पीएम सूर्य घर योजना से जुड़े 50 लाख परिवार, एक करोड़ के लक्ष्य का आधा सफर पूरा, रोजगार के भी बढ़े अवसर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. योजना के तहत देशभर में अब तक 50.06 लाख परिवारों को रूफटॉप सोलर से जोड़ा जा चुका है.

50 lakh families have joined the PM Surya Ghar Yojana employment also increased
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. योजना के तहत देशभर में अब तक 50.06 लाख परिवारों को रूफटॉप सोलर से जोड़ा जा चुका है. इसके साथ ही सरकार के एक करोड़ घरों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणाली लगाने के लक्ष्य का आधा सफर पूरा हो गया है.

13 फरवरी 2024 को 75,021 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू की गई यह योजना दुनिया के सबसे बड़े आवासीय रूफटॉप सोलर कार्यक्रमों में शामिल हो गई है. योजना का उद्देश्य घरों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ बिजली के खर्च को कम करना और लोगों को अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना है.

41.76 लाख से ज्यादा सोलर सिस्टम लगाए गए

योजना के तहत अब तक देशभर में 41,76,800 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं. इससे करीब 14,837.63 मेगावाट विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा क्षमता जुड़ी है.

सरकार की ओर से लाभार्थियों को सब्सिडी भी सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है. अब तक 28,024.21 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए लाभार्थियों के खातों में पहुंचाई जा चुकी है.

6 दिन से भी कम समय में जुड़ रहे एक लाख परिवार

योजना के विस्तार की रफ्तार में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. शुरुआत में पहले एक लाख परिवारों को योजना से जोड़ने में 118 दिन लगे थे. अब यही संख्या महज 6 दिन से भी कम समय में पूरी हो रही है. इससे योजना के तेजी से विस्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है.

बिजली उपभोक्ता से उत्पादक बन रहे परिवार

पीएम सूर्य घर योजना के जरिए परिवार अपनी छत पर सौर ऊर्जा का उत्पादन कर रहे हैं. इससे बिजली के बिल में बड़ी बचत हो रही है और कई परिवारों का बिजली बिल शून्य तक पहुंच गया है.

नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत घरों में जरूरत से ज्यादा पैदा होने वाली बिजली को बिजली ग्रिड में भेजा जा सकता है. इस तरह लोग केवल बिजली के उपभोक्ता नहीं रह जाते, बल्कि अतिरिक्त बिजली का उत्पादन कर उससे कमाई भी कर सकते हैं.

डिजिटल प्रक्रिया से आसान हुआ लाभ

योजना को आसान बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है. जन समर्थ पोर्टल के जरिए कागजरहित ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. देशभर की 80 से अधिक बिजली वितरण कंपनियों को इससे जोड़ा गया है.

इसके अलावा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के जरिए सब्सिडी का भुगतान 15 दिनों के भीतर करने की व्यवस्था की गई है.

बिना गारंटी के सस्ता ऋण

योजना के तहत लोगों को 10 साल की अवधि के लिए बिना किसी गारंटी के रियायती ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी दी जा रही है. वर्तमान में यह ब्याज दर 5.75 प्रतिशत बताई गई है.

वहीं, 10 किलोवाट तक की सौर ऊर्जा प्रणाली के लिए तकनीकी व्यवहार्यता की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है. लोड बढ़ाने की प्रक्रिया को भी स्वचालित बनाया गया है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए प्रक्रिया और आसान हो गई है.

कमजोर वर्गों के परिवारों पर भी ध्यान

सरकार ने बीपीएल, निम्न आय और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन मॉडल शुरू किया है. इसके तहत अब तक 1,59,665 सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं.

रोजगार के भी बढ़े अवसर

पीएम सूर्य घर योजना का असर केवल स्वच्छ ऊर्जा तक सीमित नहीं है. इसके जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं. योजना के तहत अब तक 34,219 विक्रेताओं को पंजीकृत किया गया है और 2.32 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.

बिजली वितरण कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए 3,807.6 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन की भी व्यवस्था की गई है. वहीं, बहुभाषी कॉल सेंटर 15555 के जरिए जागरूकता अभियान और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था की गई है.

सरकार का कहना है कि योजना से घरों की बिजली बचत के साथ-साथ सौर उपकरणों के विनिर्माण, परिवहन, बिक्री और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर स्थानीय रोजगार पैदा हो रहे हैं.

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