Viksit Bharat Leadership Summit: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'विकसित भारत लीडरशिप समिट 2026' में केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शिरकत की. उन्होंने इस दौरान भारत की विकास यात्रा को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी. इसके अलावा बंगाल समेत अन्य राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव पर विस्तृत चर्चा की और हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया.
सवाल: 12 राज्यों में आपने चुनाव जिताए हैं और भी राज्यों में बहुत कुछ हुआ है. लेकिन अगर आंकड़ों के हिसाब से बात करें तो लगभग 12 राज्यों में आप जहां-जहां भी बतौर चुनाव प्रबंधक के रूप में गए आपने जिताए. सर क्या इसकी कोई रेसिपी है, इसकी कोई फार्मूला है?
जवाब: कोई एक व्यक्ति के कारण चुनाव नहीं जीता जाता है. 2014 के बाद भारत में जो भारतीय जनता पार्टी के चुनाव जीतने की प्रक्रिया शुरू हुई है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति लोगों का विश्वास है. और 12 वर्ष का आपने उल्लेख भी इसलिए किया है कि उन्होंने देश में लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का गौरव प्राप्त किया है. इन 12 वर्षों की यात्रा में प्रधानमंत्री जी ने अपनी लोकप्रियता, अपनी गरीब कल्याणकारी नीति, लोगों के साथ निरंतर संपर्क, संवाद और भारत में जो आत्मगौरव का भाव भरा है उसी के कारण भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीत रही है. प्रधानमंत्री जी की नेतृत्व के प्रति जो विश्वास है वही एकमात्र इसका कारण है.
सवाल: ऐसे कौन सा वो एक काम है, जिसकी वजह से देश की दिशा बदल गई हो?
जवाब: देश की जनता के प्रति ईमानदारी
सवाल: कोई ऐसे बड़े फैसले या ऐसा कोई बड़ा बिल
जवाब: फैसले ईमानदारी से लिए गए. सबसे पहले तो आप देखिए 2014 में उस समय के जो तत्कालीन प्रधानमंत्री जी की सरकार थी. यूपीए की सरकार थी. तो एक तो 12 साल में यूपीए ही नहीं रहा. जी मतलब नई फर्म आ गई इंडी गई. क्यों ऐसा हुआ? क्यों उनको 12 साल में अपना नाम बदलना पड़ा? क्योंकि यूपीए सरकार की जो पॉलिसी पैरालिसिस थी उसको 12 साल में प्रधानमंत्री जी ने खत्म करने का काम किया.
देश की जनता के हित में अगर आप देखेंगे तो हम एक संविधान एक विधान की बात करते थे लेकिन 370 को समाप्त नहीं करते थे. हम मजबूरी करा करते थे कि हम ₹100 ऊपर से बेचते हैं. ₹85 रास्ते में रह जाता है. लेकिन डीबीटी जैसी स्कीम को टेक्नोलॉजी का भी प्रभाव अभी आया है. मैं कहूं 2000 के पहले टेक्नोलॉजी थी तो यह व्यवहारिक नहीं होगा. लेकिन टेक्नोलॉजी आने के बाद उसका प्रशासन के लिए इस्तेमाल करना. ₹100 ऊपर से किसान सम्मान निधि में बेचना नीचे तक ₹100 जाना. अनेक ऐसी योजनाएं थी जो वर्षों से लंबित पड़ी थी जिसमें निर्णय नहीं होता था. अब ईआरसीपी योजना क्या थी? और बहुत पुरानी बात भी ना करें तो अशोक गहलोत जी मुख्यमंत्री थे. कमलनाथ जी मुख्यमंत्री थे. पर मध्य प्रदेश और राजस्थान का तो समझौता नहीं हुआ था. लेकिन जैसे ही भजन लाल जी आए, मोहन यादव जी आए तो ईआरसीपी योजना आज लागू हो गई. केन बेतवा लिंक योजना क्या थी.
आप देखिए कि हमारा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का एक बड़ा भूभाग जो परमानेंट सूखे का शिकार था. कितनी पुरानी योजना थी? लगभग 30 साल 30 35 साल पुरानी योजना थी. जी आप 12 वर्षों में राज्यों को साथ लेकर के अगर देखेंगे तो प्रगति जैसे पोर्टल के माध्यम से भारत सरकार ने 119 से ज्यादा तो बड़े प्रोजेक्ट्स थे जो केवल इसलिए लटके थे कि आपस में बात नहीं होती थी. टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके पीएम गति शक्ति जैसा पोर्टल लाया गया. हमारे मंत्रालय में परिवेश जैसा पोर्टल लाया गया. लेकिन ये सारी प्रगति करते हुए भी लक्ष्य क्या कि देश के गरीब का कल्याण हो. हम्. गरीब को राशन पहुंचे, गरीब के यहां शौचालय पहुंचे, गरीब के यहां आवास पहुंचे, गरीब के लिए मतलब जो सुविधाएं चाहिए, आयुष्मान जैसी सुविधा चाहिए, सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं हैं. यह नीचे तक पहुंचे.
जब हम जेंडर जस्टिस की बात करते हैं तो कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा का विषय है. मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक जैसे विषय हैं. महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए लखपति दीजिए जैसी मतलब लखपति आदमी शहर आकर नहीं बन सकता है. ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिला भी लखपति बन सकती है. ये ये शासन का सोच है. और फिर बिजनेस करने जाते थे तो लगता था कि हम बिजनेस करने जा रहे हैं या क्रिमिनल बनने जा रहे हैं. तो जन विश्वास बिल ला के जो डी्रिमलाइजेशन करने का काम किया. 59 लेबर कोड को एकीकृत करके जो चार लेबर कोड बनाने का काम किया. तो ईज ऑफ डूइंग का पैमाना हो, ई ऑफ लिविंग का पैमाना हो और सबसे बड़ी बात है कोई इंडस्ट्री में अगर घाटा पड़ता है तो हमने आईबीसी जैसा लॉ लाए कि भाई इंडस्ट्री को बंद मत करिए. उसके रेजोल्यूशन मैकेनिज्म को आगे बढ़ाइए. स्मार्ट सिटी बनाने की बात हो, आदर्श गांव बनाने की बात हो, इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की बात हो, मेडिकल शिक्षा को बढ़ाने की बात हो, भारत का निर्यात बढ़ाने की बात हो, विश्व में भारत का नेतृत्व की क्षमता बढ़ाने की बात हो और सबसे बड़ी बात फ्रिजाइल फाइव से हमारी इकॉनमी को निकालकर दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने का काम हो. यह 12 वर्ष के प्रधानमंत्री जी के संकल्प का प्रयास है.
सवाल: आपने एक बात कही कि यूपीए अब रहा ही नहीं और इंडी गठबंधन भी बिखरा हुआ है. एक बात कही जाती है कि पहले आप सिर्फ चुनाव में विपक्ष को हराते थे. अब जब चुनाव जीत के बीजेपी आती है तो विपक्ष को चित कर देती है. तो बात यह है कि पहले बीजेपी का यह नारा था कि कांग्रेस मुक्त भारत. अब ऐसा हो गया है कि विपक्ष मुक्त हो गया है. विपक्ष बचा ही नहीं है और उसमें बीजेपी की रणनीति है अलग-अलग तरीके से और आप भी जहां-जहां प्रभारी रहे जैसे महाराष्ट्र हुआ, बंगाल हुआ अब वहां विपक्ष रहा ही नहीं.
जवाब: नहीं पहली बात तो देखो लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष दोनों होते हैं. हम कोई अधिनायकवादी देश में नहीं है भाई. हम एक बहुदलीय व्यवस्था में शासन करते हैं और हमारे सांसद रहने के बाद जब हमारे पास 303 भी थे तो भी हमने अपने साथी गठबंधन के लोगों को नहीं छोड़ा क्योंकि भारतीय जनता पार्टी जब कहती है हम गठबंधन का धर्म मानते हैं. तो गठबंधन का धर्म मतलब सभी दलों के को साथ लेकर के चलना होता है. प्रधानमंत्री जी कई बार जो हम लोगों को एक मिशन वाक्य देते हैं कि हमें रीजनल एंबिशन और नेशनल एस्पिरेशन दोनों को साथ लेकर के चलना होता है. और ऐसा नहीं है. केरला में भी विपक्ष की सरकार है. तमिलनाडु में भी विपक्ष की सरकार है. तेलंगाना में भी विपक्ष की सरकार है. कर्नाटक में भी विपक्ष की सरकार है. पंजाब में भी विपक्ष की सरकार है. हम कहां किसी को रोक रहे हैं? कोई अपने कर्मों से जाएगा तो हम क्या करेंगे? हमें तो सरकार बनानी है.
सवाल: एक सबसे बड़ी उपलब्धि जैसा आपने लखपति दीदी का जिक्र किया एक बड़ी उपलब्धि वो है जिस पे अभी प्रधानमंत्री जी ने कहा कि मैं आंकड़े नहीं जुता पाया लेकिन मेरा प्रयास खत्म नहीं हुआ तो जब 20 जुलाई को सत्र आएगा मानसून तो क्या उम्मीद करें कि महिला आरक्षण और साथ में डीलिमिटेशन इस बार हो जाएगा?
जवाब: महिला आरक्षण पर तो सबसे बड़ा प्रश्न चिन्ह कांग्रेस की भूमिका पर है और कई बार क्या होता है इतिहास अपने आप को दोहराता है. आप ध्यान करो कि यह जब यूपीए के समय में यूपीए के गठबंधन के समय में यह लोग महिला आरक्षण बिल को लेकर के आए थे तब बिल किसने फाड़ा था राज्यसभा में? इन्हीं के गठबंधन के साथ ही राष्ट्रीय जनता दल के सांसद थे राजनीति प्रसाद. और 12:00 बजे इन्होंने फिर संसद का समय नहीं बढ़वाया और अब सब ने देखा कि महिला बिल को लटका दिया. जी तो किसने फाड़ा? इन्होंने ही फाड़ा. इन्होंने ही रोका. अब जब कंसेंस से बिल आया था और यह हुआ कि भाई वन थर्ड महिलाओं के लिए संख्या बढ़ाई जाए तो कैसे बढ़ेगी? कैसे बढ़ेगी? डीलिमिटेशन से बढ़ेगी. उस समय धोखा देने का काम यूपीए के नए अवतार इंडी ने किया.
मतलब कहते हैं ना कि नाम बदलने से व्यवहार और स्वभाव नहीं बदलता है. तो यह तो कांग्रेस को बताना पड़ेगा कि भाई वह ऐसा धोखा क्यों देते हैं और ऐसा नहीं है. मैं आपको बताऊं लंबे समय से कांग्रेस वालों ने डिमांड करी कि भाई जीएसटी लाओ जीएसटी लाओ. जब जीएसटी हम लेकर के आए तो बहिष्कार कांग्रेस ने किया. कांग्रेस के समय में कहा गया कि भाई ओबीसी के लिए कांग्रेस के सांसद कहा करते थे. जब मैं राज्यसभा सांसद था इनकी सरकार थी कि ओबीसी कमीशन आना चाहिए. ओबीसी कमीशन की जब पार्लियामेंट्री कमेटी की रिपोर्ट बनी तो ढसेंट नोट कांग्रेस ने दिया.
कांग्रेस के लोग कहते थे कि महिलाओं को समान न्याय दो. समान न्याय दो और महिलाओं को समान न्याय की बात करी. जब तीन तलाक आया तो कांग्रेस भाग के खड़ी हो गई. कांग्रेस के लोग कहा करते थे कि राजीव राहुल क्या राजीव जी कंप्यूटर क्रांति के जनक हैं. जब कंप्यूटर क्रांति के हिसाब से वफ बोर्ड का डिजिटलाइजेशन करा रिकॉर्ड का तो कांग्रेस भाग के खड़ी हो गई. कांग्रेस के समय की रिपोर्ट है कि नया संसद भवन बनना चाहिए. जब नया संसद भवन बना तो बहिष्कार करके कांग्रेस चली गई. और सबसे बड़ी बात है कांग्रेस जो हमको कहती है हमारा तो गठबंधन का धर्म है. हम अपने गठबंधन धर्म में हम 303 लाए तो भी अपने सदस्यों को साथ रखा. आज जब इनके गठबंधन के साथी डीएमके हारे तो सबसे पहले उनको छोड़ के कांग्रेस भाग गई. लेटेस्ट उदाहरण है. चुनाव किसी के साथ लड़े और सरकार किसी के साथ बनाई. अब यह तो इनसे पूछो भाई इनकी नीति नियत दर्शन क्या है?
सवाल: अब तो डीएमके के कुछ सांसद कह रहे हैं कि इस सत्र में आपको बाहर से सहयोग करेंगे महिला आरक्षण में?
जवाब: हमें तो पूरा देश सहयोग कर रहा है. तीन चुनाव से देश आशीर्वाद दे रहा है. आज के दुनिया के इस दौर में जब लोकतांत्रिक नेता दो से तीन चुनाव नहीं जा पाते. ऐसे में लोकतांत्रिक रूप से एडमिनिस्ट्रेटिव हेड रहना 25 साल और उसमें 12 साल भारत के लोकतंत्र के सबसे लंबे प्रधानमंत्री रहना ये प्रधानमंत्री जी की लोकतंत्र के प्रति विश्वास जनप्रियता और मैंने फिर कहा है ईमानदारी से शासन.
सवाल: विपक्ष ने यह कह रहा है कि सेंसस कराइए नया. जब पहला बिल इंट्रोड्यूस हुआ था उसमें 2036 तक महिला आरक्षण को लागू करने इंक्लूडिंग 2026 का सेंसस प्लस डीलिमिटेशन की बात कही थी. तो बीजेपी को जल्दी क्यों है? तो आरोप यह है कि डीलिमिटेशन करके आप 10 साल ऐसा डीलिमिटेशन कर देंगे कि 10 साल आप देश पर राज करें और कांग्रेस बाहर रहे, पूरा विपक्ष बाहर रहे और नए सेंसस से ओबीसी और एससी के नए आंकड़े आएंगे. आपको आरक्षण में बदलाव करना होगा. किस तरह के आरोप आप पर हैं?
जवाब: जल्दी नहीं करने के चक्कर में तो उन्होंने 70 साल तक देश को पीछे रखा है. देश अब 2047 तक विकसित भारत बनना चाहता है और विकसित भारत के लिए रिफॉर्म और रिफॉर्म के लिए तुरंत निर्णय है. ये अनिर्णय की स्थिति नहीं तो 10 साल निकाल दिए. देश अनिर्णय में नहीं चल सकता है. इसलिए कोई ना कोई तकनीकी कारण निकालने से बात नहीं बन सकती. पहले वह तय करें भई आपने महिला आरक्षण को समर्थन दिया था. महिला आरक्षण लाने के लिए आज 1/3 सीट बढ़ाने की बात हुई, आप पीछे क्यों हट रहे हैं?
सवाल: ये जो ग्रेटर निकोबार आइलैंड का जो इशू है जिसको लेकर तमाम तरीके की बातें हैं और पक्ष विपक्ष सबको हमने सुना. मैं ये पूरा मसला समझना चाहती हूं और पर्यावरण मंत्री क्या सोचते हैं वो जानना चाहती हूं.
जवाब: किसी भी क्षेत्र में अगर हम एनवायरमेंट क्लीयरेंस को देते हैं तो हम हमेशा चार चीजों का ध्यान रखते हैं. पहला वाइल्ड लाइफ वहां की कैसे प्रभावित होती है? दूसरा एनवायरमेंट क्लीयरेंस के जो नॉर्म्स हैं, पब्लिक हियरिंग है, उनको कैसे पालन किया जाता है. तीसरा फॉरेस्ट क्लीयरेंस के नियमों का पालन किया गया या नहीं किया गया है और चौथा सीआरजेट के जो लॉ है उनका पालन किया गया नहीं किया गया. इसके संबंध में एक पूरी प्रक्रिया बनी हुई है. लंबे समय से इस बात की डिमांड की जा रही थी कि भारत के पूर्वी भाग में निकोबार में अगर कोई बंदरगाह बनता है तो हमारे सामरिक राष्ट्रीय सुरक्षा नीति देश के व्यापार विकास के लिए जरूरी है. इस परियोजनाओं का पूरा पर्यावरणीय अध्ययन करने के बाद जो नॉर्म्स हैं उसके आधार पर हमने इसको स्वीकृति प्रदान करी है. लोग इसको लेकर के कोर्ट में भी गए थे. कोर्ट ने भी इस पर एक न्यायसंगत निर्णय दिया है. हम न्यायालय की जो कानूनी प्रक्रिया है उसका पूरा पालन करेंगे. यह पहला विषय है. दूसरा विषय है टोटल अंडमान निकोबार में की जो लैंड है उसका केवल 1.78% ही इसमें यूज़ हो रहा है. और उसमें भी 1/3 तो फॉरेस्ट है ही नहीं. रेवेन्यू लैंड है और क्या भारत को अपनी सुरक्षा के लिए कहीं पर 1% जमीन पर भी बंदरगाह बनाने का अधिकार नहीं है?
जो ट्राइबल्स, जो स्पीशीज हैं वो तो स्कूबा ड्राइविंग करने से भी डिस्टर्ब होती हैं. तो क्यों करी राहुल गांधी ने स्कूबा डाइविंग? स्पीशीज तो डिस्टर्ब होती हैं. जब भी कोई बाहर से आदमी आएगा तो लोकल स्पीशीज तो डिस्टर्ब होंगी. हम क्यों करी? जैसे हम लोग मतलब अपनेपने लोगों के धारणाएं नियम होते हैं. जी डिस्टर्ब नहीं करना चाहते. कई लोग इस तरह के मूवमेंट चलाते हैं. और एक बात बताइए जब इंदिरा जी की मूर्ति लगानी थी तब अंडमान निकोबार डिस्टर्ब नहीं हुआ. जब एयर स्ट्रिप बनानी थी आज भारत की वायु सेना के लिए एयर स्ट्रिप बनाएंगे तो डिस्टर्ब हो गए. मैं एक बात पर्यावरण मंत्री के नाते कहना चाहता हूं. देखिए इस देश में फॉरेस्ट एरिया था. कांग्रेस के लोग किसी भी इकोसेंसिटिव जोन का नोटिफिकेशन नहीं करते थे. इन्होंने 70 साल में 24 इकोसेंसिव जोन के नोटिफिकेशन किए. हमने 12 साल में इनकी संख्या बढ़ाकर 309 कर दी.
देश में इतनी सारी झीलें थी. कांग्रेस के राज में इसको किसी को अवेयर नहीं करते थे. इन्होंने 2014 तक केवल 26 जिले रामसर साइट में करी. हमने 12 साल में उनकी संख्या बढ़ाकर 100 कर दी. जी. इनके समय में प्रोटेक्टेड एरिया नहीं होते थे. हमने उनकी संख्या बढ़ाकर 509 कर दी. कांग्रेस वाले कहते हैं मैं बुरा नहीं मानता. इंदिरा जी के समय में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी बनी थी. पर इनके समय में 47 टाइगर रिजर्व थे. हमने 12 साल में उनकी संख्या बढ़ाकर 58 कर दी. भारत में जो सबसे बड़ा जो खतरा था और पूरे दुनिया में खतरा है. कि लगभग 350 मिलियन हेक्टेयर जमीन जो थी वो आज बंजर हो रही है. प्रधानमंत्री जी ने 2019 में कॉप 14 में हमें कहा कि भारत 26 मिलियन हेक्टेयर के लक्ष्य को प्राप्त करेगा. हमने अभी 22 मिलियन हेक्टेयर सेकंड प्रोग्रेस रिपोर्ट हमने प्रस्तुत करी है. तो हम इकोलॉजी के पूरे प्रोटेक्शन में लगे हुए हैं. हम प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफेंट, प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, प्रोजेक्ट चीता, प्रोजेक्ट लायन हम इन सबको लेकर के काम कर रहे हैं.
हम एक पेड़ मां के नाम अभियान जैसा चला रहे हैं. हम सर्कुलर इकॉनमी में मिशन लाइफ चला रहे हैं. तो हम तो एनवायरमेंटल नॉर्म्स पर सबसे ज्यादा समर्पित रहने वाली सरकार के रूप में कार्य कर रहे हैं. मैं उनको कहता हूं आइए देश भी सुरक्षित करें, देश की सीमा भी सुरक्षित करें, इकोलॉजी भी सुरक्षित करें और इकोनमी को भी बढ़ाएं. अब इसमें भी उनको आपत्ति है.
सवाल: जब भी जैसे ये इतना बड़ा प्रोजेक्ट है जिस पे बहुत कुछ बनने वाला है कंस्ट्रक्शन तो क्या वहां की ट्राइब्स से आप लोगों ने चर्चा की?
जवाब: वहां के सारे जो नॉर्म्स हैं उनको पूरा किया गया. बहुत कुछ नहीं बनने वाला है. केवल 1.78% पे भारत के लिए सुरक्षा के लिए सामरिक के लिए व्यापारिक के लिए जो पोर्ट बनेगा भारत सरकार का बनेगा उसमें भी ग्रीन एरिया रहने वाला है. ऐसा नहीं होगा कि किसी भी प्रकार से है और इसके जो नॉर्म्स हैं, उसका तो पूरा पालन होगा. अब मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग इसको देख रही है. मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग उसके सारे नॉर्म्स को करेगी और ये मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग का ही प्रोजेक्ट है.
सवाल: जब बार-बार सामरिक और सुरक्षा की बात आती है. स्ट्रेटेजिक मैंने कई जगह पढ़ा तो स्ट्रेटेजिक बात है. तो मुझे लगता है अभी जो देश में हालात हैं वेस्ट एशिया में आज स्टेट ऑफ हॉर्मोंस की वजह से बड़ी-बड़ी जो इकॉनमी है या देश हैं उनको झुकना पड़ा है. तो क्या भारत के लिए भी स्टेट ऑफ मलक्का स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस का कभी काम कर सकता है?
जवाब: निश्चित रूप से हमारा जो नीचे तक पूरा पेसिफिक तक का जो समुद्री क्षेत्र है, उसमें भारत की सामरिक आवश्यकता है और जो इससे संबंधित लोग हैं, वह इसका पर्याप्त जवाब देंगे. मैंने पहले भी कहा है, मैंने अब भी कहा है. मैं तो आपको यह कहना चाहता हूं कि यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि कांग्रेस के पास पॉलिसी लेवल पे कोई विषय नहीं है. जेंडर जस्टिस और जेंडर इक्वलिटी पे कोई दिशा नहीं है. रूरल डेवलपमेंट पे कोई विज़न नहीं है. नॉन इशू को इशू बना करके चलने के काम से ही तो वो नहीं आ पा रहे.
सवाल: आप एनडीए सरकार के बहुत इंपॉर्टेंट विभाग के मंत्री हैं. कभी आपको सिर्फ चुनौती लगती है कि एक तरफ तो सिर्फ विकास का एजेंडा है. भारतीय जनता पार्टी जिस राज्य में भी जाती है विकास की बात करती है. आपने भी बहुत सारी बात बताई. लेकिन दूसरी तरफ पर्यावरण को बचाना. मैं कुछ बातें कहूं. वापस हम सितंबर की ओर बढ़ रहे हैं. जहां दिल्ली एनसीआर ये बार-बार बात करेगा कि यमुना साफ हुई क्या? हवा साफ नहीं है. बार-बार पूरी दुनिया कैपिटल न्यू दिल्ली को ये बात करती है. दूसरी तरफ विकास की चुनौती है. तीसरी तरफ आपने अरावली को ग्रीन बेल्ट के लिए भी वो काम लगातार चल रहा है. आपको लगता है ये बैलेंस बहुत डिफिकल्ट है विकास और पर्यावरण के बीच में बनाना?
जवाब: सब मिलकर के सहयोग करें तो कोई दिक्कत नहीं है. सब सहयोग करें इसके लिए हम प्रयास करते रहते हैं.
सवाल: देखिए हम जब बड़ी जमीन की बात करते हैं कि सबसे ज्यादा आर्मी के पास है या रेलवेज के पास है. फिर हम फॉरेस्ट की बात करते हैं तो अगर कोई बिल्डिंग भी बनती है तो भी पर्यावरण को नुकसान होता है. तो फिर मैं समझना चाहूंगी जो हमारा टारगेट है नेट जीरो का वो कैसे पूरा होगा सर?
जवाब: सवाल नुकसान का नहीं है. जी भारत नेट ज़ीरो की एक योजना बनाई है. जी और नेट जीरो 2070 का हमने लक्ष्य किया है. दुनिया को जो पहला नुकसान है वह जो एनर्जी सोर्स के लिए जो हम लोग अह रिसोर्स का इस्तेमाल करते हैं और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के कारण जो कार्बन स्पेस को हम घेरते हैं उसमें कैसे ग्रीन टेक्नोलॉजी को लाया जाए वो पहला विषय है. जी दूसरा हमारे जो भविष्य के बनने वाले शहर हैं वो ज्यादा ग्रीन हो और एनर्जी को कम कंज्यूम करें उसके लिए क्या किया जाए तीसरा जो हमारे यातायात के साधन हैं उनमें उनसे जो कार्बन एमिशन होता है उसको कैसे कम किया जाए चौथा जो बायोडायवर्सिटी का जो एक तरीके से इमंबैलेंस है उसको कैसे बचाने का काम किया जाए और पांचवा भी एक विषय है कि धरती का जो बंजरीकरण हो रहा है, डेजर्टिफिकेशन हो रहा है. अब मैं आपको बताना चाहूंगा कि जहां तक एनर्जी सोर्स की बात है, आपने खुद ने अभी इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की जो रिपोर्ट आई है, कि हम फॉसिल फ्यूल की जगह जो ग्रीन एनर्जी सोलर एनर्जी पे जा रहे हैं. प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमने इंटरनेशनल सोलर अलायंस जो बनाया है तो आप यह देखेंगे कि उसके कारण आज हम अपनी क्षमता का 50% रिन्यूएबल एनर्जी से ले रहे हैं. यह 10 सालों की उपलब्धि है. ठीक है?
स्मार्ट सिटी को हम बना रहे हैं. आप मेट्रो के विस्तार की तुलना देखिए. आप BS4, BS6 व्हीकल को देखिए. आप ईवी व्हीकल को देखिए. इसमें हम कैसे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. हम सॉलिड वेस्ट वेस्ट मैनेजमेंट रूल को लेकर आगे बढ़ रहे हैं. हम कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलेशन रूल्स को लेकर के आगे बढ़ रहे हैं. हम सर्कुलर इकॉनमी में ई वेस्ट से लेकर काफी सारी चीजों को लेकर के आगे बढ़ रहे हैं. स्मार्ट सिटी में तीसरा अगर आप बायोडायवर्सिटी लॉस को भी देखेंगे तो हमने देश में ढाई लाख गांवों में बायोडायवर्सिटी रजिस्टर बनाने का काम किया है. उसके साथ ही साथ डेजर्टिफिकेशन को लेकर अभी हमने जो रिसेंटली जो प्रोग्रेस रिपोर्ट हमने दी है कि भारत ने जो 26 मिलियन हेक्टेयर जमीन के बारे में लक्ष्य तय किया था उसमें 21.75 मिलियन हेक्टेयर जमीन को हम वापस से डेजर्टिफिकेशन से रेस्टोर कर पाए हैं. हम प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना है ना उसके बाद अमृत सरोवर योजना वाटर बॉडी मैनेजमेंट अपने जो नेचुरल रिसोर्सेज हैं उसकी जिओ टैगिंग उन सारे काम को हम कर रहे हैं और इसलिए समग्र रूप से जो हमने नेट जीरो के 2070 का लक्ष्य रखा है उसमें होल ऑफ द गवर्नमेंट अप्रोच को लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं.
सवाल: आप खुद भी इलेक्ट्रिक गाड़ी का ही इस्तेमाल करते हैं. यहां बैठे सभी लोगों को अगर आपको एक कोई टिप देनी हो कि कैसे हम खुद खुद भी कोऑपरेट करें एनवायरमेंट के लिए तो क्या करना चाहिए? एक ऐसा काम जो हम सब करें तो शायद 10 साल बाद कुछ बेहतर हो पाए.
जवाब: प्रधानमंत्री जी ने जो मिशन लाइफ का लक्ष्य दिया है. उसका पहला डायमेंशन है सेव एनर्जी. दूसरा डायमेंशन है सेव फूड. तीसरा डायमेंशन है सेव वाटर. चौथा है ई वेस्ट रेस्ट्रिक्शन. पांचवा है सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट. छठा है बैन ऑफ सिंगल यूज़ प्लास्टिक. और सातवां है हेल्दी लाइफस्टाई. ये सात बातें अपने जीवन में जितनी अपना लें तो एनवायरमेंट सुधर जाएगा. और एक पेड़ मां के नाम अभियान में सब धरती माता के प्रति और अपने मां के प्रति कृतज्ञता ग्रेटट्यूड के लिए एक पेड़ मां के नाम जरूर लगाएं.
सवाल: एक इंपॉर्टेंट बात मैं आप लोगों से साझा करना चाहती हूं. बड़ी उपलब्धि के तौर पर है. सर अलवर से आते हैं और सिरस्का टाइगर रीलोकेशन के 18 साल पूरे हुए हैं. मुझे याद है एक समय ऐसा था. मैंने कई बार कवर भी किया जब एक भी टाइगर नहीं था. रणथम बोर्ड से एक टाइगर को सिरस्का में लाया गया और उसके बाद ऐसे कई प्रयोग फिर बाद में हुए सर. आज 52 टाइगर हैं सर. कैसे सर इस उपलब्धि को देखते हैं?
जवाब: 12 साल की उपलब्धि है.
सवाल: राजस्थान में अच्छी सरकार चल रही है. जब-जब भी कभी लोकसभा स्पीकर आप और भजन लाल जी एक साथ बैठते हैं तो ये चर्चा बहुत तेजी से राजस्थान में उठती है जैसे कल भी हुई कि कुछ बड़ा डेवलपमेंट राजस्थान में होने वाला है.
जवाब: हम तो आज से नहीं बैठ रहे हैं. बैठने के 25 साल हो गए हैं. तो, हो सकता है हम 25 साल का दोस्ती का साथ बैठे हैं इसलिए बैठ गए हो. सब आराम से चल रहा है. जी. देश माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है.
समापन: आप भारत का पर्यावरण भी बचाएं इस बात की उम्मीद है और आपने भारतीय जनता पार्टी का पर्यावरण भी बचाया है. इसके लिए भी बहुत-बहुत बधाई सर. आज जुड़ने के लिए थैंक यू सर.