भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होंगे फायर फाइटिंग रोबोट, जानिए FF BOT कैसे करेंगे जवानों की रक्षा?

भारतीय सेना ने अपनी सबसे संवेदनशील सैन्य सुविधाओं में अग्नि आपातकालीन स्थितियों के दौरान जोखिम को कम करने के लिए एक समझौता किया है. इसके तहत उच्च जोखिम वाले स्थानों जैसे शस्त्रागारों और गोला-बारूद डिपो में इस्तेमाल के लिए स्वदेशी अग्निशमन रोबोट (FF BOTs) खरीदे जाएंगे.

Indian Army signs agreement under iDEX to deploy firefighting robots developed in India
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नई दिल्ली: भारतीय सेना ने अपनी सबसे संवेदनशील सैन्य सुविधाओं में अग्नि आपातकालीन स्थितियों के दौरान जोखिम को कम करने के लिए एक समझौता किया है. इसके तहत उच्च जोखिम वाले स्थानों जैसे शस्त्रागारों और गोला-बारूद डिपो में इस्तेमाल के लिए स्वदेशी अग्निशमन रोबोट (FF BOTs) खरीदे जाएंगे. यह समझौता 13 जनवरी को सेना के क्षमता विकास निदेशालय द्वारा किया गया है, जिसके तहत ₹62 करोड़ की लागत से 18 अग्निशमन रोबोट्स की खरीद का निर्णय लिया गया है.

क्या है FF BOT? 

FF BOT एक बिना चालक वाला ज़मीन आधारित अग्निशमन प्रणाली है, जिसे स्वदेशी कंपनी स्वदेशी एंप्रीज़ा प्राइवेट लिमिटेड ने रक्षा मंत्रालय के 'इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस' (iDEX) कार्यक्रम के तहत विकसित किया है. इसे ऐसे खतरनाक वातावरण में काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो मानव अग्निशमन कर्मियों के लिए बहुत खतरनाक होते हैं. 

FF BOT को क्यों अपना रही सेना? 

इस रोबोट को मूल रूप से भारतीय नौसेना के लिए iDEX कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया था, सेना इसे पहली बार खरीदने जा रही है. क्योंकि सेना के पास यह प्रावधान है कि एक सेवा (सेना, नौसेना या वायुसेना) पहले से परीक्षण और मंजूरी प्राप्त iDEX उत्पादों को अन्य सेवाओं से खरीद सकती है. इस प्रणाली को एकल चरण परीक्षण (Single Stage Composite Trial) के बाद मंजूरी मिली है, जो अब सेना के उपयोग के लिए तैयार है. सेना डिजाइन ब्यूरो ने इस परियोजना का समर्थन किया, जो 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत रक्षा स्टार्टअप्स के साथ काम करने और स्वदेशी समाधानों को बढ़ावा देने के प्रयासों को दर्शाता है.

कैसे होगी तैनाती?

इस अनुबंध में दो साल की वारंटी और पांच साल का व्यापक रख-रखाव शामिल है, साथ ही ऑन-साइट सेवा समर्थन भी प्रदान किया जाएगा, जिससे कुल समर्थन अवधि सात साल हो जाएगी. रोबोट्स की तैनाती अप्रैल के पहले सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद है, जिसके बाद इन्हें देश भर के विभिन्न छावनियों में तैनात किया जाएगा.

FF BOT का उपयोग कहां किया जाएगा?

हालांकि इसका प्राथमिक उपयोग शस्त्रागारों में होगा. FF BOT को अन्य उच्च जोखिम वाले स्थानों पर भी तैनात किया जा सकता है, जैसे कि ईंधन भंडारण सुविधाएं, तेल रिफाइनरी, और औद्योगिक संयंत्र. अधिकारियों ने कहा कि इसे पावर स्टेशनों, हवाई अड्डों और आपदा-प्रतिक्रिया ऑपरेशनों में भी तैनात किया जा सकता है, जहां मानव अग्निशमन कर्मियों का पहुंच पाना मुश्किल हो.

रोबोट क्या कर सकता है?

FF BOT को दूर से ऑपरेट किया जा सकता है, जिससे अग्निशमन कर्मियों को इसे सुरक्षित दूरी से नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है, जबकि यह खतरनाक क्षेत्रों में प्रवेश करता है. इसमें ऑप्टिकल और थर्मल कैमरे होते हैं, जो ऑपरेटरों को लाइव वीडियो फीड भेजते हैं. थर्मल इमेजिंग की मदद से हॉटस्पॉट्स और छिपी हुई लपटों का पता लगाया जा सकता है, खासकर उन परिस्थितियों में जब धुआं बहुत अधिक हो या दृश्यता कम हो, जिससे स्थिति की जानकारी और निर्णय लेने में सुधार होता है.

मानव अग्निशमन कर्मियों का समर्थन

अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि यह रोबोट मानव अग्निशमन कर्मियों का प्रतिस्थापन नहीं है, बल्कि उनका समर्थन करने के लिए है. सबसे खतरनाक क्षेत्रों में पहले बिना चालक वाले सिस्टम को भेजकर, FF BOT का उद्देश्य कर्मचारियों के लिए जोखिम को कम करना है, जबकि संवेदनशील और उच्च-खतरे वाले वातावरण में तेज और सुरक्षित प्रतिक्रिया संभव हो सके. यह अग्निशमन रोबोट दिसंबर 2025 में विजय दिवस समारोह के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी के आवास पर भी प्रदर्शित किया गया था.

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