PoK में हिंसा पर पाकिस्तान को UN की फटकार, प्रदर्शनकारियों की मौत का देना होगा हिसाब!

हाल ही में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और लोगों की मौत के मामले में संयुक्त राष्ट्र ने साफ कहा है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को नुकसान पहुंचा है, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.

UN reprimands Pakistan over violence in PoK answer for the deaths of protesters
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में बिगड़ते हालात को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है. हाल ही में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और लोगों की मौत के मामले में संयुक्त राष्ट्र ने साफ कहा है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को नुकसान पहुंचा है, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान से प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के डिप्टी प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि महासचिव मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क के काम का समर्थन करते हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख की अपील को गंभीरता से लेगा.

शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कार्रवाई को लेकर सवाल

पीओके में हाल की घटनाओं को लेकर जब संयुक्त राष्ट्र से पूछा गया कि क्या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की जांच होनी चाहिए, तो फरहान हक ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लोगों को प्रदर्शन का अधिकार मिलना चाहिए. अगर ऐसे लोगों को किसी तरह का नुकसान पहुंचा है, तो उसकी जवाबदेही तय करना जरूरी है.

संयुक्त राष्ट्र का यह बयान ऐसे समय आया है जब पीओके में लंबे समय से स्थानीय लोगों के बीच कई मुद्दों को लेकर नाराजगी बनी हुई है. प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली है.

वोल्कर तुर्क ने भी जताई थी चिंता

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क पहले ही पीओके की स्थिति पर चिंता जता चुके हैं. उन्होंने हाल की हिंसा में हुई मौतों की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

तुर्क ने प्रदर्शनकारियों की मौत के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था में तैनात जवानों की मौत की भी जांच की बात कही थी. उनका कहना था कि हिंसा के दौरान हुई हर मौत की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए.

इंटरनेट और प्रदर्शन पर पाबंदी भी सवालों के घेरे में

संयुक्त राष्ट्र ने केवल हिंसा को लेकर ही चिंता नहीं जताई है, बल्कि इंटरनेट और लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि लोगों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार मिलना चाहिए. इंटरनेट पर रोक और सार्वजनिक प्रदर्शन पर पाबंदी से अभिव्यक्ति की आजादी प्रभावित हो सकती है.

जून से लगातार बिगड़ते रहे हालात

संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि क्षेत्र में चुनाव से पहले भी हालात तनावपूर्ण रहे. जून से लेकर चुनाव से पहले तक कई लोगों की मौत की खबर सामने आई थी. इनमें ज्यादातर प्रदर्शनकारी बताए गए, जबकि कानून-व्यवस्था संभालने वाले सुरक्षाकर्मी भी हिंसा में मारे गए.

संयुक्त राष्ट्र ने सभी मौतों की तत्काल, गहरी और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की थी. साथ ही सभी पक्षों से तनाव कम करने और शांति बनाए रखने को कहा गया था.

JAAC पर पाकिस्तान की कार्रवाई

पीओके में हुए विरोध प्रदर्शनों में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC की अहम भूमिका बताई गई है. इस संगठन से व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता जुड़े हैं.

पाकिस्तान ने JAAC पर सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाते हुए आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया है. इसके बाद संगठन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की गई.

UN की नजर अब पाकिस्तान के कदम पर

पीओके में हिंसा और प्रदर्शन को लेकर संयुक्त राष्ट्र की चिंता के बाद अब नजर पाकिस्तान की अगली कार्रवाई पर है. संयुक्त राष्ट्र ने साफ संकेत दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और अगर कार्रवाई के दौरान लोगों को नुकसान पहुंचा है, तो उसकी जांच के साथ जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए.

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान सरकार संयुक्त राष्ट्र की अपील पर क्या कदम उठाती है और पीओके में हाल की हिंसा की जांच को लेकर उसका रुख क्या रहता है.

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