14 अक्टूबर की सुबह अमेरिका और कनाडा के कई एयरपोर्ट्स पर अचानक अजीब घटनाएं घटने लगीं. एयरपोर्ट के इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले पर जहां सामान्यतः उड़ानों की जानकारी होती है, वहां ‘हमास ज़िंदाबाद’ और ‘फ्री फिलिस्तीन’ जैसे संदेश नजर आने लगे. इससे यात्रियों और स्टाफ के बीच हड़कंप मच गया. इसके साथ ही कुछ जगहों पर स्पीकर सिस्टम से धमकी भरे नारे भी सुनाई दिए.
पहले यह किसी टेक्निकल गड़बड़ी जैसा लगा, लेकिन जांच के बाद साफ हुआ कि यह साइबर हमले का नतीजा था. अमेरिका और कनाडा की सुरक्षा एजेंसियां इस हमले को गंभीरता से ले रही हैं, और शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक इसके पीछे किसी फिलिस्तीनी समर्थक हैकर ग्रुप का हाथ हो सकता है.
किन एयरपोर्ट्स पर हुआ हमला?
घटनाएं अमेरिका के पेंसिल्वेनिया स्थित हैरिसबर्ग इंटरनेशनल एयरपोर्ट और कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित केलोना एयरपोर्ट में दर्ज की गईं. इन दोनों जगहों पर यात्रियों और कर्मचारियों ने देखा कि:
हैकरों ने न केवल स्क्रीन कंट्रोल सिस्टम को एक्सेस किया, बल्कि PA सिस्टम (Public Address System) को भी अपने कब्जे में ले लिया.
Dear @realDonaldTrump,
— dahlia kurtz ✡︎ דליה קורץ (@DahliaKurtz) October 15, 2025
Canada's Kelowna airport had a serious security breach. Hacked with Hаmаs propaganda.
Mark Carney won't stand up to the Muslim Brotherhood, but will stand up for them.
🇨🇦 is a security threat to the world.
Thank you for your attention to this matter. pic.twitter.com/hm0DyMd3Nx
कैसे हुआ यह साइबर हमला?
एयरपोर्ट प्रशासन और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह हमला संभवतः एयरपोर्ट के इंटरनल नेटवर्क सिस्टम को एक्सप्लॉइट कर किया गया.
हैरिसबर्ग एयरपोर्ट के प्रवक्ता स्कॉट मिलर ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह स्पष्ट रूप से एक साइबर हमला था. किसी बाहरी पार्टी ने हमारे सूचना प्रणाली के साथ छेड़छाड़ की. जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, हमने संबंधित सिस्टम को तत्काल बंद कर दिया और आईटी विशेषज्ञों को जांच के लिए बुलाया गया."
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हमलावरों ने हमला रिमोट तरीके से किया या किसी इनसाइडर की मदद ली गई.
अमेरिकी साइबर सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और कनाडा दोनों ही साइबर खतरों को लेकर हाई अलर्ट पर हैं. अमेरिका की फेडरल साइबर एजेंसी (CISA) और कनाडा की सरकारी साइबर सुरक्षा एजेंसी ने घटना के बाद त्वरित जांच शुरू की है.
विशेषज्ञों का कहना है कि एयरपोर्ट्स के पब्लिक सिस्टम को हैक कर पब्लिक मैसेजिंग करना आसान नहीं होता, जब तक कि नेटवर्क पर मजबूत सुरक्षा न हो.
इस घटना ने यह भी उजागर किया कि आवाजाही के महत्वपूर्ण केंद्र (Critical Infrastructure) कितने संवेदनशील हैं और किस तरह राजनीतिक संगठनों या विचारधारात्मक गुटों का निशाना बन सकते हैं.
ट्रंप के लिए नई चुनौती?
हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और हमास के बीच मध्यस्थता की कोशिश की थी, जिससे अस्थायी युद्धविराम संभव हुआ. ट्रंप ने इस संघर्ष में अमेरिका की भूमिका को निर्णायक बताया था.
लेकिन अब अमेरिका की जमीन पर हमास समर्थक नारों और मैसेज का चलना, उनकी नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "Truth Social" पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अगर हमास और उसके समर्थक हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ते, तो अमेरिका उचित कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा."
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह घटना ट्रंप के लिए एक दोहरी चुनौती है-
क्या यह हमला हमास का था?
अब तक की जांच में किसी सीधे लिंक की पुष्टि नहीं हुई है कि यह हमला हमास के निर्देश पर हुआ, लेकिन हमास समर्थक हैकर ग्रुप्स की भूमिका पर संदेह है. कुछ ऑनलाइन फोरम्स पर फिलिस्तीनी हैकिंग ग्रुप्स द्वारा इस तरह के साइबर हमले की योजना का जिक्र पहले भी सामने आ चुका है.
Telegram और X (पूर्व ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ऐसे वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, जिनमें एयरपोर्ट्स की स्क्रीन पर संदेश नजर आ रहे हैं. हालांकि इन वीडियो की सत्यता की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकी है.
स्क्रीन पर क्या थे संदेश?
एयरपोर्ट्स की स्क्रीन पर जो मैसेज नजर आए, उनमें शामिल थे:
ये संदेश स्पष्ट रूप से राजनीतिक और धमकी भरे थे, जो केवल विरोध नहीं बल्कि प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश लगते हैं.
ये भी पढ़ें- कौन है नूर वाली महसूद, जिसने पाकिस्तान में मचाई तबाही, कैसे जंग का मैदान बना अफगानिस्तान बार्डर?