Dimitri Patrushev India visit: झींगा व्यापार पर अमेरिकी टैरिफ का साया, लेकिन रूस बन सकता है भारत के लिए नया दरवाज़ा. वैश्विक व्यापार में जब एक रास्ता बंद होता है, तो दूसरा खुलता है, और इस वक्त भारत के झींगा उद्योग के लिए ऐसा ही एक दरवाज़ा रूस खोल सकता है.
अमेरिका द्वारा भारतीय झींगा पर लगाए गए भारी टैरिफ के बाद इस उद्योग को बड़ा झटका लगा है. लेकिन अब खबर है कि रूस के उप-प्रधानमंत्री दिमित्री पात्रुशेव इस महीने भारत का दौरा कर सकते हैं, जो भारत और रूस के बीच कृषि और खाद्य व्यापार को लेकर नए अवसर ला सकते हैं. झींगा और उर्वरक इस दौरे के केंद्र में रहेंगे.
क्यों आ रहे हैं पात्रुशेव भारत?
दिमित्री पात्रुशेव रूस के एक अनुभवी कृषि विशेषज्ञ हैं. उनका दौरा मुख्य रूप से भारत से झींगा आयात को बढ़ावा देना और साथ ही भारतीय कृषि क्षेत्र को उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर है.
रूस, जो पहले झींगा के बड़े आयातकों में शामिल नहीं था, अब भारतीय निर्यातकों के लिए एक "उभरता हुआ विकल्प" बन सकता है, खासकर तब, जब अमेरिका जैसे पारंपरिक बाजार टैरिफ के ज़रिए व्यापार को मुश्किल बना रहे हैं.
अमेरिकी टैरिफ का भारत पर असर
भारत, अमेरिका को झींगा का सबसे बड़ा निर्यातक है. लेकिन हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद, भारतीय उत्पादकों की लागत और प्रतिस्पर्धा दोनों पर असर पड़ा है. विशेषज्ञों के अनुसार, कुल प्रभावी टैरिफ अब 58% से ऊपर पहुंच सकता है, जिससे भारतीय निर्यातक अमेरिकी बाजार में पीछे छूटने लगे हैं.
अब भारत को अमेरिका में इक्वाडोर, इंडोनेशिया, वियतनाम और चीन जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है. ऐसे में रूस जैसे नए बाजार में पैठ बनाना रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी हो गया है.
क्या हासिल करना चाहती है रूस-भारत साझेदारी?
इस दौरे के दौरान पात्रुशेव की योजना भारतीय कृषि, वाणिज्य और विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करने की है.
मुमकिन एजेंडा:
टैरिफ को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव
अमेरिका केवल खुद ही टैरिफ नहीं बढ़ा रहा, बल्कि अब वह G7 देशों पर भी भारत और चीन के खिलाफ एकजुट होकर कदम उठाने का दबाव बना रहा है. हाल ही में G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में अमेरिका ने इस पर चर्चा की और अन्य सहयोगी देशों से भी समर्थन मांगा.
अमेरिका का कहना है कि भारत रूस से तेल खरीदकर पुतिन के यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहा है, जबकि भारत ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है. भारत का स्पष्ट कहना है कि उसकी नीति राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है, न कि किसी के पक्ष या विपक्ष में.
क्या रूस बन पाएगा अमेरिका का विकल्प?
झींगा व्यापार के जानकारों का मानना है कि रूस, यदि उचित ढांचागत और लॉजिस्टिक सपोर्ट दे, तो भारत के लिए एक विश्वसनीय और लंबी अवधि का बाजार बन सकता है. खासकर ऐसे समय में जब पश्चिमी देशों से व्यापारिक अनिश्चितता बनी हुई है.
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं, भाषा, कस्टम प्रक्रिया, भुगतान प्रणाली और रूस के अपने आंतरिक प्रतिबंध. लेकिन भारत और रूस के पुराने रणनीतिक संबंध इस व्यापार को गति देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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