यूपी में फिर बजेगा चुनावी बिगुल! इस सीट पर 6 महीने के अंदर होगा उपचुनाव, सचिवालय ने जारी किया आदेश

Ghosi BY Election: उत्तर प्रदेश में घोसी विधानसभा सीट पर एक बार फिर उपचुनाव होने जा रहे हैं. समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद यह सीट रिक्त हो गई है.

UP Mau Ghoshi assembly seat has been declared vacant following death of SP MLA Sudhakar Singh
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Ghosi BY Election: उत्तर प्रदेश में घोसी विधानसभा सीट पर एक बार फिर उपचुनाव होने जा रहे हैं. समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद यह सीट रिक्त हो गई है. अब विधानसभा सचिवालय ने इस सीट पर उपचुनाव कराने के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके तहत अगले छह महीने के भीतर यह चुनाव कराए जाएंगे. घोसी विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है, और अब एक बार फिर सपा और भाजपा के बीच मुकाबला होने की संभावना है.

सुधाकर सिंह के निधन से रिक्त हुई घोसी सीट

घोसी विधानसभा सीट के सपा विधायक सुधाकर सिंह का 20 नवंबर को निधन हो गया था. उनके निधन के बाद, यह सीट खाली हो गई है. विधानसभा सचिवालय ने इस सीट पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. चुनाव आयोग ने इस बारे में सभी संबंधित अधिकारियों को सूचना दे दी है, और अब उपचुनाव को लेकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे. नियमों के अनुसार, अगर किसी विधायक की मृत्यु, इस्तीफा या अयोग्यता के कारण किसी सीट पर रिक्तता आती है, तो छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना अनिवार्य होता है.

घोसी सीट का राजनीतिक महत्व

घोसी विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में स्थित है और यह सीट हमेशा से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रही है. 2022 में जब दारा सिंह चौहान ने समाजवादी पार्टी में शामिल होकर घोसी से चुनाव लड़ा, तो उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को हराया था. हालांकि, दारा सिंह का विधायक बनने का सफर ज्यादा लंबा नहीं चला, क्योंकि उन्होंने कुछ ही महीनों बाद भाजपा से इस्तीफा दे दिया और फिर से पार्टी में शामिल हो गए. इसके बाद 2023 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें समाजवादी पार्टी ने सुधाकर सिंह को टिकट दिया और उन्होंने भाजपा के दारा सिंह चौहान को 50,000 वोटों से हराया.

बीजेपी और सपा के बीच फिर से मुकाबला

सुधाकर सिंह की इस जीत ने एक बार फिर से घोसी विधानसभा सीट को राजनीतिक दृषटिकोन से महत्वपूर्ण बना दिया था. उनकी जीत का सिलसिला ढाई साल तक जारी रहा, लेकिन अब उनके निधन के बाद एक बार फिर से यह सीट खाली हो गई है. अब इस सीट पर आगामी उपचुनाव में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला होने की संभावना है. सपा और भाजपा दोनों ही इस सीट को लेकर गंभीर हैं, और 2027 के चुनाव से पहले यह उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है.

क्या हो सकती है उपचुनाव की सियासी जंग?

सुधाकर सिंह की अचानक मौत से मऊ में एक राजनीतिक शून्यता पैदा हो गई है. अब देखना यह है कि सपा और भाजपा इस उपचुनाव में अपनी रणनीति कैसे बनाते हैं. भाजपा जहां अपनी पुरानी हार का बदला लेना चाहती है, वहीं समाजवादी पार्टी इस सीट को बनाए रखने की कोशिश करेगी. भाजपा ने दारा सिंह चौहान को फिर से टिकट देने की संभावना जताई है, जबकि सपा को यह उम्मीद है कि वह सुधाकर सिंह की लोकप्रियता का फायदा उठा पाएगी.

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