Passport Index 2026: किसी भी देश का पासपोर्ट यह तय करता है कि उसके नागरिक दुनिया के कितने देशों में आसानी से यात्रा कर सकते हैं. इसी आधार पर Henley Passport Index हर साल अलग-अलग देशों के पासपोर्ट की ताकत का आकलन करता है. इस इंडेक्स में यह देखा जाता है कि किसी देश के नागरिक कितने देशों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल के साथ यात्रा कर सकते हैं. साल 2026 की नई रिपोर्ट में भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है, जबकि कई विकसित और अमीर देशों की रैंकिंग में गिरावट देखी गई है.
भारत की बड़ी छलांग, पाकिस्तान पीछे
2026 की रैंकिंग के मुताबिक भारत ने उल्लेखनीय सुधार किया है. भारतीय पासपोर्ट अब 75वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह 85वें पायदान पर था. यानी भारत ने 10 स्थान की छलांग लगाई है. भारतीय नागरिक अब 56 देशों में वीजा-फ्री या आसान वीजा सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं.
वहीं पाकिस्तान की रैंकिंग में भी मामूली सुधार हुआ है, लेकिन वह अभी भी काफी पीछे है. पाकिस्तान 98वें स्थान पर है, जबकि पिछले साल वह 103वें स्थान पर था. पाकिस्तान के नागरिक केवल 31 देशों में वीजा-फ्री यात्रा कर सकते हैं. वैश्विक स्तर पर भारत को मध्यम श्रेणी में रखा गया है, जबकि पाकिस्तान निचले समूह में शामिल है, जहां अफगानिस्तान, इराक और यमन जैसे देश आते हैं.
सबसे ताकतवर पासपोर्ट कौन सा?
इस साल भी सिंगापुर ने पहला स्थान हासिल किया है. सिंगापुर के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं. दूसरे स्थान पर तीन देश संयुक्त रूप से मौजूद हैं- जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात, जहां के नागरिक 187 देशों तक वीजा-फ्री पहुंच रखते हैं.
हालांकि, एक खास बात यह है कि UAE के नागरिकों को संयुक्त राज्य अमेरिका में वीजा-फ्री प्रवेश नहीं मिलता, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया के नागरिकों को यह सुविधा हासिल है.
टॉप-10 पासपोर्ट वाले देश
रैंकिंग में आगे रहने वाले देशों में नॉर्वे और स्विट्जरलैंड (185 देशों तक पहुंच) शामिल हैं. इसके अलावा यूरोपीय संघ के कई देशों के पासपोर्ट भी मजबूत माने जाते हैं, हालांकि सदस्य देशों के बीच वीजा-फ्री पहुंच में अंतर देखा जाता है—जैसे स्वीडन 186 देशों तक पहुंच रखता है, जबकि बुल्गारिया और रोमानिया के लिए यह संख्या 177 है.
इसके अलावा मलेशिया, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड भी टॉप-10 में शामिल हैं.
अमीर देशों की रैंकिंग क्यों गिरी?
इस साल कई विकसित देशों की रैंकिंग में गिरावट देखने को मिली है. संयुक्त राज्य अमेरिका, जो कभी इस सूची में शीर्ष स्थान पर रहा करता था, अब 10वें स्थान पर पहुंच गया है. इसकी मुख्य वजह कड़े वीजा नियम और अन्य देशों के साथ पारस्परिक समझौतों (reciprocity) की कमी मानी जा रही है.
इसी तरह यूनाइटेड किंगडम भी टॉप-3 से बाहर हो चुका है और अब छठे स्थान पर है. कनाडा और ऑस्ट्रेलिया भी पहले टॉप-5 में शामिल थे, लेकिन अब वे क्रमशः 7वें और 8वें स्थान पर पहुंच गए हैं. सुरक्षा और प्रवासन नियंत्रण के लिए सख्त वीजा नीतियां अपनाने का असर इन देशों की रैंकिंग पर पड़ा है.
सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देश
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों में अफगानिस्तान सबसे नीचे है, जहां के नागरिक केवल 23 देशों तक वीजा-फ्री पहुंच रखते हैं. इसके अलावा सीरिया, इराक, सोमालिया, नेपाल, उत्तर कोरिया, बांग्लादेश और ईरान जैसे देश भी निचले पायदान पर हैं.
कुल मिलाकर, 2026 की इस रैंकिंग में भारत की स्थिति में सुधार सकारात्मक संकेत देता है. नए द्विपक्षीय समझौते और बेहतर कूटनीतिक संबंध भारत के पासपोर्ट को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जबकि कई विकसित देशों को अपनी नीतियों के कारण रैंकिंग में नुकसान उठाना पड़ा है.
ये भी पढ़ें- Petrol-Diesel Price: LPG के बाद क्या बढ़ने वाली है पेट्रोल-डीजल की कीमत? सरकार ने दे दिया जवाब