27 दिन तक रखा 'डिजिटल अरेस्ट'... उत्तराखंड में साइबर ठगों ने महिला को लगाया चूना, ऐंठ लिए 1.20 करोड़

साइबर अपराध एक गंभीर चुनौती बन चुका है और इसकी शिकार हो रही हैं आम जनता. हाल ही में अल्मोड़ा की एक महिला से जुड़ी घटना ने साइबर ठगी के एक नए आयाम को उजागर किया है.

Uttarakhand Almora woman kept under digital arrest for 27 days for cyber fraud
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साइबर अपराध एक गंभीर चुनौती बन चुका है और इसकी शिकार हो रही हैं आम जनता. हाल ही में अल्मोड़ा की एक महिला से जुड़ी घटना ने साइबर ठगी के एक नए आयाम को उजागर किया है. ठगों ने महिला को 27 दिनों तक "डिजिटल अरेस्ट" कर 1.20 करोड़ रुपये की ठगी की. यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि साइबर अपराधी किस हद तक झूठ बोलकर और डर दिखाकर अपने शिकार को निशाना बना सकते हैं.

किस तरह हुआ डिजिटल अरेस्ट?

यह अजीबो-गरीब घटना 11 दिसंबर 2025 से शुरू हुई, जब अल्मोड़ा की महिला को एक व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकी दी गई. कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को टेलीकाम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया और कहा कि महिला के बैंक अकाउंट पर संदिग्ध लेन-देन हो रहा है. उसने बताया कि उनकी बैंक जानकारी के आधार पर एक जांच चल रही है और उनकी गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' किया गया है.

उसके बाद ठगों ने महिला से यह भी कहा कि जांच के दौरान किसी से भी संपर्क नहीं करना होगा, नहीं तो गिरफ्तारी का सामना करना पड़ेगा. डर के चलते महिला ने अपनी पूरी जमा पूंजी साइबर ठगों के बताए हुए खाते में ट्रांसफर कर दी. इस तरह से साइबर ठगों ने महिला से 1.20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली.

महिला को कैसे हुआ एहसास?

साइबर ठगों ने महिला पर इतना दबाव डाला कि उसने इस बात को किसी से भी साझा नहीं किया. ठगों ने 11 दिसंबर से लेकर 6 जनवरी तक लगातार महिला से संपर्क बनाए रखा. वे उसकी मानसिक स्थिति पर इस कदर असर डालने में सफल रहे कि वह पूरी तरह से उनके प्रभाव में आ गई. ठगी के बाद महिला को जब किसी से संपर्क नहीं हो पाया, तब जाकर उसे अपनी गड़बड़ी का एहसास हुआ.

साइबर ठगी के तरीके और जागरूकता अभियान

यह घटना यह दिखाती है कि साइबर अपराधियों के नए तरीके लगातार सामने आ रहे हैं. चाहे जागरूकता अभियान कितना भी क्यों न चलाया जाए, लेकिन इन ठगों के तरीकों में लगातार बदलाव और नई रणनीतियों से मुकाबला करना काफी मुश्किल होता है. हालांकि पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन साइबर अपराध की घटनाओं का बढ़ना कहीं न कहीं जागरूकता अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है.

साइबर ठगों के खिलाफ एफआईआर

साइबर क्राइम पुलिस ने इस गंभीर मामले में तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है. अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ प्राथमिकी पंजीकृत कर जांच प्रक्रिया की शुरुआत कर दी गई है. पुलिस ने भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है, ताकि साइबर अपराधियों को जल्द पकड़ा जा सके.

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