एथेनॉल की वजह से भारत मे पेट्रोल सस्ता, सरकार का दावा- ब्लेंडिंग न होती तो ₹125 लीटर मिलता, जानें कैसे

केंद्र सरकार का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना से आम लोगों को बड़ी राहत मिली है.

Ethanol makes petrol cheaper in India it would cost ₹125 per litre without blending
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Ethanol Blended Petrol: केंद्र सरकार का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना से आम लोगों को बड़ी राहत मिली है. सरकार के मुताबिक, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब अगर पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग नहीं होती तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी.

सरकार का दावा है कि इस योजना की वजह से उस समय लोगों को पेट्रोल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर तक की बचत हुई.

अभी दिल्ली में कितना है पेट्रोल का भाव

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में पेट्रोल की कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखा गया. इसकी एक बड़ी वजह पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल की मिलावट रही.

दिल्ली में इस समय E20 पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है. वहीं 100 ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल 169 रुपये प्रति लीटर में मिल रहा है.

सरकार ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद करीब 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था. इसके बाद मई में पेट्रोल के दाम 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए.

खाद्यान्न को लेकर सरकार ने क्या कहा

सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि एथेनॉल बनाने के लिए गरीबों के हिस्से का अनाज इस्तेमाल किया जा रहा है.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कहा कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के सब्सिडी वाले चावल का उपयोग इस योजना में नहीं किया जा रहा है. सरकार के अनुसार, खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है.

क्या एथेनॉल से माइलेज कम होता है

सड़क परिवहन मंत्रालय ने बताया कि इस विषय पर कई संस्थानों ने अध्ययन किया है. रिपोर्ट के अनुसार, जो वाहन पहले E10 ईंधन के हिसाब से बनाए गए थे, उनमें E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है.

हालांकि सरकार का कहना है कि यह कमी वाहन की स्थिति, इंजन और मॉडल पर भी निर्भर करती है. पहले जारी जानकारी में यह कमी करीब 3 से 5 प्रतिशत तक बताई गई थी.

पूरी जांच के बाद लागू किया गया E20

सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल को बिना तैयारी के लागू नहीं किया गया. इसे कई चरणों में लागू किया गया और इससे पहले इंजन, फ्यूल सिस्टम, गाड़ी की क्षमता, प्रदूषण और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की गई.

इस दौरान वाहन बनाने वाली कंपनियों, तेल कंपनियों और चीनी तथा अनाज उद्योग से भी लगातार चर्चा की गई, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो.

करोड़ों वाहन इस्तेमाल कर रहे E20 पेट्रोल

सरकार के मुताबिक, देश में 23 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल वाहन एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इनमें 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें शामिल हैं.

सरकार का दावा है कि अब तक एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है. सरकार का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों और परीक्षणों के आधार पर E20 पेट्रोल से वाहनों की सामान्य परफॉर्मेंस पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं देखा गया है.

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