अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मंगलवार को पुष्टि की कि अमेरिका और यूक्रेन ने जेद्दा में युद्ध विराम समझौते पर सहमति बनाई है. सऊदी अरब के जेद्दा में हो रही सीजफायर वार्ता में अमेरिका, रूस और यूक्रेन के अधिकारी मौजूद हैं, और इस वार्ता से शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ने की उम्मीद है. मार्को रूबियो ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि आज यूक्रेन ने अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता की शुरुआत होने वाली है.
लेकिन शांति वार्ता शुरू होने से पहले यूक्रेन ने एक अप्रत्याशित कदम उठाया. यूक्रेन ने रूसी शहरों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए, जो अब तक की सबसे बड़ी ड्रोन अटैक मानी जा रही है. इन हमलों को लेकर रूस का दावा है कि उसने 337 ड्रोनों को नाकाम किया, जिनमें से 91 को मॉस्को क्षेत्र में मार गिराया गया. इन हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई और तीन बच्चों सहित 18 लोग घायल हो गए हैं. इसके बावजूद, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का बयान यह संकेत देता है कि इन हमलों का शांति वार्ता पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.
यूक्रेन का इजरायल स्टाइल
यूक्रेन का यह कदम इजरायल की रणनीति से मेल खाता है, जो अक्सर शांति वार्ता से पहले दुश्मन के खिलाफ हमले कर उसे कमजोर करने की कोशिश करता है. इजरायल का मानना है कि इस तरह से युद्ध विराम की शर्तों पर दबाव डाला जा सकता है. गाजा शांति वार्ता के दौरान भी इजरायल ने इसी तरह की रणनीति अपनाई थी.
कुर्स्क के एक बड़े हिस्से पर कब्जा
यूक्रेन के कब्जे वाले कुर्स्क क्षेत्र में भी घटनाएं तेजी से बदल रही हैं. रूस के रक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुर्स्क के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है, जिससे यूक्रेनी सेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा. अमेरिकी खुफिया जानकारी के बंद होने के कारण, यूक्रेनी सेना के लिए रूसी बलों की हरकतों का सही आकलन करना मुश्किल हो गया है, और इस कारण उन्हें मोर्चे पर खराब परिणामों का सामना करना पड़ा है.
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