US-Iran Tension: पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चा तेज हो रही है, तो दूसरी ओर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और समझौते की संभावना बनी हुई है. हालांकि दूसरी तरफ ईरान अब भी अमेरिकी प्रस्ताव पर खुलकर सहमत नजर नहीं आ रहा है.
इसी बीच इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में बड़ा एयर स्ट्राइक कर एक बार फिर पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब कुछ सप्ताह पहले सीजफायर की घोषणा की गई थी. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद फिर कमजोर पड़ रही है.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या चल रही है बातचीत?
अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित 14-पॉइंट समझौते की चर्चा इन दिनों तेज हो गई है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दोनों देशों के बीच एक छोटा मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) तैयार किया जा सकता है, जो आगे चलकर बड़े समझौते की नींव बनेगा.
हालांकि अब तक इस प्रस्ताव को सार्वजनिक नहीं किया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह एक पेज का प्रारंभिक समझौता हो सकता है, जिसके जरिए दोनों पक्ष आगे की विस्तृत बातचीत के लिए रास्ता तैयार करेंगे. लेकिन अभी भी कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं.
ईरान की ओर से इन रिपोर्ट्स को लेकर सतर्क प्रतिक्रिया दी गई है और कई नेताओं ने इसे अमेरिका की रणनीतिक मांगों की सूची करार दिया है.
ट्रंप के बदले-बदले बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पिछले 24 घंटों में ईरान के साथ बातचीत “काफी अच्छी” रही है और समझौते की संभावना मौजूद है.
लेकिन इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सख्त चेतावनी भी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर ईरान अमेरिकी प्रस्ताव को नहीं मानता, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई और बमबारी का रास्ता अपना सकता है.
यानी एक तरफ अमेरिका बातचीत और समझौते की बात कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति भी जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यही दोहरी नीति पूरे मामले को और अधिक जटिल बना रही है.
क्या हो सकता है समझौते का आधार?
मध्यस्थता से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अगर शुरुआती मेमोरेंडम पर सहमति बनती है तो उसके बाद करीब 30 दिनों तक विस्तृत वार्ता हो सकती है. बातचीत में तीन प्रमुख मुद्दों को सबसे अहम माना जा रहा है.
1. होर्मुज में आवाजाही सामान्य करना
पिछले कई महीनों से होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल टैंकरों और जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. अमेरिका चाहता है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य बनाया जाए.
2. ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत
ईरान लगातार मांग कर रहा है कि अमेरिका उसके ऊपर लगाए गए आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को हटाए. माना जा रहा है कि बातचीत का यह सबसे अहम और संवेदनशील मुद्दा है.
3. परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कुछ सीमाएं स्वीकार करे और अंतरराष्ट्रीय निगरानी को लेकर सहमति दे.
हालांकि मिसाइल कार्यक्रम और मध्य पूर्व में ईरान समर्थित संगठनों की भूमिका जैसे मुद्दों पर अब भी स्पष्ट सहमति नहीं बन सकी है.
ईरान का क्या है रुख?
ईरानी नेताओं ने अमेरिकी प्रस्ताव को लेकर खुलकर संदेह जताया है. ईरान की संसद की विदेशी मामलों की समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने इस प्रस्ताव को “अमेरिका की विशलिस्ट” बताया.
ईरान का कहना है कि वह किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को कमजोर करे. वहीं तेहरान यह भी चाहता है कि अमेरिका पहले प्रतिबंधों में राहत दे, तभी आगे की बातचीत सार्थक हो सकती है.
तेल बाजार पर दिखा असर
अमेरिका-ईरान समझौते की संभावनाओं का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दिया. रिपोर्ट्स के अनुसार, खबर सामने आने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 11 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई.
हालांकि बाद में कीमतों में कुछ सुधार देखा गया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव कम होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई सामान्य हो सकती है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को स्थिरता मिल सकती है.
सीजफायर के बावजूद बेरूत पर हमला
इस बीच इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दहियेह इलाके पर बड़ा एयर स्ट्राइक कर हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हमला रात करीब 8 बजे किया गया और इसमें हिजबुल्लाह के रदवान फोर्स के एक कमांडर को निशाना बनाया गया.
बताया जा रहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुद इस कार्रवाई को मंजूरी दी थी. हमले के बाद इलाके में भारी तबाही देखी गई और एक इमारत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई.
अब तक हिजबुल्लाह की ओर से इस हमले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका फिर तेज हो गई है.
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