Donald Trump Vs Lisa Cook: अमेरिका की न्यायपालिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक निर्णायक झटका दिया है. अपीलीय अदालत ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक को पद से हटाने की प्रक्रिया को खारिज कर दिया. कोर्ट के फैसले के बाद कुक अब भी फेड की नीति-निर्धारण बैठकों में भाग लेने और निर्णयों में भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह अधिकृत बनी रहेंगी.
यह फैसला उस वक्त आया है जब अमेरिका के आर्थिक हालात, ब्याज दरों में संभावित बदलाव और राजनीतिक माहौल पहले से ही संवेदनशील स्थिति में हैं. लिसा कुक को हटाने की कोशिश को कई हलकों में राजनीतिक दबाव और संस्थागत स्वतंत्रता पर हमला माना जा रहा था.
ट्रंप का आरोप और कानूनी तकरार
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2025 में लिसा कुक पर मॉर्गेज फ्रॉड का आरोप लगाते हुए उन्हें फेडरल रिजर्व से हटाने की सिफारिश की थी. आरोपों के मुताबिक, कुक ने अपने आवास ऋण के लिए संपत्ति से जुड़े विवरणों में कथित हेरफेर की थी ताकि वे कम ब्याज दर और अधिक क्रेडिट स्कोर का लाभ उठा सकें.
ट्रंप समर्थक विलियम पुल्टे द्वारा लगाए गए इन आरोपों को कुक ने पूरी तरह राजनीतिक साजिश करार दिया. उनका कहना था कि यह हमला उनके विचारों और नीतिगत मतभेदों को लेकर किया गया है, न कि किसी वास्तविक उल्लंघन के कारण.
"न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन"
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपों का संबंध कुक की फेडरल गवर्नर नियुक्ति से पहले का है. उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया, जो न्यायिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के खिलाफ है. राष्ट्रपति के पास किसी भी अधिकारी को हटाने का अधिकार असीमित नहीं है, खासकर जब मामला संवैधानिक संस्थानों की स्वायत्तता से जुड़ा हो.
एक ऐतिहासिक और योग्य नियुक्ति
लिसा कुक का नाम अमेरिकी इतिहास में इसलिए भी खास है क्योंकि वे फेडरल रिजर्व की पहली अश्वेत महिला गवर्नर हैं. उनकी नियुक्ति मई 2022 में हुई थी. वे एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री हैं, जो ट्रूमैन स्कॉलर, मार्शल स्कॉलर और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट रह चुकी हैं. 1997 में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से अर्थशास्त्र में पीएचडी हासिल की थी. उनकी विशेषज्ञता विकासशील अर्थव्यवस्था, वित्तीय समावेशन और नवाचार की आर्थिक नीतियों पर केंद्रित रही है.
आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव
ट्रंप प्रशासन की यह कोशिश ऐसे समय पर हुई जब फेडरल रिजर्व की नीति बैठक में ब्याज दरों में संभावित कटौती पर विचार होना है. यदि कुक को हटाया जाता, तो यह फेड की नीतिगत दिशा और वैश्विक वित्तीय बाजारों पर असर डाल सकता था.
ट्रंप की कानूनी टीम ने तर्क दिया था कि राष्ट्रपति के पास ऐसे फैसलों में व्यापक अधिकार हैं, और अदालतों को इन मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. लेकिन अदालत ने यह दलील अस्वीकार करते हुए संस्थागत स्वतंत्रता और प्रक्रिया के पालन को सर्वोपरि माना.
यह भी पढ़ें- राजनीतिक दलों को महिलाओं की सुरक्षा से छूट? जानिए POSH एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय