नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलावे पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार, 19 जनवरी को भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए. यह यात्रा उनके लिए खास महत्व रखती है, क्योंकि यह पिछले 10 सालों में उनकी भारत की पांचवीं यात्रा और UAE के राष्ट्रपति के तौर पर उनकी तीसरी आधिकारिक यात्रा है. इस दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा हुई, जो द्विपक्षीय रिश्तों को और भी मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है.
भारत-UAE के रिश्तों में नया मोड़
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर गहन चर्चा की. पिछले एक दशक में भारत और यूएई के बीच रणनीतिक साझेदारी में निरंतर वृद्धि देखी गई है. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण परियोजना पर सहमति बनी, जिसके तहत अबू धाबी में भारतीय कला और पुरातत्व के संग्रहालय समेत एक सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किया जाएगा. यह कदम दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक सहयोग को प्रगाढ़ करने में मदद करेगा.
वैश्विक स्थिति और द्विपक्षीय सहयोग
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है. अमेरिका, चीन और रूस के बीच तनाव बढ़ रहा है, वहीं ईरान में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं. इसके अलावा, यूएई और सऊदी अरब के बीच भी मतभेदों की खबरें सामने आई हैं. इस संवेदनशील समय में भारत और यूएई के नेतृत्व की यह मुलाकात विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और भी प्रगाढ़ बना सकती है.
व्यापारिक रिश्तों में मजबूती
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 100.06 अरब डॉलर को पार कर चुका है, जो कि 19.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. इससे यूएई अब भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में एक प्रमुख स्थान बना चुका है. दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं, जो आर्थिक विकास और सहयोग के नए अवसरों को जन्म दे सकते हैं.
आतंकवाद, रक्षा और एआई पर अहम चर्चा
भारत यात्रा के दौरान शेख मोहम्मद बिन जायद ने प्रधानमंत्री मोदी से आतंकवाद, रक्षा सहयोग, एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), और निवेश जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच निजी और प्रतिनिधिमंडल स्तर पर विस्तृत वार्ता हुई. इस दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें विशेष रूप से सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के विकास पर एक समझौता हुआ, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है.
ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा सहयोग
यूएई ने भारत को प्रति वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति का वादा किया है, जिससे वह भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बन गया है. इसके अलावा, गुजरात के धोलेरा में स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के विकास में यूएई की भागीदारी को लेकर एक समझौता हुआ. खाद्य सुरक्षा और कृषि सहयोग को लेकर भी एक महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे भारतीय किसानों को लाभ मिलने के साथ-साथ यूएई में खाद्य सुरक्षा में भी मजबूती आएगी.
न्यूक्लियर और एआई के क्षेत्र में साझेदारी
भारत और यूएई ने न्यूक्लियर ऊर्जा और एआई क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा देने पर सहमति जताई. दोनों देशों ने मिलकर एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने की योजना बनाई है. इसके साथ ही यूएई भारत में डेटा सेंटर में निवेश करेगा, जो दोनों देशों के तकनीकी संबंधों को और मजबूत करेगा. इसके अलावा, दोनों देश पश्चिम एशिया और अफ्रीका में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे.
पाकिस्तान को आतंकवाद पर कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी खुलकर चर्चा की. दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद की निंदा की और यह स्पष्ट किया कि आतंकवादियों, उन्हें फंड करने वाले और उनके समर्थकों को न्याय के कटघरे में लाना आवश्यक है. इस बयान को पाकिस्तान के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा सकता है.
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