UCC in West Bengal: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने प्रस्तावित कानून के प्रारूप की विस्तृत समीक्षा के लिए नौ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है. इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी.
A 9-member committee formed to examine the draft Uniform Civil Code, West Bengal, 2026 Bill. pic.twitter.com/hz76Ar1YnZ
— ANI (@ANI) July 11, 2026
सरकार का लक्ष्य आगामी अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान 'यूनिफॉर्म सिविल कोड, पश्चिम बंगाल-2026' विधेयक को सदन में पेश करना है. इससे पहले समिति ड्राफ्ट के सभी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं की गहन जांच करेगी.
आधिकारिक अधिसूचना के साथ प्रक्रिया हुई शुरू
राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है. अधिसूचना के अनुसार, भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में निहित राज्य के नीति निदेशक तत्वों को ध्यान में रखते हुए UCC का प्रारूप तैयार किया गया है. अब इस प्रारूप का कानूनी परीक्षण, व्यावहारिक प्रभाव और सामाजिक पहलुओं का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ समिति को जिम्मेदारी सौंपी गई है. समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू होगी.
#WATCH | Baruipur | West Bengal CM Suvendu Adhikari says, "A committee headed by retired Supreme Court Justice Ranjana Desai has been formed. It will begin its work and submit its findings soon. The UCC (Uniform Civil Code) has been implemented in the state. It is one nation, so… pic.twitter.com/7dROM9baze
— ANI (@ANI) July 11, 2026
किन मामलों में लागू होगा प्रस्तावित कानून?
प्रस्तावित समान नागरिक संहिता का उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है. इसमें विवाह, तलाक, बिना वसीयत की संपत्ति का उत्तराधिकार (निर्वसीयत उत्तराधिकार) तथा वसीयत के आधार पर संपत्ति के हस्तांतरण (वसीयती उत्तराधिकार) जैसे मामलों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने की योजना है. सरकार का कहना है कि यह कानून धर्म, जाति, पंथ या समुदाय से परे राज्य के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा.
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति जल्द ही अपना कार्य शुरू करेगी और निर्धारित समय में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. उन्होंने कहा कि एक देश में अलग-अलग नागरिक कानूनों की व्यवस्था उचित नहीं मानी जा सकती. उनके अनुसार, सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था का सिद्धांत ही इस पहल का आधार है.
समिति में कौन-कौन हैं शामिल?
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व वाली इस नौ सदस्यीय समिति में कई अनुभवी प्रशासनिक, कानूनी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है. समिति में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दुष्यंत नरयाला, शत्रुघ्न सिंह, संघमित्रा घोष, डॉ. रत्ना भट्टाचार्य, गोपालचंद्र मिश्रा, उस्मान गनी मल्लिक और निर्मल्या भट्टाचार्य सदस्य के रूप में शामिल हैं.
रिपोर्ट के बाद शुरू होगी अगली संवैधानिक प्रक्रिया
विशेषज्ञ समिति प्रस्तावित कानून के प्रत्येक कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलू का विस्तृत अध्ययन करेगी. रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार आवश्यक संशोधन कर विधेयक को विधानसभा में पेश करेगी. यदि विधानसभा से इसे मंजूरी मिलती है तो इसके बाद कानून लागू करने की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
अन्य राज्यों में भी UCC को लेकर बढ़ रही पहल
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता को कानून का रूप दिया जा चुका है. इसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने भी अपने-अपने स्तर पर UCC लागू करने की दिशा में पहल तेज कर दी है. ऐसे में पश्चिम बंगाल की यह पहल देश में समान नागरिक संहिता को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस और राज्यों की तैयारियों के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी कदम मानी जा रही है.
ये भी पढ़ें- PM Modi New Zealand Visit: न्यूजीलैंड दौरे पर PM Modi का पोस्ट, भारतीय समुदाय को लेकर कही बड़ी बात!