुए बनाए माननीय प्रधानमंत्री मोदी साहब ने कहा कि इतने लोग जो सहयोग सहयोग कर रहे हैं तो सरकार की ओर से भी कोई सहयोग होना चाहिए. उन्होंने मनरेगा के अंदर इसको समाविष्ट करते हुए कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह जी को निर्देश दिए थे और उसमें से भी सभी कलेक्टरों ने करीब 48 लाख ये स्ट्रक्चर वहां से भी बनाए हैं.
मैं मानता हूं कि जब तक हम जो पानी यूज़ करते हैं हम मानते हैं कि हमारा पानी हमारा अधिकार है. मगर ये अगर जमीन में से हम पानी निकालते हैं तो बहुत बड़ी समस्या करेंगे. क्योंकि हमारे यहां बारिश होती है 4000 बीसीएम हमारी आवश्यकता है 1120 बीसीएम की और 2047 तक हमारी आवश्यकता बढ़ेगी 1180 बीसीएम की. हमारे पास 65000 डैम होने के बावजूद नदी नाला सब मिलाकर हमारी जलसंच की कैपेसिटी सिर्फ 750 बीसीएम की है. हम जमीन में से पानी दोहन करते हैं. उसके कारण उसका स्तर नीचे जा रहा है. उसकी कॉलेट क्वालिटी बिगड़ रही है. तो इसी को ध्यान में रखते हुए माननीय प्रधानमंत्री मोदी साहब ने भी आह्वान किया और जल संचय के लिए जो लोगों ने सहयोग किया कि कैच द रेन रेन वाटर हार्वेस्टिंग इसके अंदर 1 करोड़ 55 लाख स्ट्रक्चर बने हैं. हमारे पहले 27 लाख स्ट्रक्चर में करीब 2.4 बीसीएम पानी जमीन में गया था. अभी हमने छह गुना स्ट्रक्चर बनाए हैं. मुझे लगता है हम 10 से 12 बीसीएम बारिश का पानी जमीन में उतार पाएंगे. तो यह समस्या जैसे हम डैम बनाते हैं तो डैम बनाने में 25 साल लगते हैं. 25000 करोड़ से ज्यादा पैसा लगता है. तो हमारे पास उतना टाइम नहीं है. और जो नदियों पर डैम बनने जैसी नदियां है वो सब बन गई है या अभी बन रहे हैं. तो नई नदियां अभी बहुत कम बची है कि जहां ऐसे डैम बन पाएंगे और डैम बनने के बाद हम कैनाल से पानी देते हैं तो कैनाल के अगल-बगल के गांव में या खेतों में तो पानी मिल जाता है.
मगर जहां दूर दरार के गांव हो या खेत हो वहां पानी नहीं मिलता. तो वहां पर अगर हम रेन वाटर हार्वेस्टिंग का उपयोग करते हैं तो उनको जो पानी की आवश्यकता है वह पानी उनको वहां पर मिल जाता है और इसीलिए जो शहर के लोग हैं उनको करीब पर हेड 125 लीटर पानी मिलता है. गांव में करीब 55 लीटर पर हेड पानी मिलता है. अगर एक छोटा घर है चार पांच लोग रहते हैं तो भी वो 300 लीटर पानी रोज का यूज़ करता है. हम वो एक साल में करीब पौने दो लाख लीटर पानी यूज़ कर लेगा और वो पानी अगर जमीन में डालेगा नहीं तो तो ऐसा होगा कि बैंक के वहां बैंक में हमारी जो एफडी होती है उसका हम इंटरेस्ट यूज़ करें जब तक तो एफडी आपकी सलामत है और जब हम एफडी तोड़ देंगे तो हमारे पास क्या बचेगा उसी तरह हम पानी जो हमारे पास स्टोर है वो हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए है वो पानी को हमें यूज़ करने का कोई अधिकार नहीं है इसीलिए हमने मां धरती माता से जो पानी पानी लिया है. उसको वापस डालने की जवाबदारी हमें लेनी पड़ेगी. हमारे घर से हमारे बंगला हो, अपार्टमेंट हो, ऑफिस हो, फैक्ट्री हो, वहां पर से कोई भी पानी बहकर बाहर नहीं जाना चाहिए और जमीन में ही उतारना चाहिए. उसी के लिए सब ने संकल्प अगर हम करेंगे तो पानी की बचत होगी और बहुत बड़ा काम उसके अंदर हो पाएगा.
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