मैसूर में स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर विवेका स्मारक के उद्घाटन के मौके पर पीएम मोदी ने कहा, भारत के युवा मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और डिजिटल इकॉनमी में देश की तेज़ी से हो रही तरक्की के पीछे मुख्य ड्राइविंग फ़ोर्स बनकर उभरे हैं. शिक्षा, बराबरी और सेवा देश की तरक्की की बुनियाद हैं.
पीएम मोदी ने कहा, आज, भारत अपने युवाओं की ताकत की वजह से सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के अपने नए सफ़र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. आज, भारत की इकॉनमी दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली इकॉनमी में से एक है, और यह भी भारत के युवाओं की ताकत की वजह से है. भारत अब अपने युवाओं की ताकत की वजह से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है. भारत अपने युवाओं की ताकत की वजह से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फ़ोन बनाने वाला देश भी बन गया है. भारत में बने डिजिटल सॉल्यूशन दुनिया भर के कई देशों को प्रेरणा दे रहे हैं.
युवा दुनिया को विकास को दे रहा गति - पीएम मोदी
मैसूर में पीएम मोदी ने कहा स्वामी विवेकानंद जी युवाओं की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे. उन्होंने ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं. लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था. भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरो में जकड़े हुए थे. उस दौर से लेकर आज तक भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है. भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है. आज भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है. ये सब भारत के युवाओं के सामर्थ्य की वजह से ही हो रहा है. आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है. वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य से.
पीएम ने स्वामी विवेकानंद को भी किया याद
प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता. इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएं देनी होती है, साधनाएं करनी होती हैं, तप करना होता है, खुद को तपाना और खपाना पड़ता है. ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है. लेकिन तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता. जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है. इसलिए भाई-बहनों स्वामी विवेकानंद जी के जीवन में मैसूरु का इतना अहम योगदान था. करीब 130 वर्ष पहले स्वामी जी 1 युवा सन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए यहां आए थे.
तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी, लेकिन विचार उतने ही ऊंचे थे. उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े उनमें से एक प्रमुख मैसूरु के तत्कालीन महाराजा का भी था. स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था. उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था. जो कहते हैं कि वास्तव में वही जीता है, जो दूसरों के लिए जीता है. शिक्षा और स्वास्थ से जुड़ी सेवाएं हों या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है. मुझे विश्वास है कि Viveka Smaraka साधकों और श्रद्दालुओं के लिए आत्मिक उत्थान के एक तीर्थ बनेगा.
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