F-15 से लेकर A-10 थंडरबोल्ट तक... ईरानी हमले में अमेरिका को भारी नुकसान, 9 फाइटर जेट हुए तबाह

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. अब मामला सिर्फ मिसाइल हमलों और सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर समुद्री रास्तों और दुनिया के तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है.

US suffers heavy losses in Iranian attack On Jordan 9 fighter jets destroyed
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. अब मामला सिर्फ मिसाइल हमलों और सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर समुद्री रास्तों और दुनिया के तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है. जॉर्डन के आसमान से लेकर होर्मुज स्ट्रेट तक दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ रहा है. ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है, वहीं अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की है. इस बीच कई कमर्शियल जहाज भी हमलों की चपेट में आए हैं और तेल की कीमतों में तेजी आई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार शाम जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी एयरबेस को निशाना बनाकर ईरान की ओर से मिसाइलें दागी गईं. अमेरिकी नेटवर्क सीबीएस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि हमले में 8 एफ-15 लड़ाकू विमानों को मामूली नुकसान हुआ. वहीं, 1 ए-10 थंडरबोल्ट विमान को ज्यादा नुकसान पहुंचा और उसका एक पंख टूट गया. हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, क्षतिग्रस्त एफ-15 विमानों को दोबारा सेवा में शामिल कर लिया गया है.

हमले में कोई घायल नहीं हुआ

जॉर्डन की सेना के मुताबिक, ईरान की ओर से कुल 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं. इनमें से 18 मिसाइलों को जॉर्डन की एयर डिफेंस सिस्टम ने रास्ते में ही रोक दिया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं. जॉर्डन ने कहा कि हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है. वहीं, रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए 30 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें दागीं.

ईरान ने किया नुकसान का दावा

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के अजराक इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया. ईरान के मुताबिक, इन हमलों में एफ-35, एफ-16 और एफ-15 लड़ाकू विमानों की तैनाती और रखरखाव से जुड़े हैंगर और विमानों के लिए बनाए गए शेल्टर को निशाना बनाया गया. ईरान ने इन जगहों पर भारी नुकसान होने का भी दावा किया है. हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने ईरान के इन दावों की पूरी तरह पुष्टि नहीं की है.

तेल बाजार पर भी पड़ा असर

अब इस तनाव का एक बड़ा केंद्र होर्मुज स्ट्रेट बन गया है. ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका ने उसके पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास 10 जहाजों पर हमला किया. हालांकि, अमेरिकी सेंटकॉम ने अपने युद्धपोतों को निशाना बनाए जाने के ईरानी दावे को पूरी तरह गलत बताया है.

इस पूरी स्थिति का असर दुनिया के तेल बाजार पर भी पड़ा है. लड़ाई बढ़ने की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और ब्रेंट क्रूड की कीमत जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई.

एक नाविक की मौत की खबर

अगर तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में इसका असर पेट्रोल-डीजल और दूसरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है. समुद्री रास्तों पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. दुबई के पास एक तेल टैंकर से जुड़ी घटना में एक नाविक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य अभी भी लापता बताया जा रहा है. वहीं, इराकी जलक्षेत्र में एक दूसरे तेल टैंकर पर ड्रोन से हमला हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई. सुरक्षा कारणों से कई कमर्शियल जहाजों को अपनी आवाजाही रोकनी पड़ी.

इसी बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी दबाव बढ़ गया है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने करीब 20 साल बाद ईरान के परमाणु मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक भेजने का फैसला किया है. इस प्रस्ताव के पक्ष में 23 देशों ने वोट किया, जबकि रूस, चीन और नाइजर ने इसका विरोध किया.

ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब जॉर्डन, खाड़ी के समुद्री रास्तों, वैश्विक तेल बाजार और ईरान के परमाणु मुद्दे तक पहुंच चुका है.